क्या संगीत आपको असल में धीमा कर रहा है?
आंकड़े झूठ नहीं बोलते। हम में से ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि कानों में तेज़ संगीत बजने से हम तेज़ दौड़ते हैं। लेकिन सीधे RunRepeat के सर्वेक्षण और डेटा पर नज़र डालें, तो सच्चाई कुछ और ही नज़र आती है। डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि बिना हेडफ़ोन के दौड़ने वाले धावक अपने आस-पास के वातावरण के प्रति अधिक जागरूक होते हैं, उनकी फॉर्म बेहतर होती है और उन्हें चोट (injuries) लगने का जोखिम काफी कम होता है। पिछले 11 सालों में—हाँ, 2015 से ही मैं इन सड़कों की खाक छान रहा हूँ—मैंने दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर अनगिनत धावकों को देखा है। सुबह की धुंध हो या वीकेंड का लंबा रन, लोग कानों में बड़े-बड़े हेडफ़ोन लगाए दुनिया से बेखबर दौड़ रहे होते हैं। वे इतने खोए रहते हैं कि उन्हें न तो पीछे से आते भारी ट्रैफिक का पता चलता है, न ही किसी साथी धावक की चेतावनी सुनाई देती है। सबसे बुरी बात यह है कि उन्हें अपने ही भारी और गलत पड़ते कदमों (overstriding) की आवाज़ नहीं आती। एक वेटरन रनर के तौर पर यह देखकर मुझे काफी झुंझलाहट होती है। आप अपने शरीर को नुकसान पहुँचा रहे हैं और आपको पता भी नहीं चल रहा है क्योंकि आपके कानों में डीजे बज रहा है।
फोकस और सुरक्षा का मैट्रिक्स
जब बात भारत की भीड़भाड़ वाली सड़कों की आती है, तो यह केवल परफॉरमेंस का मुद्दा नहीं रह जाता। Athletics Federation of India (AFI) के नियमों और सड़क सुरक्षा गाइडलाइन्स में भी यह स्पष्ट किया गया है कि सड़क पर अभ्यास करते समय इयरफ़ोन का उपयोग नहीं करना चाहिए। ट्रैफिक के बीच आपको हॉर्न या एम्बुलेंस के सायरन की आवाज़ सुनना अनिवार्य है। मैंने नीचे एक स्पष्ट तुलना तैयार की है जो दर्शाती है कि संगीत के साथ दौड़ना और 'माइंडफुल रनिंग' में क्या बुनियादी अंतर है:| पैरामीटर | संगीत के साथ दौड़ना 🎧 | माइंडफुल रनिंग (बिना संगीत) 🧘♂️ |
|---|---|---|
| पेसिंग (Pacing) | गाने की बीट (BPM) पर निर्भर। तेज़ गाने पर अनजाने में तेज़ भागना। | शरीर की प्राकृतिक लय और श्वास के आधार पर स्थिर पेस। |
| शारीरिक जागरूकता | बेहद कम। पैरों के ज़मीन पर पड़ने की आवाज़ (footstrike) सुनाई नहीं देती। | उच्च। आप महसूस करते हैं कि पैर भारी पड़ रहे हैं या घुटनों पर दबाव है। |
| सुरक्षा | खतरनाक। पीछे से आते वाहन का पता नहीं चलता। | सुरक्षित। आस-पास के ट्रैफ़िक का पूरा अंदाज़ा रहता है। |
| मानसिक स्थिति | ध्यान बंटा हुआ (Dissociative)। | ध्यान केंद्रित (Associative)। |
Source: Compiled from running safety guidelines. Last verified: 2026-08-04
पेसिंग की समस्या और 'नैचुरल पेस' का समाधान
मुझे यह देखकर अक्सर गुस्सा आता है जब नए धावक मेरे पास आते हैं और कहते हैं, "सर, मैंने स्पॉटिफाई पर 160 BPM की एक शानदार प्लेलिस्ट बनाई है, अब मैं मैराथन फोड़ दूंगा!" गाने की बीट पर दौड़ने की कोशिश करना आपके पूरे marathon training plan को पटरी से उतार सकता है। जब आप ताज़ा होते हैं और कोई हाई-एनर्जी गाना बजता है, तो आप अपनी तय गति से कहीं ज़्यादा तेज़ दौड़ने लगते हैं। आप शुरुआती किलोमीटर में ही अपना ग्लाइकोजन जला देते हैं। महान कोच Hal Higdon हमेशा कहते हैं कि एक सफल लंबी दौड़ के लिए अपनी 'नैचुरल पेस' (प्राकृतिक गति) को खोजना सबसे ज़रूरी है। बिना संगीत के दौड़ने से आप अपनी साँसों की लय को अपनी गति के साथ सिंक करना सीखते हैं। अपने ट्रेनिंग प्लान में कम से कम लंबे संडे रन (Long Sunday Runs) को पूरी तरह से गैजेट-फ्री कर दें।
भ्रांति: 'संगीत थकान कम करता है'
अपनी कोचिंग के शुरुआती दिनों में, मैं खुद लोगों को एक्सेल स्प्रेडशीट में डेटा एनालिसिस करके बताता था कि किस किलोमीटर पर कौन सा गाना बजना चाहिए। आज मुझे एहसास होता है कि वह गलत अप्रोच थी। PubMed Central पर प्रकाशित शोधों को गहराई से पढ़ने पर पता चलता है कि संगीत असल में आपकी थकान को 'कम' नहीं करता, बल्कि यह केवल थकान के सिग्नल्स को दिमाग तक पहुँचने से ब्लॉक करता है।
Perceived Exertion का विज्ञान (RPE):
एलीट एथलीट 'associative strategy' का उपयोग करते हैं। जब आप बिना संगीत के दौड़ते हैं, तो आपका दिमाग आपके क्वाड्स में जमा हो रहे लैक्टिक एसिड और हृदय गति का लगातार डेटा प्रोसेस करता है। इस रियल-टाइम फीडबैक लूप से आप अपना 'Perceived Exertion' (थकान का एहसास) सटीक रूप से माप पाते हैं। अगर कानों में तेज़ संगीत है, तो कॉग्निटिव लोड बढ़ जाता है और दिमाग इन सूक्ष्म सिग्नल्स को इग्नोर करने लगता है, जिससे आपकी रनिंग इकॉनमी गिर सकती है।
एलीट एथलीट 'associative strategy' का उपयोग करते हैं। जब आप बिना संगीत के दौड़ते हैं, तो आपका दिमाग आपके क्वाड्स में जमा हो रहे लैक्टिक एसिड और हृदय गति का लगातार डेटा प्रोसेस करता है। इस रियल-टाइम फीडबैक लूप से आप अपना 'Perceived Exertion' (थकान का एहसास) सटीक रूप से माप पाते हैं। अगर कानों में तेज़ संगीत है, तो कॉग्निटिव लोड बढ़ जाता है और दिमाग इन सूक्ष्म सिग्नल्स को इग्नोर करने लगता है, जिससे आपकी रनिंग इकॉनमी गिर सकती है।
असली आवाज़ सुनना
लगभग 38 की उम्र के पड़ाव पर आकर जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मुझे अपना वह दिन अच्छी तरह याद है जब मुझे 'माइंडफुल रनिंग' का असली मतलब समझ आया था। मेरी पुरानी हिंदी फिल्मों के गानों की प्लेलिस्ट चल रही थी कि अचानक इयरफ़ोन की बैटरी डेड हो गई। मुझे लगा कि यह रन बोरिंग होने वाला है। लेकिन जैसे-जैसे किलोमीटर बीतते गए, मैंने पहली बार अपनी साँसों की असली लय को सुना। हवा की आवाज़ और जूतों की सड़क से टकराने की वह 'टैप-टैप' की आवाज़... वह अनुभव अद्भुत था।Tip: अगर एकदम से संगीत छोड़ना मुश्किल लगता है, तो पॉडकास्ट से शुरुआत करें। इनमें बीट नहीं होती, इसलिए आपकी पेसिंग खराब नहीं होती। धीरे-धीरे इन्हें भी छोड़ दें।
अगर आप सच में एक गंभीर धावक बनना चाहते हैं, तो World Athletics के नियमों को देखें। कई एलीट इवेंट्स में धावकों के लिए इयरफ़ोन का उपयोग पूरी तरह वर्जित (banned) है। प्रो धावक जानते हैं कि रेस वाले दिन उन्हें अपने शरीर और दिमाग के दम पर दौड़ना है। अपने marathon training plan को प्रभावी बनाने के लिए साहस जुटाएं, इयरफ़ोन घर पर छोड़ दें, और अपने शरीर की असली आवाज़ सुनें।
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