मासिक धर्म और रनिंग: ट्रेनिंग को अपने हॉर्मोन्स के साथ कैसे बदलें?

मासिक धर्म और रनिंग: ट्रेनिंग को अपने हॉर्मोन्स के साथ कैसे बदलें?

मैराथन की दुनिया में एक पुरानी कहावत है—"No Pain, No Gain." लेकिन पिछले 12 वर्षों से दिल्ली की सड़कों और लोधी गार्डन के ट्रैक पर दौड़ते हुए मैंने यह सीखा है कि यह मंत्र हर किसी के लिए, हर समय सही नहीं होता। विशेष रूप से महिला धावकों के लिए, एक स्टैंडर्ड 'marathon training plan' अक्सर एक बड़ी बाधा बन जाता है क्योंकि वह एक बहुत ही महत्वपूर्ण जैविक सच्चाई को नजरअंदाज करता है: मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle)। अधिकांश ट्रेनिंग प्लान पुरुषों के शारीरिक डेटा और रिकवरी पैटर्न पर आधारित होते हैं। पुरुषों का हार्मोनल स्तर 24 घंटे के चक्र में चलता है, जबकि महिलाओं का चक्र लगभग 28 दिनों का होता है। जब एक महिला धावक अपने शरीर के हार्मोनल उतार-चढ़ाव के विपरीत जाकर खुद को 'पुश' करती है, तो वह न केवल अपने प्रदर्शन को प्रभावित करती है, बल्कि ओवरट्रेनिंग और चोटों के जोखिम को भी आमंत्रित करती है।
साइकिल सिंकिंग क्या है? यह अपनी रनिंग इंटेंसिटी, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रिकवरी को अपने मासिक धर्म के चरणों (फॉलिक्युलर, ओव्यूलेशन और ल्यूटियल) के अनुसार ढालने की कला है। यह केवल 'आराम' करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह समझने के बारे में है कि कब आपको अपनी पूरी ताकत झोंकनी है और कब शरीर को थोड़ा ढीला छोड़ना है।
World Athletics के स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, एथलीटों के लिए उनके चक्र को समझना उनके दीर्घकालिक करियर के लिए अनिवार्य है। हम अक्सर देखते हैं कि धावक अपनी 'स्ट्रेंथ' और 'पेस' को लेकर परेशान रहते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हॉर्मोन्स मांसपेशियों की रिकवरी और ग्लाइकोजन के उपयोग को सीधे प्रभावित करते हैं। पारंपरिक प्लान की सबसे बड़ी कमी यही है कि वे शरीर को एक मशीन समझते हैं, जबकि हमारा शरीर एक बदलता हुआ ईकोसिस्टम है।
A man intently studies charts displaying
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डेटा और यादें: 12 साल का अनुभव और एक्सेल शीट्स का सफर

मुझे याद है 2015 का वह साल, जब मैंने अपनी पहली बड़ी मैराथन की तैयारी शुरू की थी। उस समय दिल्ली में रनिंग कल्चर आज जैसा नहीं था। मैं अक्सर पुरानी हिंदी फिल्मों के गाने, जैसे 'रुक जाना नहीं तू कहीं हार के', गुनगुनाते हुए सुबह 4 बजे नेहरू पार्क पहुँच जाता था। मेरा जुनून तब केवल दौड़ने तक सीमित नहीं था; मैं अपनी एक्सेल स्प्रेडशीट्स में हर एक किलोमीटर, हर एक हार्ट बीट और यहाँ तक कि उस दिन की उमस का डेटा भी रिकॉर्ड करता था। जैसे-जैसे मैंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा और एक सर्टिफाइड कोच बना, मेरा डेटा प्रेम और गहरा गया। लेकिन एक चीज़ जो मेरी इन शीट्स में बार-बार उभर कर आ रही थी, वह थी मेरी महिला क्लाइंट्स के प्रदर्शन में आने वाला 'रैंडम' उतार-चढ़ाव। कभी वे इंटरवल ट्रेनिंग में कमाल कर देती थीं, तो कभी एक साधारण रिकवरी रन भी उनके लिए पहाड़ चढ़ने जैसा होता था।
"शुरुआत में, मैं भी एक पारंपरिक कोच की तरह सोचता था। मुझे लगता था कि शायद वे पर्याप्त नींद नहीं ले रही हैं या पोषण में कमी है। लेकिन जब मैंने उन आंकड़ों का मिलान उनके मासिक चक्र से करना शुरू किया, तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई। वह रैंडम उतार-चढ़ाव दरअसल एक प्रेडिक्टेबल पैटर्न था।"
आज 2027 में, जब मैं अपने पुराने डेटा को देखता हूँ, तो मुझे अपनी शुरुआती गलतियों पर हंसी आती है। मैंने महसूस किया है कि रिकवरी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि रनिंग, और महिलाओं के लिए रिकवरी की परिभाषा हर हफ्ते बदल सकती है। डेटा एनालिसिस ने मुझे सिखाया कि एक कोच के रूप में मेरा काम केवल 'पेस' बताना नहीं है, बल्कि धावक को उसके अपने शरीर के संकेतों को पढ़ना सिखाना है। कभी-कभी पहाड़ों में ट्रेकिंग करते समय भी मैं यही सोचता हूँ कि प्रकृति की तरह हमारे शरीर की भी अपनी ऋतुएं होती हैं, और उनके विरुद्ध जाना केवल थकान ही देता है।

मिथक बनाम वास्तविकता: क्या पीरियड्स के दौरान दौड़ना हानिकारक है?

समाज में एक बहुत बड़ा मिथक यह है कि पीरियड्स के दौरान दौड़ने से गर्भाशय को नुकसान पहुँच सकता है या यह पूरी तरह से हानिकारक है। लेकिन विज्ञान कुछ और ही कहता है। वास्तविकता यह है कि मासिक धर्म के दौरान सक्रिय रहना वास्तव में कई महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है। PubMed Central (NIH) के एक सिस्टेमैटिक रिव्यू के अनुसार, हालांकि अर्ली फॉलिक्युलर फेज (Early Follicular Phase) में प्रदर्शन में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन मध्यम गति की दौड़ शरीर में एंडोर्फिन रिलीज करती है। यह प्राकृतिक 'फील-गुड' हार्मोन मासिक धर्म के दौरान होने वाले क्रैम्प्स और मूड स्विंग्स को कम करने में मदद कर सकता है।
  • मिथक: पीरियड्स के दौरान दौड़ने से चोट लगने का खतरा बहुत अधिक होता है।
  • वास्तविकता: चोट का खतरा हॉर्मोन्स के कारण होता है, लेकिन वह पीरियड्स के दौरान नहीं, बल्कि ओव्यूलेशन के आसपास अधिक होता है।
  • मिथक: इस दौरान केवल आराम करना चाहिए।
  • वास्तविकता: अगर दर्द असहनीय नहीं है, तो हल्की दौड़ या योग वास्तव में रक्त परिसंचरण में सुधार कर सकता है।
हालांकि, हर महिला का शरीर अलग होता है। कुछ एथलीटों को इस दौरान कोई समस्या नहीं होती, जबकि कुछ को तीव्र थकान महसूस होती है। एक कोच के रूप में, मैंने सीखा है कि 'आराम बनाम सक्रियता' का फैसला धावक के फीडबैक पर आधारित होना चाहिए।

ट्रेनिंग गाइड: फॉलिक्युलर और ल्यूटियल फेज में वर्कआउट कैसे बदलें

अगर आप एक प्रभावी marathon training plan बनाना चाहती हैं, तो आपको अपने चक्र को दो मुख्य हिस्सों में विभाजित करना होगा:

1. फॉलिक्युलर फेज (दिन 1 से 14): ताकत और गति का समय

यह चरण मासिक धर्म के पहले दिन से शुरू होता है और ओव्यूलेशन तक रहता है। इस दौरान, एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने लगता है। - वर्कआउट: यह समय हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT), टेम्पो रन और भारी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के लिए सबसे अच्छा है। - रणनीति: अपने पर्सनल रिकॉर्ड (PR) के लिए इसी समय प्रयास करें। आपका शरीर कार्बोहाइड्रेट को ईंधन के रूप में अधिक कुशलता से उपयोग करता है। - कोच की सलाह: Runner's World के अनुसार, इस फेज में आपकी सहनशक्ति और रिकवरी क्षमता चरम पर होती है।

2. ल्यूटियल फेज (दिन 15 से 28): सहनशक्ति और रिकवरी

ओव्यूलेशन के बाद, प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है और शरीर का कोर तापमान भी लगभग 0.3 से 0.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। - वर्कआउट: यहाँ फोकस 'बेस माइलेज' और कम इंटेंसिटी वाले 'रिकवरी रन' पर होना चाहिए। - चुनौती: इस दौरान हृदय गति जल्दी बढ़ जाती है और आपको अधिक गर्मी महसूस हो सकती है। भारी वर्कआउट से बचें। - रणनीति: अगर आपकी रेस इस फेज में पड़ रही है, तो हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स पर दोगुना ध्यान दें।
प्रो टिप: ओव्यूलेशन के दौरान, शरीर में 'रिलैक्सिन' हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो जोड़ों को थोड़ा ढीला कर देता है। PubMed Central (NIH) के शोध के अनुसार, इस समय टखने या घुटने मुड़ने का खतरा अधिक होता है, इसलिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरतें।
प्रसिद्ध रनिंग गुरु Hal Higdon भी जोर देते हैं कि महिला धावकों को अपने ट्रेनिंग कैलेंडर में हार्मोनल शिफ्ट को जगह देनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: क्या मैं अपने पीरियड्स के दौरान सर्वश्रेष्ठ दौड़ लगा सकती हूँ?

यह एक ऐसा सवाल है जो हर गंभीर धावक के मन में आता है। जवाब है: बिल्कुल हाँ! इतिहास गवाह है कि कई मैराथन रिकॉर्ड्स मासिक धर्म के दौरान ही बनाए गए हैं। हालांकि, इसके लिए मानसिक और शारीरिक तैयारी की आवश्यकता होती है। पीरियड्स के दौरान दौड़ना जितना शारीरिक है, उतना ही मानसिक भी। पीएएमएस (PMS) के कारण होने वाली चिड़चिड़ाहट या थकान आपके आत्मविश्वास को कम कर सकती है। यहाँ आपकी ट्रेनिंग और अनुभव काम आता है। मैं हमेशा अपने एथलीटों से कहता हूँ कि अगर आप उस दिन दौड़ने के लिए बाहर निकल रही हैं जब आपका शरीर आपको सोफे पर लेटे रहने के लिए कह रहा है, तो आप मानसिक रूप से पहले ही मजबूत हो चुकी हैं।
पहाड़ों में ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ता हुआ धावक, जहाँ सावधानी और एकाग्रता की आवश्यकता होती है।
पहाड़ों में ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ता हुआ धावक, जहाँ सावधानी और एकाग्रता की आवश्यकता होती है।

सांख्यिकीय विश्लेषण: महिला धावकों की भागीदारी और पोषण

पिछले एक दशक में हमने महिला धावकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है। RunRepeat के आंकड़ों के अनुसार, मैराथन में महिलाओं की भागीदारी वैश्विक स्तर पर कुल धावकों का लगभग 45% तक पहुँच गई है। भारत में भी प्रमुख रेसों में महिलाओं का प्रतिशत हर साल 15-20% की दर से बढ़ रहा है। लेकिन इस बढ़ती भागीदारी के साथ आयरन की कमी एक 'साइलेंट बाधा' बनकर उभरी है।
तालिका 1: महिला धावकों में स्वास्थ्य और भागीदारी के आंकड़े (2025-2027 अनुमानित)
पैरामीटर वैश्विक औसत भारतीय धावक (अनुमानित)
मैराथन भागीदारी (महिलाएं) 45% 32%
आयरन की कमी (एनीमिया) का प्रसार 30-35% 50% +
साइकिल ट्रैकिंग ऐप्स का उपयोग 65% 40%

Source: RunRepeat & Runner's World. Last verified: 2027-06-03

Runner's World के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्त की कमी के कारण एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। आयरन की कमी का मतलब है मांसपेशियों तक ऑक्सीजन की कम आपूर्ति। यदि आप लगातार थकान महसूस कर रही हैं, तो यह केवल आपकी मेहनत का नतीजा नहीं, बल्कि आयरन की कमी का संकेत हो सकता है।

एक कोच की डायरी से: जब विज्ञान और संवेदना का मेल हुआ

दिल्ली की एक उमस भरी सुबह, जून का महीना था। मेरी एक ट्रेनी अपने 'स्पीड वर्क' के दौरान अचानक रुक गई। वह अपने निर्धारित 5:00 min/km के पेस को हिट नहीं कर पा रही थी। एक पुराने स्कूल के कोच की तरह, मेरा पहला विचार था उसे और जोर लगाने के लिए कहना। लेकिन फिर मुझे अपनी एक्सेल शीट्स याद आईं। हमने बैठकर बात की और मुझे पता चला कि वह अपने ल्यूटियल फेज के आखिरी दिनों में थी। उसके शरीर का तापमान बढ़ा हुआ था और दिल्ली की गर्मी ने उसकी स्थिति और खराब कर दी थी। मैंने उस दिन का वर्कआउट वहीं रुकवा दिया।
"यही वह क्षण था जब मैंने महसूस किया कि नंबर्स कभी भी पूरी कहानी नहीं बताते। अगले कुछ महीनों में, हमने उसके ट्रेनिंग प्लान को उसके चक्र के साथ सिंक किया। कठिन वर्कआउट को फॉलिक्युलर फेज में शिफ्ट किया और ल्यूटियल फेज में योग और हल्के जॉगिंग पर ध्यान दिया।"
नतीजा यह रहा कि अगली मैराथन में उसने न केवल अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकाला, बल्कि वह पूरी रेस के दौरान मानसिक रूप से भी बहुत शांत थी। आपका शरीर कोई दुश्मन नहीं है जिसे आपको 'जीतना' है। यह आपका सबसे बड़ा पार्टनर है। जब आप अपने हॉर्मोन्स के साथ तालमेल बिठाकर दौड़ना शुरू करते हैं, तो मैराथन ट्रेनिंग बोझ नहीं, बल्कि एक सुंदर यात्रा बन जाती है। अगले कई सालों की दौड़ के लिए अपने शरीर की सुनें, उसे समझें और फिर सड़कों पर उतरें। अभी भी एक सवाल जो मेरे दिमाग में घूमता है—क्या भविष्य में एआई (AI) आधारित ट्रेनिंग ऐप्स हमारी भावनाओं और हार्मोनल बदलावों को उतनी ही सूक्ष्मता से समझ पाएंगे जितना एक अनुभवी कोच देख लेता है? शायद, या शायद नहीं। तब तक, दौड़ते रहिए, लेकिन अपने शरीर की शर्तों पर।
मैराथन की फिनिश लाइन पार करती हुई एक मुस्कुराती हुई महिला धावक।
मैराथन की फिनिश लाइन पार करती हुई एक मुस्कुराती हुई महिला धावक।
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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