क्या महंगे जूतों के बिना मैराथन दौड़ना असंभव है?
पिछले कुछ वर्षों में रनिंग गियर की दुनिया पूरी तरह से बदल गई है। 2015 में जब मैंने मैराथन ट्रेनिंग की दुनिया में कदम रखा था, तब कार्बन-प्लेटेड जूतों की कोई खास चर्चा नहीं होती थी। इन 5 सालों में तकनीक इतनी हावी हो गई है कि नए धावकों को लगने लगा है कि रेस पूरी करने के लिए $250 खर्च करना अनिवार्य है। हाल ही में Nike Alphafly: रेस डे पर जादुई प्रदर्शन का सच पर शोध करते समय यह सवाल दोबारा सामने आया। क्या एक आम धावक बजट जूतों के साथ शुरुआत नहीं कर सकता? Runner's World के विशेषज्ञों के अनुसार पेगासस (Pegasus) या वेपरफ्लाई (Vaporfly) जैसे मॉडल्स की तुलना में nike revolution 7 एक एंट्री-लेवल विकल्प है। लंबी दूरी की दौड़ के लिए सस्ते जूतों को अक्सर संदेह की नजर से देखा जाता है। यह जूता 300 किलोमीटर की मार झेल पाएगा या नहीं, यह जानने के लिए इसे सड़क पर उतारना जरूरी था।
लोधी गार्डन की पगडंडियों पर शुरुआती टेस्टिंग
दिल्ली की धुंध भरी सुबह और लोधी गार्डन का ट्रैक किसी भी रनिंग गियर को परखने का बेहतरीन मैदान है। सुबह 5:30 बजे की शांति में पक्की ईंटों वाले रास्ते और डामर की सड़क पर कदमों की ताल एक अलग ही लय बनाती है। मशहूर कोच Hal Higdon हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि शुरुआती धावकों के 18-सप्ताह के मैराथन ट्रेनिंग ब्लॉक के लिए आरामदायक और टिकाऊ डेली ट्रेनर्स का होना सबसे आवश्यक है। ट्रेनिंग के शुरुआती हफ्तों में ऐसे जूतों की जरूरत होती है जो आपको रोज़ सुबह बिस्तर से उठाकर ट्रैक तक जाने के लिए प्रेरित करें। इन्हीं पगडंडियों पर शुरुआती हफ्तों का माइलेज कवर करते हुए यह देखना दिलचस्प रहा कि एक बजट जूता अलग-अलग सतहों पर कैसा बर्ताव करता है।आउटसोल की घिसावट: एक विस्तृत डेटा विश्लेषण
बजट श्रेणी के जूतों में सबसे पहले आउटसोल की रबर जवाब देती है। एक्सेल (Excel) स्प्रेडशीट में डेटा एनालिसिस के मेरे पुराने शौक ने यहाँ भी मेरा साथ दिया। जूते के हील, मिडफुट और फोरफुट (forefoot) एरिया को 10 अलग-अलग ग्रिड्स में बाँटकर हर 50 किलोमीटर के बाद रबर की मोटाई को मापा गया। RunRepeat के विस्तृत विनिर्देशों के अनुसार, इसका हील-टू-टो ड्रॉप (heel-to-toe drop) और हल्का वजन इसे अच्छा एंट्री-लेवल जूता बनाते हैं। लेकिन 300 किमी के बाद बाहरी एड़ी पर रबर लगभग 2.4 मिमी घिस चुकी थी।| माइलेज (किमी) | एड़ी की घिसावट (मिमी) | फोरफुट की घिसावट (मिमी) | ग्रिप का प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 100 | 0.5 | 0.2 | उत्कृष्ट |
| 200 | 1.4 | 0.6 | सामान्य |
| 300 | 2.4 | 1.1 | गीली सतह पर हल्की फिसलन |
ध्यान दें: घिसावट से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जूतों को रोटेट करना है। लगातार दौड़ने से फोम को वापस अपनी शेप में आने का समय नहीं मिल पाता।
कुशनिंग का विज्ञान और बायोमैकेनिक्स
हाई-माइलेज ट्रेनिंग के दौरान जूतों की कुशनिंग सीधा शरीर के निचले अंगों पर प्रभाव डालती है। यह सिर्फ आराम का मामला नहीं है, बल्कि चोट से बचाव का भी विज्ञान है। PubMed Central पर उपलब्ध वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि न्यूट्रल कुशनिंग वाले फुटवियर निचले अंगों के बायोमैकेनिक्स को गहराई से प्रभावित करते हैं। जब कोई धावक ओवरप्रोनेट (overpronate) करता है, तो असमान दबाव के कारण न्यूट्रल कुशनिंग वाले जूते का फोम जल्दी अपनी क्षमता खो देता है। शिन स्प्लिंट्स (shin splints) या घुटने की चोट का खतरा तब बढ़ जाता है जब जूतों का मिडसोल एक तरफ से ज्यादा दबने लगता है। जूतों को समतल मेज पर रखकर पीछे से देखने पर यह झुकाव साफ नजर आ जाता है।जब 'शोले' के गानों ने कुशनिंग का अहसास कराया
रविवार के 18 किलोमीटर वाले लॉन्ग रन के दौरान पुरानी हिंदी फिल्मों के गानों की रिदम अक्सर कदमों की ताल से मैच कर जाती है। किशोर कुमार का 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे...' बज रहा था और सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन 14वें किलोमीटर के आसपास अचानक सड़क पैरों के ज्यादा करीब महसूस होने लगी। हर कदम का प्रभाव सीधा एड़ियों तक पहुँच रहा था। शुरुआती 100 किलोमीटर तक जो फोम शॉक एब्जॉर्बर का काम कर रहा था, वह अब चपटा लगने लगा। लंबी दूरी की दौड़ में शरीर के वजन का दो से तीन गुना बल हर कदम पर पैरों पर पड़ता है। गानों की धुन भले ही शानदार थी, लेकिन nike revolution 7 की कुशनिंग की इस कमी ने लॉन्ग रन के लिए इसकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
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