टेपरिंग के दौरान 5 गलतियाँ जो आपकी रेस खराब कर सकती हैं

गलती #1: टेपर क्रेज़ीज़ (Taper Crazies) और अतिरिक्त माइलेज का जाल

मैराथन की दुनिया में एक शब्द बहुत मशहूर है—'टेपर क्रेज़ीज़'। यह वह मानसिक स्थिति है जहाँ एक धावक को लगने लगता है कि उसकी महीनों की मेहनत हवा हो रही है। रेस से दो हफ्ते पहले जब आप अपना माइलेज कम करते हैं, तो शरीर में जमा ऊर्जा आपको बेचैन करने लगती है। आपको लगता है कि आपकी मांसपेशियां ढीली हो रही हैं, वजन बढ़ रहा है और शायद आप अपनी फिटनेस खो रहे हैं। इसी घबराहट में अक्सर धावक 'टेस्ट रन' के नाम पर अतिरिक्त मील दौड़ने की गलती कर बैठते हैं। 2015 से शुरू हुए मेरे मैराथन सफर (आज लगभग 12 वर्ष हो गए) में, मैंने अनगिनत धावकों को इस जाल में फंसते देखा है। दिल्ली-एनसीआर की उमस भरी सुबह में जब आप लोधी गार्डन में अभ्यास कर रहे होते हैं, तो अक्सर दूसरे धावकों को तेज़ दौड़ते देख आप भी अपनी गति बढ़ा देते हैं। लेकिन याद रखिए, टेपरिंग के दौरान "थोड़ा और" दौड़ना आपकी रेस को बेहतर नहीं, बल्कि खराब करता है। Hal Higdon Training का स्पष्ट सिद्धांत है कि मैराथन से 2-3 हफ्ते पहले आपको अपनी आखिरी सबसे लंबी दौड़ (Longest Run) खत्म कर लेनी चाहिए। इसके बाद का समय केवल रिकवरी के लिए है, न कि नई फिटनेस बनाने के लिए।

मानसिक घबराहट की पहचान

जब आप टेपरिंग शुरू करते हैं, तो आपके पैर थोड़े भारी महसूस हो सकते हैं या छोटे-मोटे दर्द (phantom pains) महसूस हो सकते हैं जो पहले नहीं थे। यह महज आपका दिमाग है जो आपको डरा रहा है। समाधान बिल्कुल सीधा है। अपने marathon training plan पर अटूट विश्वास रखें। अगर आपके प्लान ने कहा है कि आज सिर्फ 5 किलोमीटर दौड़ना है, तो उसे 6 किलोमीटर न करें। वह अतिरिक्त एक किलोमीटर आपको मेडल नहीं दिलाएगा।
एक धावक रेस से पहले विश्राम करते हुए - टेपरिंग का मानसिक पक्ष
एक धावक रेस से पहले विश्राम करते हुए - टेपरिंग का मानसिक पक्ष

गलती #2: 'सक्रिय रिकवरी' बनाम 'पूर्ण आलस्य' का अंतर

अक्सर यह मान लिया जाता है कि टेपरिंग का मतलब 'बिल्कुल न हिलना' है। धावक सोफे पर चिपके रहते हैं और सोचते हैं कि वे ऊर्जा बचा रहे हैं। यह एक बहुत बड़ी भूल है। टेपरिंग का उद्देश्य शरीर को आराम देना है, उसे पूरी तरह 'शटडाउन' मोड में डालना नहीं। जब आप निष्क्रिय हो जाते हैं, तो आपकी मांसपेशियां अकड़ सकती हैं और रेस के दिन शरीर सुस्त (lethargic) महसूस करेगा। सक्रिय रिकवरी (Active Recovery) और आलस्य के बीच एक महीन रेखा है। आपको मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह बनाए रखना है ताकि रिपेयर की प्रक्रिया तेज़ हो सके। Sleep Foundation के शोध भी दर्शाते हैं कि रिकवरी में अच्छी नींद के साथ-साथ हल्की हलचल का बड़ा योगदान होता है। नीचे दी गई तालिका से समझिए कि एक आदर्श टेपरिंग रूटीन और गलत आदतों में क्या फर्क है:
गतिविधि (Activity) सही तरीका (Ideal Taper) गलत तरीका (Laziness)
नींद (Sleep) 8-9 घंटे, नियमित समय पर 12 घंटे सोना और दिन भर लेटे रहना
शारीरिक गतिविधि हल्की स्ट्रेचिंग और फोम रोलिंग कोई भी शारीरिक हलचल न करना
दौड़ना प्लान के अनुसार कम दूरी, लेकिन सक्रिय हफ्तों तक दौड़ना पूरी तरह बंद कर देना
मानसिक स्थिति रेस डे की रणनीति पर ध्यान फिटनेस खोने के डर में डूबे रहना

Source: Marathon Guidelines & General Coaching Consensus. Last verified: 2027-03-25

टेपरिंग के दौरान मांसपेशियों की सक्रियता बनाए रखना जरूरी है। यदि आप पूरी तरह से हिलना-डुलना बंद कर देंगे, तो रेस के दिन आपका शरीर "स्टार्ट" होने में ज्यादा समय लेगा।

गलती #3: डाइट के साथ नए प्रयोग और गलत कार्ब-लोडिंग

रनिंग कम्युनिटी में अक्सर देखा जाता है कि रेस से ठीक पहले वाले हफ्ते में धावक डाइट को लेकर ओवर-रिएक्ट करते हैं। "कार्ब-लोडिंग" का मतलब यह कतई नहीं है कि रात भर पास्ता और चावल के पहाड़ खाए जाएं। बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट एक साथ लेने से पेट खराब हो सकता है और भारीपन महसूस होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात: नई डाइट को 'ना' कहें। Runner's World Nutrition के अनुसार, टेपरिंग के दौरान नए खाद्य पदार्थों का परीक्षण जीआई (GI) समस्याओं का कारण बन सकता है, जो महीनों की तैयारी को फिनिश लाइन से पहले ही खत्म कर सकता है। अगर पूरी ट्रेनिंग के दौरान कभी चुकंदर का जूस नहीं पिया, तो रेस से तीन दिन पहले इसे शुरू करने का यह सबसे बुरा समय है।

ग्लाइकोजन स्टोरेज बढ़ाने का सही तरीका

कार्ब-लोडिंग का मतलब है कि शरीर में ग्लाइकोजन (ऊर्जा) का भंडार भरा हुआ हो। इसके लिए रेस से 3-4 दिन पहले अपने भोजन में कार्बोहाइड्रेट का अनुपात बढ़ाना चाहिए, न कि भोजन की कुल मात्रा। फाइबर कम कर दें ताकि रेस के दौरान पेट की समस्या न हो।
A person in silhouette, wearing
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गलती #4: पेस के साथ समझौता करना

टेपरिंग के दौरान धावक एक और बड़ी गलती करते हैं—वे अपनी 'स्पीड' कम कर देते हैं। उन्हें लगता है कि धीरे दौड़ने से ऊर्जा बचेगी। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह गलत है। टेपरिंग का मतलब 'वॉल्यूम' (दूरी) कम करना है, 'इंटेंसिटी' (तीव्रता) नहीं। World Athletics के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अपनी गति को कम करना एक सामान्य गलती है। यदि आपकी टारगेट रेस पेस 5:30 मिनट प्रति किलोमीटर है, तो टेपरिंग के दौरान होने वाली छोटी दौड़ में भी आपको कुछ समय के लिए इसी पेस पर दौड़ना चाहिए। इससे शरीर और दिमाग उस गति के लिए 'ट्यून्ड' रहता है।
"मुझे याद है 2018 की मुंबई मैराथन से पहले, मैंने डर के मारे अपनी सारी रन बहुत स्लो कर दी थीं। नतीजा? रेस के दिन शुरुआती 10 किलोमीटर में ही मेरे पैरों को वह रिदम ही नहीं मिल रही थी जिसकी मैंने महीनों प्रैक्टिस की थी। तब मैंने सीखा कि इंजन को ठंडा जरूर करना है, लेकिन उसे बंद नहीं करना।"

गलती #5: फिटनेस कम होने का डर और ओवर-ट्रेनिंग का विरोधाभास

क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिक रूप से आपकी फिटनेस कम होने में कम से कम 3 से 4 हफ्ते का पूर्ण विश्राम लगता है? एक अच्छे marathon training plan में जो 2 हफ्ते की टेपरिंग होती है, वह आपकी फिटनेस को कम नहीं करती, बल्कि उसे 'अनलॉक' करती है। इसे 'सुपरकम्पेंसेशन' कहते हैं—जब ट्रेनिंग का भार कम किया जाता है, तो शरीर न केवल रिकवर होता है, बल्कि पहले से अधिक मजबूत होकर उभरता है। ओवर-ट्रेनिंग का विरोधाभास यह है कि आप जितना अधिक थकेंगे, आपकी परफॉरमेंस उतनी ही गिरेगी। टेपरिंग वह समय है जब मांसपेशियों में मौजूद सूक्ष्म दरारें (micro-tears) भरती हैं। यदि इस समय भी कड़ी मेहनत जारी रखी जाए, तो आप रेस डे पर "टायर्ड लेग्स" के साथ पहुंचेंगे।
धावक की मांसपेशियां जो रिकवरी के बाद रेस के लिए तैयार हैं
धावक की मांसपेशियां जो रिकवरी के बाद रेस के लिए तैयार हैं

रिकवरी का विज्ञान: डेटा क्या कहता है?

चूंकि मुझे एक्सेल स्प्रेडशीट में डेटा एनालिसिस का शौक है, इसलिए मुझे आंकड़ों में बहुत दिलचस्पी रहती है। धावक अक्सर अपनी भावनाओं पर चलते हैं, लेकिन विज्ञान का नज़रिया अलग है। PubMed Central (NIH) के शोध बताते हैं कि सही टेपरिंग से मांसपेशियों की थकान काफी कम हो जाती है जबकि VO2 Max का स्तर स्थिर बना रहता है। इसका मतलब है कि ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम नहीं होती, बल्कि थकान घटने से कार्यक्षमता 2-3% बढ़ जाती है। मैराथन जैसे धीरज वाले खेल में यह 2-3% का सुधार फिनिश टाइम में कई मिनटों का अंतर पैदा कर सकता है। जब मैं अपनी एक्सेल स्प्रेडशीट में पिछले 12 सालों के रनिंग डेटा को देखता हूँ, तो एक स्पष्ट पैटर्न दिखता है: जिन रेसों में मैंने टेपरिंग के दौरान अपने माइलेज को सही ढंग से कम किया, वहां फिनिश टाइम हमेशा बेहतर रहा।

पुरानी फिल्में, पहाड़ों की ट्रेकिंग और मैराथन का क्लाइमैक्स

जब मैं सड़कों पर पसीना नहीं बहा रहा होता, तो अक्सर खुद को पुरानी हिंदी फिल्मों के संसार में पाता हूँ। आपने गौर किया होगा कि 1960 और 70 के दशक की थ्रिलर फिल्मों में क्लाइमैक्स से ठीक पहले एक ठहराव आता है। वह शांति ही दर्शकों को अंत के लिए तैयार करती है। टेपरिंग भी आपकी मैराथन यात्रा का वही 'इंटरवल' या क्लाइमैक्स से पहले का सस्पेंस है। पहाड़ों में ट्रेकिंग करते समय भी मैंने यही सीखा है कि कभी-कभी ऊंचाई पर जाने से पहले, ऊर्जा बचाने के लिए रुकना पड़ता है। मैराथन रनिंग में भी, 'लेस इज मोर' (कम ही ज्यादा है)। जो धावक इन आखिरी 14 दिनों में अपने उत्साह पर नियंत्रण रख पाते हैं, वे फिनिश लाइन पर सबसे ज्यादा मुस्कुराते हैं।
प्रो टिप: टेपरिंग के दौरान खाली समय का उपयोग अपनी रेस रणनीति (Race Strategy) तैयार करने में करें। हर 5 किलोमीटर पर पेस क्या होगी, हाइड्रेशन पॉइंट्स कहाँ होंगे और किस मोड़ पर गति बढ़ानी है—इसका एक खाका तैयार करें।
अगली बार जब आप टेपरिंग के दौरान जूते पहनते हुए "सिर्फ एक एक्स्ट्रा किलोमीटर" के बारे में सोचें, तो रुक जाएं। याद करें कि पिछले 16-18 हफ्तों में कितनी मेहनत की गई है। अब समय शरीर को वह विश्राम देने का है जिसका वह हकदार है। शांत रहें, सही खाएं और अपने प्रशिक्षण पर भरोसा रखें।
A runner ties light pink laces
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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