अपने रनिंग

लोधी गार्डन की सुबह और महंगे जूतों का भ्रम

सितंबर 2025 की एक हल्की ठंडी सुबह। दिल्ली के लोधी गार्डन में सुबह 5:30 बजे का नज़ारा हमेशा की तरह ऊर्जा से भरा होता है। पेड़ों के बीच से छनकर आती रोशनी और पसीने में सराबोर धावक। ध्यान से देखने पर आप पाएंगे कि कई धावक 20 हजार से भी अधिक कीमत वाले अत्याधुनिक running shoes पहने हुए हैं। हर तरफ महंगे कार्बन प्लेटेड जूतों की होड़ मची है ताकि अपनी पर्सनल बेस्ट (PB) में सुधार किया जा सके। महंगे जूते आपको छालों और दर्द से पूरी तरह नहीं बचा सकते। शानदार कुशनिंग वाले जूते पहनने के बावजूद कई धावक रेस के बाद लंगड़ाते हुए चलते हैं। World Athletics के मानकों के अनुसार, 42.195 किलोमीटर की आधिकारिक मैराथन दूरी के दौरान एक धावक के पैर औसतन 35,000 से 40,000 बार जमीन से टकराते हैं। यह निरंतर दबाव पैरों पर भारी बायोमैकेनिकल स्ट्रेस डालता है। अगर आपके जूते के फीते सही तरीके से नहीं बंधे हैं, तो दुनिया के सबसे बेहतरीन जूते भी आपको भयानक छाले (blisters) दे सकते हैं। यहीं पर काम आता है जूतों का वह 'आखिरी छेद' जिसे अक्सर डिजाइन का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
A vibrant marathon scene unfolds with
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साधारण लेसिंग बनाम हील लॉक (रनर लूप) तकनीक

जूते के ऊपरी हिस्से में, टखने (ankle) के पास एक अतिरिक्त छेद होता है जो थोड़ा पीछे की ओर हटा हुआ होता है। इसका असली काम 'हील लॉक' (Heel Lock) या 'रनर लूप' बनाना है। नीचे दिए गए डेटा से स्पष्ट होता है कि यह छोटी सी तकनीक कितना बड़ा बदलाव ला सकती है:
विशेषता साधारण लेसिंग हील लॉक (रनर लूप)
एड़ी की स्थिरता (Heel Stability) एड़ी जूते के अंदर ऊपर-नीचे फिसल सकती है। एड़ी पूरी तरह से लॉक हो जाती है, फिसलन लगभग शून्य।
पैर की उंगलियों के लिए जगह (Toe Room) पैर आगे खिसकने से उंगलियां जूते के अगले हिस्से से टकराती हैं। पैर अपनी जगह स्थिर रहता है, जिससे उंगलियों को फैलने की जगह मिलती है।
छालों का जोखिम बहुत अधिक (विशेषकर 15 किमी के बाद)। न्यूनतम (घर्षण काफी कम हो जाता है)।
पेसिंग पर प्रभाव दर्द के कारण पेस गिर सकती है। आरामदायक होने से पेस बरकरार रखने में मदद मिलती है।

Source: RunRepeat. Last verified: 2025-09-20

रनरिपीट के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, रेस के अंतिम 10 किलोमीटर में मैराथन फिनिश टाइम और पेसिंग में गिरावट का एक बड़ा कारण पैरों में होने वाली असुविधा और दर्द है। हील लॉक का इस्तेमाल करने पर ऊर्जा पैर को स्थिर करने के बजाय सिर्फ आगे बढ़ने में लगती है।

काले नाखून: जूते का आकार या पैरों का खिसकना?

"मेरे पैरों के नाखून काले हो गए हैं, शायद मुझे एक साइज बड़े जूते लेने चाहिए थे।" यह एक बेहद आम गलतफहमी है। काले नाखून (Black toenails) होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपके जूते छोटे हैं। ज्यादातर मामलों में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ढीली एड़ी के कारण पैर हर कदम के साथ जूते के अंदर आगे की तरफ खिसकता है (sliding forward)। ढलान (downhill) पर दौड़ते समय मोमेंटम आपके पैर को जूते के अगले हिस्से (toe box) में धकेलता है। अगर एड़ी लॉक नहीं है, तो सबसे लंबी उंगली बार-बार जूते के आगे वाले हिस्से से टकराती है। इसी लगातार टकराव से नाखून के नीचे खून जमा हो जाता है, जिसे 'सबंगुअल हेमेटोमा' (Subungual hematoma) कहते हैं। Runner's World के मशहूर '10 प्रतिशत नियम' (माइलेज बढ़ाने का सुरक्षित तरीका) को अपनाते हुए जब साप्ताहिक दूरी बढ़ाई जाती है, तो पैरों की सुरक्षा सर्वोपरि हो जाती है। 5 या 10 किलोमीटर की दौड़ में जो पैर का खिसकना महसूस भी नहीं होता, वही 30 किलोमीटर की लॉन्ग रन में नाखूनों को काला करने के लिए काफी होता है।
A laptop displaying running data
A laptop displaying running data

आखिरी छेद (Extra Eyelet) का सही उपयोग

Hal Higdon के प्रसिद्ध 18-सप्ताह के बिगिनर मैराथन ट्रेनिंग प्लान में फुटकेयर को अत्यधिक महत्व दिया गया है। जब हफ्तों तक हर वीकेंड लंबी दूरी तय करनी हो, तो यह लेसिंग तकनीक पैरों को सुरक्षित रखती है। जूतों के आखिरी अतिरिक्त छेद का उपयोग करके हील लॉक बनाने का तरीका बेहद सीधा है:
  1. आखिरी अतिरिक्त छेद को पहचानें: अपने running shoes पहनें और सामान्य तरीके से फीते बांधते हुए सबसे ऊपर तक आएं, लेकिन आखिरी छेद (जो थोड़ा पीछे टखने की तरफ होता है) को खाली छोड़ दें।
  2. लूप (Loop) बनाना: बाएं फीते को लें और उसे बाहर से अंदर की तरफ (outside to inside) उसी तरफ के आखिरी छेद में डालें। इसे पूरा न खींचें, एक छोटा सा लूप छोड़ दें। दाहिने फीते के साथ दाहिनी तरफ यही दोहराएं।
  3. क्रॉस लेसिंग: बाएं फीते के सिरे को दाहिनी तरफ बने लूप के अंदर से गुजारें। इसी तरह दाहिने फीते के सिरे को बाएं लूप के अंदर से गुजारें।
  4. हील लॉक करना: दोनों फीतों को ऊपर की ओर खींचने के बजाय, नीचे और पीछे की ओर (downwards and backwards) खींचें। इससे लूप कस जाएंगे और फीते आपके टखने को मजबूती से पकड़ लेंगे।
  5. अंतिम गांठ: अंत में सामान्य गांठ (bow knot) बांध लें।
ध्यान दें: इस तकनीक को बहुत ज्यादा कसने से पैर के ऊपरी हिस्से (instep) की नसों पर दबाव पड़ सकता है (Extensor Tendonitis)। दौड़ते समय पैर के ऊपरी हिस्से में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो, तो तुरंत रुकें और लूप को थोड़ा ढीला करें। सही कसाव वह है जहां एड़ी न हिले, लेकिन रक्त संचार सुचारू रहे।

पैरों पर पड़ने वाले दबाव का विज्ञान

PubMed Central में प्रकाशित शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि लंबी दूरी की दौड़ के दौरान पैरों पर अत्यधिक बायोमैकेनिकल स्ट्रेस पड़ता है। जैसे-जैसे रेस आगे बढ़ती है और शरीर में हाइड्रेशन की कमी होने लगती है, त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में थोड़ा सा भी घर्षण (friction) त्वचा को फाड़कर छाले बना सकता है। हील लॉक तकनीक इस घर्षण को जड़ से खत्म कर देती है। यह पैर और जूते को एक इकाई (single unit) में बदल देती है। पैर जूते के अंदर फिसलता ही नहीं, जिससे छाले बनने का वैज्ञानिक कारण ही समाप्त हो जाता है।
मैराथन दौड़ने के बाद पैरों की देखभाल
मैराथन दौड़ने के बाद पैरों की देखभाल

2017 दिल्ली मैराथन का वह दर्दनाक सबक

मुझे आज भी 2017 की वह दिल्ली मैराथन याद है। 2015 से मैराथन ट्रेनिंग में कदम रखने के बाद, उस समय मुझे लगता था कि मैं रनिंग के बारे में काफी कुछ सीख चुका हूं। मैंने रेस के लिए एकदम नए जूते खरीदे थे। 25 किलोमीटर तक पेस बहुत शानदार चल रही थी, लेकिन उसके बाद बाएं पैर की एड़ी और अंगूठे में तेज जलन महसूस होने लगी। मैंने उस दिन दो लेयर वाले भारी मोज़े पहने थे, यह सोचकर कि मोटे मोज़े छालों से बचाएंगे। 30 किलोमीटर आते-आते दर्द इतना असहनीय हो गया कि दौड़ना छोड़कर पैदल चलना पड़ा। रेस खत्म होने के बाद जब मैंने जूते उतारे, तो एड़ी की खाल पूरी तरह से छिल चुकी थी। मोटे मोज़े पसीने को सोखकर पैरों को और ज्यादा गीला कर देते हैं, जिससे त्वचा नरम पड़ जाती है और छालों का खतरा बढ़ जाता है। असली समाधान मोज़ों की मोटाई में नहीं, बल्कि जूते की फिटिंग और हील लॉक में था। Athletics Federation of India के घरेलू रेस कैलेंडर के अनुसार भारत में अक्टूबर से फरवरी तक मैराथन का पीक सीजन होता है। शुरुआत में ही गलत लेसिंग के कारण चोटिल होने से पूरा सीजन खराब हो सकता है।

रनिंग कम्युनिटी और जूतों की लाइफ

दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की रनिंग कम्युनिटीज़ में हील लॉक तकनीक को लेकर काफी सकारात्मक अनुभव देखे गए हैं। स्ट्रावा (Strava) के कई फोरम्स पर धावक बताते हैं कि रनर लूप ट्राई करने के बाद वे बिना किसी नाखून को नुकसान पहुंचाए लंबी दूरी तय कर पा रहे हैं। डेटा को ट्रैक करने के अपने शौक के चलते, जब मैं अपनी एक्सेल स्प्रेडशीट में विभिन्न जूतों के माइलेज का एनालिसिस करता हूं, तो स्पष्ट दिखता है कि जिन जूतों में मैंने नियमित रूप से हील लॉक का इस्तेमाल किया, उनका अंदरूनी फैब्रिक (heel collar) ज्यादा लंबे समय तक सुरक्षित रहा। अगली बार जब आप दौड़ने निकलें, तो पुरानी हिंदी फिल्मों के किसी सदाबहार गाने को प्ले करें, अपने जूतों के आखिरी छेद का उपयोग करके हील लॉक बांधें, और बिना किसी दर्द के अपनी दौड़ का आनंद लें।
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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