Adidas Adizero

मैराथन के बदलते दौर में जूतों का विकास

साल 2015 से शुरू हुए मैराथन ट्रेनिंग के सफर को अब 11 साल हो चुके हैं। इन ग्यारह सालों में कितने ही running shoes बाजार में आए और कुछ ही महीनों में गायब हो गए। एक समय था जब मैराथन धावक पतले सोल वाले रेसिंग फ्लैट्स पर ही निर्भर रहते थे। मोटे फोम और भारी-भरकम स्टैक हाइट वाले जूतों को शक्की नजरों से देखा जाता था। जब पहली बार adidas adizero pro3 खरीदा, तो मन में भी काफी हिचकिचाहट थी। पहले महीने के दौरान जब शॉर्ट रन किए, तो लगा जैसे किसी स्पंजी गद्दे पर दौड़ रहा हूँ। जमीन से वो सीधा संपर्क पूरी तरह से गायब था। लेकिन तीसरे महीने तक, जब इन्हें संडे लॉन्ग रन में शामिल किया, तो नज़रिया बदलने लगा। 30 किलोमीटर की दौड़ के बाद पिंडलियों में वह चिर-परिचित थकान नहीं थी।
A person clutches their knee in
A person clutches their knee in
किसी भी नए सुपर शू को सीधे रेस के दिन पहनने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए। Hal Higdon के मैराथन ट्रेनिंग प्लान जैसे संरचित प्रोग्राम के साथ इन जूतों को धीरे-धीरे रूटीन में ढालना जरूरी है। पैरों की बायोमैकेनिक्स समझने में और शरीर को कार्बन प्लेट के रिस्पॉन्स के अनुकूल होने में समय लगता है।

शुरुआती अहसास

शुरुआत में, जूते की एड़ी का हिस्सा थोड़ा अस्थिर लग सकता है। धीमी गति पर दौड़ते समय यह जूता थोड़ा अटपटा सा लगता है। पेस बढ़ाते ही यह अपने असली रूप में आ जाता है।
Tip: पहले कुछ हफ्तों के लिए इसे सिर्फ टेम्पो रन या इंटरवल ट्रेनिंग में ही इस्तेमाल करें। रिकवरी रन के लिए सामान्य जूतों पर टिके रहना बेहतर है।

क्या कार्बन प्लेटेड जूते सच में स्पीड बढ़ाते हैं?

मैराथन कम्युनिटी में अक्सर एक सवाल पूछा जाता है कि क्या महंगे जूते सच में धावक को तेज बना सकते हैं। कई लोगों का मानना है कि यह सब सिर्फ मार्केटिंग है। बिना मजबूत ट्रेनिंग के कोई भी जूता जादुई रूप से फिनिश लाइन तक नहीं पहुंचा सकता। विज्ञान का नजरिया इससे थोड़ा अलग है। यह जूते सीधे तौर पर स्पीड नहीं बढ़ाते, बल्कि ऊर्जा बचाते हैं। PubMed Central पर प्रकाशित एक विस्तृत रिसर्च के अनुसार, कार्बन प्लेटेड और एडवांस्ड फोम वाले रनिंग शूज धावक की रनिंग इकॉनमी में 2 से 4 प्रतिशत तक का सुधार कर सकते हैं। एक निश्चित गति पर दौड़ते समय कम ऑक्सीजन और कम ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है।

एनर्जी रिटर्न का विज्ञान

एडिज़ेरो प्रो 3 में एक कठोर कार्बन प्लेट की जगह 'एनर्जी रॉड्स 2.0' का इस्तेमाल किया गया है। ये मेटाटार्सल हड्डियों के आकार की नकल करते हैं। पैर ज़मीन पर पड़ते ही कुशनिंग फोम दबता है और रॉड्स ऊर्जा स्टोर कर लेते हैं। पैर उठाते ही यह सिस्टम एक स्प्रिंग की तरह काम करता है। ऊर्जा का यह रिटर्न मैराथन के आखिरी 10 किलोमीटर में शरीर को टूटने से बचाता है।

लोधी गार्डन के ट्रैक और कुशनिंग का टेस्ट

दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों की सर्द सुबहें। धुंध के बीच लोधी गार्डन और नेहरू पार्क के ट्रैक्स पर दौड़ना एक अलग ही अनुभव होता है। यहाँ के पक्के और कभी-कभी असमान रास्तों पर दौड़ते हुए हमेशा ऐसे जूतों की तलाश रहती है जो झटके को सोख सकें। नेहरू पार्क के 2.7 किलोमीटर के लूप पर स्पीड वर्कआउट के दौरान लाइटस्ट्राइक प्रो कुशनिंग कमाल का साबित होता है। Runner's World के विशेषज्ञों के अनुसार इस जूते का मिडसोल दो लेयर वाले फोम से बना है जो इसे लंबी दूरी की ट्रेनिंग के लिए उपयुक्त बनाता है। दिल्ली की सख्त कंक्रीट की सड़कों पर घुटनों पर पड़ने वाले जोर को यह काफी हद तक कम कर देता है।
A runner prepares on a vibrant
A runner prepares on a vibrant
रास्तों पर अक्सर पैचवर्क होता है, जहाँ सड़क अचानक से ऊंची-नीची हो जाती है। प्रो 3 का बेस पिछले मॉडल्स की तुलना में चौड़ा किया गया है। तीखे मोड़ों पर भी यह बेहतरीन स्थिरता देता है।

आंकड़ों की जुबानी प्रदर्शन का विश्लेषण

एक्सेल स्प्रेडशीट में डेटा एनालिसिस के शौक के चलते, जूतों को सिर्फ उनके "फील" से नहीं, बल्कि सख्त आंकड़ों से परखना मेरी आदत है। तकनीकी स्पेसिफिकेशन्स कुछ इस प्रकार हैं:
  • वजन: लगभग 215 ग्राम (साइज UK 8.5)
  • हील स्टैक हाइट: 39.5mm
  • फोरफुट स्टैक हाइट: 33mm
  • हील ड्रॉप: 6.5mm
पिछले 6 महीनों के लॉन्ग रन के पेस और हार्ट रेट डेटा को ट्रैक करने पर दिलचस्प नतीजे मिले। adidas adizero pro3 पहनकर दौड़ते समय औसत पेस 4:50 मिनट/किमी और औसत हार्ट रेट 148 बीपीएम रहा। पुराने जूतों के साथ इसी पेस पर हार्ट रेट 153 बीपीएम था। 5 बीपीएम का यह अंतर लंबी रेस में बहुत बड़ा फर्क पैदा करता है। वैश्विक स्तर पर भी आंकड़े यही कहानी दोहरा रहे हैं। World Athletics के डेटा के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में वर्ल्ड मेजर मैराथन्स के पोडियम पर इसी फ्रैंचाइज़ी का दबदबा रहा है। एलीट धावकों ने इन जूतों को पहनकर कई शानदार जीत दर्ज की हैं।

मुंबई मैराथन का 35वां किलोमीटर और पुरानी यादें

मरीन ड्राइव की उमस भरी सुबह, और वो 35वां किलोमीटर जिसे "द वॉल" कहा जाता है। शरीर में ग्लाइकोजन लगभग खत्म हो चुका था। हर एक कदम उठाना संघर्ष लग रहा था। इयरफोन्स में पुरानी हिंदी फिल्म का गीत बज रहा था— "रुक जाना नहीं तू कहीं हार के..." उस पल में जब मांसपेशियां जवाब दे चुकी होती हैं, तब जूतों की मैकेनिकल मदद ही आगे खींचती है। रॉकर ज्योमेट्री ने पैरों को रुकने नहीं दिया। मैराथन की दुनिया में यही वह क्षण है जब एक अच्छा जूता अपना मूल्य साबित करता है।
A runner in black leggings and
A runner in black leggings and
भारत में अपनी ट्रेनिंग को परखने के लिए Athletics Federation of India (AFI) के रनिंग कैलेंडर पर नज़र रखी जा सकती है। कई मान्यता प्राप्त रेस धावकों के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करती हैं।

क्या सुपर शूज टिकाऊ नहीं होते?

रनिंग कम्युनिटी में एक आम धारणा है कि कार्बन शूज सिर्फ 150-200 किलोमीटर तक ही चलते हैं। शुरुआती मॉडल्स के लिए यह बात कुछ हद तक सच थी। आधुनिक मॉडल्स में रबर आउटसोल और फोम तकनीक में काफी सुधार हुआ है। आउटसोल में कॉन्टिनेंटल रबर का इस्तेमाल किया जाता है, जो हाई-परफॉर्मेंस कार के टायरों में भी मिलता है। RunRepeat के ड्यूरेबिलिटी डेटा के अनुसार, यह जूता अन्य ब्रांड्स की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ है।

आउटसोल की मजबूती का तकनीकी पहलू

हील के बाहरी किनारे पर रबर का एक बहुत ही पतला टेक्सचर्ड पैच होता है। इसमें मौजूद माइक्रो-ग्रूव्स डामर पर अतिरिक्त घर्षण पैदा करते हैं। 400 किलोमीटर दौड़ने के बाद भी हील के बाहरी किनारे पर केवल 1.2 मिमी की घिसावट दर्ज की जाती है। लाइटस्ट्राइक प्रो फोम लंबी दूरी के बाद भी अपनी रिबाउंड क्षमता को 85% तक बनाए रखता है।
ध्यान रखें कि हैवी हील स्ट्राइकर्स को फोम में थोड़ी जल्दी सिकुड़न देखने को मिल सकती है।

रेस डे के लिए स्पष्ट तुलना

धावकों को अक्सर यह तय करने में मुश्किल होती है कि किस तकनीक को चुना जाए। यहाँ एक स्पष्ट तुलनात्मक मैट्रिक्स दिया गया है:
विशेषता Adidas Adizero Pro 3 पारंपरिक रेसिंग फ्लैट्स
कुशनिंग और रिकवरी मैराथन के बाद पैरों में कम थकान, तेजी से रिकवरी। पैरों पर अत्यधिक दबाव, रिकवरी में कई दिन लगते हैं।
रनिंग इकॉनमी एनर्जी रॉड्स के कारण ऊर्जा की बचत। पूरी तरह से धावक की शारीरिक क्षमता पर निर्भर।
वजन (Weight) थोड़ा अधिक भारी (215g) लेकिन फोम की वापसी से संतुलित। बेहद हल्के (150-180g) लेकिन सुरक्षा कम।
स्थायित्व (Durability) कॉन्टिनेंटल रबर के साथ 400-500 किमी तक उपयोगी। 200-300 किमी के बाद शॉक एब्जॉर्प्शन खत्म हो जाता है।
आदर्श धावक प्रोफाइल एडवांस्ड मैराथनर जो अपनी पेस सुधारना चाहते हैं। 5K/10K रेसर्स और ट्रैक एथलीट्स।

Source: Compiled data and standard marathon training metrics. Last verified: 2026-06-06 तकनीक के इस तेजी से बदलते दौर में एक सवाल हमेशा बना रहता है। आज जो फोम क्रांतिकारी लग रहा है, क्या कुछ सालों बाद नई पीढ़ी के धावक इसे वैसे ही अप्रचलित मानेंगे जैसे आज हम एक दशक पुराने जूतों को मानते हैं? विज्ञान की इस गति के साथ कदम मिलाते हुए शायद हमें बस दौड़ते रहना होगा।
R

Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

View all posts →

Comments

Comments are currently closed. Have feedback or a question? Visit the Contact page.