दौड़ने का सही समय और बेस्ट Running Shoes कैसे चुनें?

क्या सुबह दौड़ना ही एकमात्र सही तरीका है? (एक आम गलतफहमी)

रनिंग की दुनिया में कदम रखते ही सबसे पहली सलाह जो मिलती है, वह है: "असली धावक वही है जो सुबह 4 बजे उठकर सड़क पर पसीना बहाता है!" साल 2015 में जब मैंने दौड़ना शुरू किया था, तब मैं भी इसी गलतफहमी का शिकार था। दिल्ली-एनसीआर की कड़कड़ाती सर्दियों में खुद को बिस्तर से खींच कर निकालना और नींद में ही जॉगिंग करने की कोशिश करना मेरे शुरुआती दिनों का रूटीन बन गया था। मुझे लगता था कि सूर्योदय से पहले न उठने पर मेरी दौड़ने की कोई अहमियत ही नहीं है। क्या वास्तव में एक अच्छा रनर बनने के लिए नींद की कुर्बानी देना जरूरी है?

विज्ञान हमें एक बिल्कुल अलग कहानी बताता है। PubMed Central / NIH पर उपलब्ध सर्कैडियन रिदम (Circadian rhythms) और एथलेटिक परफॉरमेंस के अध्ययनों के अनुसार, हर इंसान की 'बॉडी क्लॉक' अलग होती है। सुबह दौड़ने से आपके शरीर में एंडोर्फिन (endorphins) का स्तर बढ़ता है जो आपको दिन भर तरोताजा रखता है। वहीं, शाम के समय शरीर का मुख्य तापमान (core body temperature) अपने चरम पर होता है, जिससे मांसपेशियां अधिक लचीली होती हैं और बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

"2015 में अपनी पहली 5K रन की तैयारी के दौरान, मैं हमेशा समय को लेकर परेशान रहता था। पिछले 5 सालों के अनुभव और एक कोच के नजरिए से अब मैं समझता हूँ कि सही समय वह नहीं है जो दुनिया कहती है, बल्कि वह है जिसे आपका शरीर आसानी से स्वीकार कर ले।"

सुबह 4 बजे का मिथक शायद इसलिए लोकप्रिय है क्योंकि उस वक्त सड़कें खाली होती हैं। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की सुबह प्रदूषण का जो स्तर होता है, उसे देखते हुए यह नियम हमेशा सही नहीं बैठता। आप किस समय दौड़ते हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप कितनी निरंतरता के साथ ट्रेनिंग करते हैं।

अपने पहले रनिंग शूज कैसे खरीदें: सीधा और स्पष्ट तरीका

जूतों की दुकान में दर्जनों ब्रांड्स और सैकड़ों मॉडल्स देखकर किसी भी नए धावक का घबराना स्वाभाविक है। मुझे याद है अपना पहला जूता खरीदते वक्त मैंने सिर्फ रंग और डिज़ाइन देखा था—जो एक बहुत बड़ी गलती साबित हुई। आइए उन तीन सुनहरे नियमों पर बात करते हैं जिन्हें जूते खरीदते समय हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।

गियर के बारे में प्रामाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट Runner's World के अनुसार, एक अच्छा जूता केवल एक एक्सेसरी नहीं, बल्कि आपका सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है।

  1. शाम के समय ही खरीदारी करें: दिन भर चलने-फिरने से शाम तक पैर थोड़े सूज जाते हैं और उनका आकार बढ़ जाता है। दौड़ते समय भी पैरों के साथ ऐसा ही होता है। इसलिए, शाम को खरीदे गए जूते दौड़ते समय कभी टाइट महसूस नहीं होंगे।
  2. पैर का आकार (Pronation) समझें: जब आपका पैर जमीन पर पड़ता है, तो वह किस तरफ झुकता है, इसे प्रोनेसन कहते हैं। यदि पैर अंदर की तरफ ज्यादा झुकता है (Overpronation), तो 'स्टेबिलिटी (Stability)' शूज की जरूरत होती है। यदि सीधा रहता है, तो 'न्यूट्रल (Neutral)' शूज चुनें।
  3. टो-बॉक्स (Toe Box) में पर्याप्त जगह: जूता पहनकर खड़े होने पर सबसे लंबे अंगूठे/उंगली और जूते के आगे के हिस्से के बीच लगभग एक अंगूठे (thumb) जितनी जगह होनी चाहिए।
Tip: कभी भी अपने कैजुअल जूतों के साइज के आधार पर रनिंग शूज न खरीदें। ये हमेशा आपके सामान्य साइज से आधा या एक साइज बड़े होने चाहिए ताकि दौड़ते समय नाखूनों पर दबाव न पड़े।

सुबह की दौड़ बनाम शाम की दौड़: एक त्वरित तुलना

यह तय करना कि किस समय दौड़ना है, अक्सर नए धावकों के लिए सबसे बड़ी पहेली होती है। क्या मेटाबॉलिज्म बढ़ाना ज्यादा जरूरी है या दिन भर का तनाव कम करना? प्रसिद्ध कोच Hal Higdon के ट्रेनिंग सिद्धांतों के आधार पर नीचे दोनों समय का एक सीधा तुलनात्मक विश्लेषण दिया गया है।

तुलना का आधार सुबह की दौड़ (Morning Run) शाम की दौड़ (Evening Run)
शारीरिक तापमान न्यूनतम होता है; वार्म-अप में अधिक समय लगता है। चरम पर होता है; मांसपेशियां पहले से लचीली होती हैं।
मेटाबॉलिज्म पर प्रभाव पूरे दिन के लिए मेटाबॉलिज्म को किकस्टार्ट कर देता है। दिन भर के कैलोरी बर्न को शाम के समय और बढ़ा देता है।
तनाव (Stress) आने वाले दिन के लिए मानसिक रूप से तैयार करता है। दिन भर के काम के तनाव और मानसिक थकान को दूर करता है।
नींद (Sleep) रात में बेहतर और गहरी नींद लाने में मदद करता है। दौड़ने के तुरंत बाद शरीर का तापमान बढ़ने से नींद आने में कठिनाई हो सकती है।

Source: Hal Higdon Marathon Training Guides. Last verified: 2020-12-20

इस मैट्रिक्स से स्पष्ट है कि कोई भी समय गलत नहीं है। प्राथमिकता वजन कम करने की है, तो सुबह का समय चुनें। गति (speed) और प्रदर्शन पर काम करना है, तो शाम का समय बेहतर हो सकता है क्योंकि तब शरीर शारीरिक रूप से अपने सर्वोत्तम स्तर पर होता है।

शाम के समय पक्की सड़क पर जूते का क्लोज-अप
शाम के समय पक्की सड़क पर जूते का क्लोज-अप

जूतों के गलत चुनाव से होने वाली समस्याएं

चोट (Injury) हर धावक का सबसे बड़ा डर होती है। दौड़ने के दौरान होने वाले 70% से अधिक दर्द और चोटों का सीधा संबंध आपके पैरों और जूतों के बीच के तालमेल से होता है। कई नए धावक घुटनों के दर्द की शिकायत लेकर आते हैं, और अक्सर समस्या उनके फुटवियर में ही छिपी होती है।

अगर दौड़ने के बाद पिंडली की हड्डी (shin bone) में तेज दर्द होता है (शिन स्प्लिंट्स), या घुटनों के बाहरी हिस्से में चुभन महसूस होती है, तो इसका मतलब है कि जूते जमीन से पड़ने वाले झटके (impact) को सही से सोख नहीं पा रहे हैं। गलत जूते पहनने से सिर्फ छाले (blisters) ही नहीं होते, बल्कि प्लांटर फैसीसाइटिस (Planter fasciitis) जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।

जूते का "हील-टू-टो ड्रॉप (Heel-to-toe drop)"—यानी एड़ी और पंजे की मोटाई के बीच का अंतर—आपके दौड़ने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। RunRepeat के डेटा के अनुसार, यदि आप अपनी एड़ी के बल (heel striker) दौड़ते हैं, तो 8mm से 12mm ड्रॉप वाले कुशन शूज की जरूरत होती है। मिडफुट (midfoot) स्ट्राइकर के लिए 4mm से 6mm ड्रॉप बेहतर काम करता है। यह कुछ मिलीमीटर का अंतर भी आपके रनिंग फॉर्म को प्रभावित करता है।

समाधान: सही आर्च सपोर्ट पहचानें

इस समस्या का सबसे आसान घरेलू समाधान "वेट फुटप्रिंट टेस्ट (Wet Footprint Test)" है:

  • अपने पैरों को पानी में हल्का गीला करें।
  • एक सूखे भूरे कागज (brown paper) या कार्डबोर्ड पर खड़े हो जाएं।
  • अपने पैरों के निशान को ध्यान से देखें।

यदि पैर का पूरा बीच का हिस्सा (आर्च) छपा हुआ दिखता है, तो आपके फ्लैट फीट हैं (मोशन कंट्रोल या स्टेबिलिटी शूज चाहिए)। यदि बीच का हिस्सा बिल्कुल नहीं छपा है, तो आर्च हाई है (न्यूट्रल कुशनिंग शूज चाहिए)।

भारतीय धावकों का अनुभव: कम्युनिटी क्या कहती है?

किताबें और विदेशी वेबसाइट्स पढ़ना एक बात है, लेकिन भारत की चिलचिलाती गर्मी और भारी मानसून के बीच दौड़ना बिल्कुल अलग अनुभव है। स्थानीय रनिंग क्लब्स और ऑनलाइन फोरम में अक्सर मौसम के हिसाब से रनिंग रूटीन पर चर्चा होती है।

गर्मियों के दौरान (जो भारत में साल के कई महीने रहती है), सुबह 5:30 बजे के बाद दौड़ना काफी मुश्किल हो जाता है। पसीने से तर-बतर कपड़े और उमस आपके हार्ट रेट को आसमान पर पहुंचा देती है। Athletics Federation of India (AFI) भी एथलीट्स को अत्यधिक गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए सुबह जल्दी या देर शाम ट्रेनिंग करने की सलाह देता है।

कम्युनिटी के अनुभवों से पता चलता है कि मई और जून के महीनों में कई लोग अपनी लॉन्ग रन (Long Run) रात 8 बजे के बाद करना पसंद करते हैं। उमस में दौड़ने से चक्कर आने की समस्या अक्सर नाइट रनिंग से दूर हो जाती है। इसके विपरीत, सर्दियों में (विशेषकर नवंबर-दिसंबर), जब स्मॉग का स्तर खतरनाक होता है, तो कई धावक दोपहर की धूप में दौड़ना सुरक्षित मानते हैं। स्थानीय मौसम के अनुसार अपने ट्रेनिंग प्लान में बदलाव करना ही सबसे बड़ी समझदारी है।

Athletes in colorful running spikes
Athletes in colorful running spikes

आंकड़े क्या कहते हैं: दुनिया भर में दौड़ने का समय

व्यक्तिगत अनुभवों से हटकर अब शुद्ध डेटा पर नजर डालते हैं। स्ट्रावा (Strava) जैसी ट्रैकिंग ऐप्स हमें वैश्विक रुझानों को समझने में मदद करती हैं। Strava Data 2020 के अनुसार, दौड़ने के समय में सप्ताह के दिनों (weekdays) और वीकेंड के बीच एक स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

  • वीक डेज (सोमवार से शुक्रवार): 53% से अधिक धावक सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच दौड़ना पसंद करते हैं, ताकि वे काम पर जाने से पहले वर्कआउट खत्म कर सकें। शाम 5 बजे से 7 बजे का समय दूसरा सबसे लोकप्रिय समय है।
  • वीकेंड (शनिवार और रविवार): सप्ताहांत पर यह ट्रेंड बदल जाता है। शनिवार और रविवार को दौड़ने का सबसे लोकप्रिय समय सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच होता है। लोग थोड़ा ज्यादा सोकर आराम से दौड़ना पसंद करते हैं।

डेटा यह भी दिखाता है कि सुबह दौड़ने वाले धावक अधिक निरंतर (consistent) होते हैं। शाम तक काम का तनाव, थकान या पारिवारिक जिम्मेदारियां अक्सर शेड्यूल बिगाड़ देती हैं, इसलिए सुबह का प्लान ज्यादा सफल रहता है।

क्या महंगे जूते आपको तेज दौड़ने में मदद करेंगे?

नए धावकों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या 15,000 रुपये वाले कार्बन-प्लेटेड शूज खरीदने से मैराथन आसानी से पूरी हो जाएगी? एलीट एथलीट्स को महंगे जूतों में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

लगातार हो रहे लैब टेस्ट्स बताते हैं कि महंगे जूते, विशेष रूप से जिनमें मोटा फोम और कार्बन फाइबर प्लेट्स होती हैं, निश्चित रूप से आपको 2% से 4% तक 'एनर्जी रिटर्न' (energy return) दे सकते हैं। वे पैरों की थकान को कम करते हैं और रिकवरी तेज करते हैं। लेकिन कोई भी जूता आपकी ट्रेनिंग की कमी को पूरा नहीं कर सकता।

अगर पैरों की मांसपेशियां मजबूत नहीं हैं, पर्याप्त माइलेज कवर नहीं किया है, और रनिंग फॉर्म गलत है, तो महंगे जूते भी शिन स्प्लिंट्स और दर्द ही देंगे। कुछ रिसर्च का तो यह भी मानना है कि अत्यधिक कुशनिंग वाले जूते पैरों की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को कमजोर कर सकते हैं, क्योंकि वे पैरों की छोटी मांसपेशियों को पूरी तरह काम नहीं करने देते।

एक शुरुआती धावक के रूप में, 3000 से 6000 रुपये के बीच का एक अच्छी क्वालिटी का न्यूट्रल या स्टेबिलिटी जूता चुनना बेहतर है। महंगे रेसिंग गियर की चिंता तब करें जब आप एक निर्धारित समय (Time Target) के साथ हाफ या फुल मैराथन दौड़ने लगें।

चाहे आप सुबह 5 बजे दौड़ें या रात 9 बजे, चाहे आपके जूतों की कीमत कम हो या ज्यादा—सबसे जरूरी बात है घर से बाहर निकलना और दौड़ना। अपने शरीर की सुनें, सही गियर चुनें और बस एक कदम आगे बढ़ाते रहें। हैप्पी रनिंग!

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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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