लोधी गार्डन की वो सुबह और एड़ी का दर्द: क्या यह जूतों की गलती है?
मार्च की वह हल्की ठंडी सुबह, दिल्ली का लोधी गार्डन और रनर्स की वो जानी-पहचानी भीड़। सब कुछ हमेशा की तरह था। 2015 से मैराथन ट्रेनिंग कर रहा हूँ, तो यह रूटीन मेरी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन उस दिन वार्म-अप के बाद पहला किलोमीटर पूरा करते ही एड़ी में एक तीखा दर्द उठा। मानो किसी ने पैर के तलवे में कोई कील चुभा दी हो। मैं रुक गया। क्या यह मेरे running shoes की वजह से है?
32 साल की उम्र में अपनी फिटनेस को लेकर इंसान थोड़ा आश्वस्त हो जाता है। एक एडवांस्ड मैराथन रनर और सर्टिफाइड कोच होने के बावजूद, यह दर्द मेरे लिए एकदम नया था। हम धावक अक्सर हल्के-फुल्के दर्द को इग्नोर कर देते हैं, पर यह कुछ अलग था।

कुशनिंग का विज्ञान: घिसे हुए मिडसोल का सच
जूते बाहर से बिल्कुल नए और चमचमाते हुए दिख सकते हैं, लेकिन उनका असली काम अंदर के मिडसोल से होता है। रनिंग कम्युनिटी और Runner's World जैसी एथलेटिक पत्रिकाओं के डेटा के अनुसार, 500 से 800 किलोमीटर के बाद अधिकांश मिडसोल की शॉक एब्जॉर्ब करने की क्षमता खत्म हो जाती है।
जब कुशनिंग दब जाती है, तो दौड़ते समय शरीर का पूरा प्रभाव सीधे पैरों के तलवों पर पड़ता है। ऑनलाइन रनिंग फोरम्स पर कई धावकों का अनुभव यही बताता है कि ज्यादा माइलेज वाले घिसे हुए जूते एड़ी के दर्द का एक प्रमुख कारण हैं। एड़ी को सही सपोर्ट न मिलने पर पूरे पैर के ढांचे पर दबाव काफी बढ़ जाता है।
प्लांटर फैसीसाइटिस की बायोमैकेनिक्स
दौड़ते समय पैर पर शरीर के वजन का लगभग तीन गुना बल पड़ता है। अगर फुटवियर में सही आर्च सपोर्ट न हो, तो यह सारा तनाव प्लांटर फैशिया (पैर के तलवे का मोटा लिगामेंट) पर आता है। सुबह उठने पर एड़ी में तेज दर्द इसका सबसे क्लासिक लक्षण माना जाता है।
सही फिटिंग और सपोर्ट वाले फुटवियर कैसे इस तनाव को कम कर सकते हैं, इस पर चिकित्सा विज्ञान काफी स्पष्ट है। PubMed Central पर प्रकाशित मेडिकल रिसर्च के अनुसार, सही फुटवियर और ऑर्थोटिक्स प्लांटर फैशिया के स्ट्रेन को काफी हद तक कम कर सकते हैं। आर्च को स्थिर रखना और एड़ी को सुरक्षित करना इसके बचाव की पहली सीढ़ी है।

रनिंग शूज की तुलना: लैब टेस्ट्स क्या कहते हैं?
जूते चुनते समय आर्च सपोर्ट, हील ड्रॉप और मिडसोल स्टिफनेस पर ध्यान देना जरूरी है। प्लांटर फैसीसाइटिस से बचाव के लिए खास तौर पर asics gelkayano का नाम स्टेबिलिटी शूज की कैटेगरी में बार-बार आता है। आइए कुछ प्रमुख विकल्पों के डेटा पर नजर डालते हैं:
| जूते का ब्रांड/मॉडल | आर्च सपोर्ट | हील ड्रॉप (mm) | मिडसोल स्टिफनेस |
|---|---|---|---|
| ASICS Gel-Kayano 26 | उत्कृष्ट (फर्म) | 10 | हाई (स्टेबिलिटी) |
| Brooks Adrenaline GTS 20 | बहुत अच्छा | 12 | मीडियम-हाई |
| Hoka One One Clifton 6 | सामान्य | 5 | लो (सॉफ्ट) |
Source: RunRepeat. Last verified: 2020-03-12.
डेटा से स्पष्ट है कि ASICS और Brooks जैसे स्टेबिलिटी जूते अपनी फर्मनेस और हाई हील ड्रॉप के कारण एड़ी पर तनाव कम करते हैं, जबकि सॉफ्ट जूते कुशनिंग तो देते हैं पर जरूरी स्थिरता नहीं दे पाते।
अरावली ट्रेक और दर्द का असली एहसास
मुझे याद है, कुछ हफ्ते पहले मैं अरावली की पहाड़ियों में ट्रेकिंग के लिए गया था। इयरफोन्स में पुरानी हिंदी फिल्मों के गाने चल रहे थे और रास्ता काफी ऊबड़-खाबड़ था। अगले दिन जब मैंने बिस्तर से उठकर पहली बार जमीन पर पैर रखा, तो सच में जान निकल गई। मुझे लगा जैसे एड़ी की हड्डी में दरार आ गई हो।
मैं अपनी हर रन और ट्रेक का डेटा एक्सेल स्प्रेडशीट में ट्रैक करने का शौकीन हूँ। दर्द के बाद जब मैंने अपना लैपटॉप खोलकर चेक किया, तो मेरे ट्रेल शूज लगभग 700 किलोमीटर का सफर तय कर चुके थे। अरावली की असमान सतह और मेरे जूतों के कमज़ोर सपोर्ट ने मिलकर मेरे प्लांटर फैशिया को नुकसान पहुँचाया था।

गलतफहमी बनाम सच्चाई: क्या 'सुपर सॉफ्ट' जूते हमेशा अच्छे होते हैं?
जब एड़ी में दर्द होता है, तो सबसे पहली प्रतिक्रिया मेमोरी फोम वाले, बेहद मुलायम जूते खरीदने की होती है। सुनने में यह सही लगता है, लेकिन APMA (American Podiatric Medical Association) की गाइडलाइन्स बताती हैं कि बहुत अधिक कुशनिंग से पैर अनस्टेबल हो जाता है।
जब फैशिया सूजा हुआ होता है, तो उसे स्थिरता (स्टेबिलिटी) चाहिए होती है। एक फर्म बेस हील को अपनी जगह पर लॉक रखता है, जिससे लिगामेंट पर अतिरिक्त खिंचाव नहीं पड़ता। अत्यधिक मुलायम जूते इस खिंचाव को बढ़ा सकते हैं।
रिकवरी और ट्रेनिंग एडजस्टमेंट
इंजरी के दौरान अपना ईगो साइड में रखना ही एक धावक की सबसे बड़ी जीत है। मैंने अपनी मैराथन ट्रेनिंग को तुरंत रोक दिया। Hal Higdon की इंजरी प्रिवेंशन और रिकवरी गाइडलाइन्स के अनुसार, मैंने अपना रनिंग माइलेज 50% से भी ज्यादा कम कर दिया और फिटनेस बनाए रखने के लिए साइकिलिंग जैसी लो-इम्पैक्ट क्रॉस-ट्रेनिंग शुरू की।
कुछ हफ्तों की स्ट्रेचिंग, बर्फ की सिकाई और सही स्टेबिलिटी शूज अपनाने के बाद, अब सुबह का वह भयानक दर्द एक हल्की सी जकड़न में बदल गया है। सही गियर चुनना और समय पर अपनी ट्रेनिंग को एडजस्ट करना एक लंबा और सुरक्षित रनिंग करियर सुनिश्चित करता है।
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