पहली मैराथन के

शुरुआत का जोश और ओवरट्रेनिंग की समस्या

साल 2015 का वह समय मुझे आज भी स्पष्ट याद है। दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर बिना किसी दिशा के बस दौड़ पड़ना मेरी दिनचर्या बन गया था। आज 33 वर्ष की आयु में जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो वह शुरुआती उत्साह बहुत बचकाना लगता है। हर नए धावक की तरह मेरे मन में भी हज़ारों सवाल थे। "क्या मैं बहुत धीमा दौड़ रहा हूँ?" "क्या मुझे हर दिन दौड़ना चाहिए?" समस्या यह थी कि नए धावक बहुत जल्दी, बहुत तेज़ दौड़ने की कोशिश करते हैं। मैं हर दिन अपनी सीमा पार करने की कोशिश करता था। नतीजा? शिन स्प्लिंट्स (shin splints) और घुटने की गंभीर चोटें।

दौड़ना सिर्फ पैरों का नहीं, सही रणनीति का खेल है। वैज्ञानिक शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि नौसिखिए धावकों में ओवरयूज़ इंजरी सबसे आम है। PubMed Central: Running Injuries की रिपोर्ट के अनुसार, अचानक से माइलेज बढ़ाने पर शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां उस तनाव को सह नहीं पाती हैं। सबसे सुरक्षित समाधान है माइलेज को धीरे-धीरे बढ़ाना—प्रति सप्ताह 10% से अधिक नहीं। शरीर को रिकवर होने का समय देना सबसे पहली आवश्यकता है।

Runners push through a marathon
Runners push through a marathon

क्या कोई परफेक्ट Marathon Training Plan है?

दौड़ के समुदाय और ऑनलाइन मंचों पर अक्सर एक बहस छिड़ी रहती है कि क्या केवल रोज़ दौड़कर 42.195 किलोमीटर की दूरी तय की जा सकती है। डेटा और विशेषज्ञों की राय इसके बिलकुल विपरीत है। एक सही marathon training plan के बिना रेस के दिन क्रैश होना लगभग तय है।

  1. वर्तमान फिटनेस का आकलन: ट्रेनिंग शुरू करने से पहले लगातार दौड़ने की क्षमता का परीक्षण आवश्यक है।
  2. सही प्लान का चयन: शुरुआती स्तर के लिए Hal Higdon Novice 1 Program एक विश्वस्त 18-सप्ताह का प्रोग्राम है, जो सुरक्षित तरीके से माइलेज बढ़ाता है।
  3. लॉन्ग रन (Long Run): सप्ताह के अंत में होने वाला लॉन्ग रन ट्रेनिंग की नींव होता है।
  4. टेपरिंग (Tapering): रेस से 2-3 हफ्ते पहले माइलेज कम करना ज़रूरी है ताकि रेस वाले दिन पैर ताज़ा रहें।
Tip: दो कठिन दिनों (जैसे स्पीड वर्कआउट और लॉन्ग रन) को एक साथ न रखें। रिकवरी के दिन उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

जूतों का विज्ञान और डेटा का खेल

मेरा जूतों का सफर काफी दर्दनाक रहा। पहले महीने मैंने पुराने स्नीकर्स पहने। तीसरे महीने तक दिल्ली की कंक्रीट की सड़कों पर दौड़ने के कारण पैरों में भयंकर छाले पड़ गए। फिर मैंने अपने शौक का इस्तेमाल किया—एक्सेल स्प्रेडशीट। मैंने विभिन्न जूतों की कुशनिंग, हील-टू-टो ड्रॉप और वजन का एक्सेल में डेटा एनालिसिस किया।

मैराथन के लिए सही सपोर्ट वाले जूते चुनना बहुत महत्वपूर्ण है। RunRepeat Marathon Shoe Guide के डेटा-आधारित सुझावों का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही मैंने सही विकल्प चुना।

महत्वपूर्ण जानकारी: रेस के दिन कभी बिल्कुल नए जूते न पहनें। जूतों को पैरों के आकार में ढलने के लिए कम से कम 40-50 किलोमीटर की दौड़ (break-in period) की आवश्यकता होती है।
Runners pound the pavement through
Runners pound the pavement through

पहाड़ों की आदत और सड़क की सच्चाई

पहाड़ों में ट्रेकिंग करते समय बिना ज्यादा कुछ खाए-पिए घंटों तक चलने की मेरी आदत थी। मुझे लगा सड़क पर दौड़ना भी ऐसा ही होगा। दिल्ली-एनसीआर में एक लॉन्ग रन के दौरान सुबह बिना कुछ खाए मैंने 20 किलोमीटर दौड़ने का फैसला किया। 15 किलोमीटर बाद शरीर ने काम करना बंद कर दिया। इसे 'Hitting the wall' कहते हैं। शरीर पूरी तरह थक गया था और पैर भारी हो गए थे।

लगभग 90 मिनट की दौड़ के बाद शरीर का ग्लाइकोजन (glycogen) भंडार खाली होने लगता है। लंबी दौड़ से एक रात पहले अच्छे कार्ब्स खाएं। रेस के दौरान हर 45-60 मिनट में 25-30 ग्राम कार्बोहाइड्रेट लेना आवश्यक है। साथ ही, पसीने के साथ निकलने वाले सोडियम की भरपाई के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स बेहद ज़रूरी हैं।

आधिकारिक रेस का चुनाव और रजिस्ट्रेशन

पहली आधिकारिक मैराथन चुनना एक बड़ा कदम है। भारत में एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) द्वारा मान्यता प्राप्त रेस सबसे प्रतिष्ठित मानी जाती हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के लिए पहले से तैयारी करनी होती है।

यहाँ एक बुनियादी चेकलिस्ट है (Last verified: 2021-02-18):

आवश्यक दस्तावेज़/प्रक्रिया कहाँ से प्राप्त करें अनुमानित लागत (INR)
मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट पंजीकृत चिकित्सक (MBBS) ₹500 - ₹1000
पिछली रेस का टाइमिंग सर्टिफिकेट पिछली रेस की वेबसाइट निःशुल्क
रजिस्ट्रेशन शुल्क आधिकारिक मैराथन वेबसाइट ₹1500 - ₹2500

Source: Athletics Federation of India Calendar.

Common Rejections: कई बार टाइमिंग लिंक गलत सबमिट करने या 6 महीने से अधिक पुराना मेडिकल सर्टिफिकेट देने पर रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है।
A laptop keyboard, clipboard with
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पेसिंग और 'शोले' का वह दृश्य

पुरानी हिंदी फिल्मों का मुझे बहुत शौक है। 'शोले' फिल्म में जहाँ ठाकुर (संजीव कुमार) शांति से इंतज़ार करता है, वहीं गब्बर के गुंडे जल्दबाज़ी में होते हैं। मैराथन में भी पेसिंग कुछ वैसी ही है। शुरुआत में 'जय' की तरह तेज़ दौड़ने पर अंत तक हालत खराब हो जाती है। 'ठाकुर' की तरह धैर्य रखना होता है।

शुरुआती धावकों की बड़ी गलती रेस की शुरुआत में तेज़ दौड़ना है। Strava Year in Sport Report के वैश्विक डेटा के अनुसार, जो शौकिया धावक पहले हाफ में गति धीमी रखते हैं, वे बेहतर समय के साथ रेस पूरी करते हैं। अपनी लक्षित गति (Target Pace) की गणना करें। 30वें किलोमीटर के बाद धीमी शुरुआत का असली फायदा समझ आता है.

मैराथन की मानसिक सच्चाई

मैराथन सिर्फ शारीरिक ताकत का खेल नहीं है। एक सर्टिफाइड कोच के तौर पर मैंने अनुभव किया है कि 32वें किलोमीटर के बाद पैर सुन्न हो जाते हैं। उस समय इच्छाशक्ति ही आपको फिनिश लाइन तक ले जाती है। डर और शंकाएं स्वाभाविक हैं। लेकिन अनुशासित दिनचर्या और दृढ़ संकल्प के साथ यह संभव है। जब फिनिश लाइन पार कर मेडल गले में पहनाया जाता है, तो 18 हफ्तों का सारा दर्द गायब हो जाता है।

फिनिश लाइन पार करता हुआ एक थका हुआ लेकिन खुश धावक
फिनिश लाइन पार करता हुआ एक थका हुआ लेकिन खुश धावक
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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