रनिंग इंजरी: दर्द को सामान्य मान लेने की भूल
पुरानी हिंदी फिल्म 'शोले' का वह मशहूर डायलॉग तो आपको याद ही होगा—"जो डर गया, समझो मर गया।" अजीब बात है कि मैराथन की दुनिया में कई नए धावक इसी तर्ज पर सोचते हैं। उन्हें लगता है कि अगर दौड़ने के बाद पैरों में भयंकर दर्द नहीं है, तो शायद ट्रेनिंग ठीक से हुई ही नहीं। रनिंग ट्रैक पर इस सोच का सीधा मतलब है: जो दर्द से नहीं डरा, समझो वो इंजर्ड हो गया। जब मैंने खुद 2015 में लंबी दूरी की दौड़ शुरू की थी (तब मैं 27 साल का था), तो शरीर के शुरुआती संकेतों को नज़रअंदाज़ करना मेरी भी आदत थी। हल्की चुभन को इग्नोर करते हुए माइलेज बढ़ाते रहना एक आम गलती है। नतीजा यह होता है कि जो दर्द एक दिन के आराम से ठीक हो सकता था, वह गंभीर चोट बनकर धावक को हफ्तों तक ट्रैक से दूर कर देता है। आज 34 की उम्र में, लगभग 7 सालों के अनुभव के बाद यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि एक धावक की असली सफलता रेस खत्म करने में नहीं, बल्कि बिना चोटिल हुए स्टार्टिंग लाइन तक पहुँचने में है।
चोटों का प्रकार और बचाव: एक तुलनात्मक अध्ययन
शरीर के बायोमैकेनिक्स और चोटों को समझना बचाव का पहला वैज्ञानिक कदम है। नीचे दी गई तालिका में रनिंग की 5 सबसे आम चोटों का विवरण है।
ध्यान दें: यह जानकारी World Athletics के स्वास्थ्य और विज्ञान दिशानिर्देशों पर आधारित है। (Last verified: 2022-01-20)
| चोट का नाम | प्रमुख लक्षण | मुख्य कारण | त्वरित बचाव / प्रबंधन |
|---|---|---|---|
| शिन स्प्लिंट्स (Shin Splints) | पिंडली की हड्डी (Tibia) के सामने या अंदर दर्द | हार्ड सतह पर दौड़ना, अचानक माइलेज बढ़ाना | बर्फ से सिंकाई, नरम सतह पर दौड़ना, काफ़ स्ट्रेचिंग |
| रनर्स नी (Runner's Knee) | घुटने की टोपी (Patella) के आसपास या नीचे दर्द | कमज़ोर हिप्स और ग्लूट्स, ओवरराइडिंग | क्वाड्स और हिप्स को मजबूत करना, डाउनहिल रनिंग से बचना |
| अकिलीज़ टेंडिनाइटिस | एड़ी के ठीक ऊपर टेंडन में दर्द और सूजन | टाइट काफ़ मसल्स, गलत जूते | हील ड्रॉप एक्सरसाइज, जूतों में हील कुशनिंग बढ़ाना |
| प्लांटर फैसीसाइटिस | सुबह उठते ही एड़ी के नीचे तेज चुभन वाला दर्द | फ्लैट फीट, खराब आर्च सपोर्ट, अधिक वजन | पैर के नीचे गोल्फ बॉल रोल करना, सही कुशनिंग वाले जूते |
| आईटी बैंड सिंड्रोम | घुटने के बाहरी हिस्से में तेज दर्द | ट्रैक पर एक ही दिशा में दौड़ना, कमज़ोर कोर | फोम रोलिंग, ग्लूट स्ट्रेंथनिंग |
हम चोटिल क्यों होते हैं? बायोमैकेनिक्स का सच
क्या हम इंसान वास्तव में दौड़ने के लिए बने हैं? विज्ञान इस पर एक स्पष्ट नजरिया देता है। PubMed Central (NIH) पर प्रकाशित शोध के अनुसार, रनिंग इंजरी के पीछे केवल एक कारण नहीं होता। यह बायोमैकेनिक्स, ट्रेनिंग लोड और रिकवरी का एक जटिल मिश्रण है। जब एक व्यक्ति दौड़ता है, तो उसके शरीर पर उसके वजन का लगभग 2 से 3 गुना बल (Ground Reaction Force) पड़ता है। यदि रनिंग फॉर्म सही नहीं है—जैसे ओवरस्ट्राइडिंग (पैर का शरीर के सेंटर ऑफ ग्रेविटी से बहुत आगे लैंड करना)—तो सारा इम्पैक्ट सीधे घुटनों और शिन पर ट्रांसफर हो जाता है। आधुनिक जीवनशैली हमें दिन भर कुर्सियों पर बैठाकर हमारे हिप फ्लेक्सर्स को टाइट कर देती है। उस कमज़ोरी को दूर किए बिना सीधे लंबी दूरी दौड़ने की जिद ही चोट का असली कारण बनती है।डेटा ट्रैकिंग, माइलेज और सही गियर
मुझे हर चीज का डेटा ट्रैक करना पसंद है। मेरी एक्सेल शीट में सिर्फ मेरा पेस और हार्ट रेट ही नहीं होता, बल्कि मेरे जूतों का माइलेज भी बारीकी से दर्ज होता है। 2018 के आसपास जब मुझे प्लांटर फैसीसाइटिस के शुरुआती लक्षण महसूस हुए, तो मैंने अपनी शीट खंगाली। मैंने देखा कि मेरे मौजूदा जूतों ने 700 किलोमीटर का आंकड़ा पार कर लिया था और उनकी कुशनिंग पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। प्लांटर फैसीसाइटिस के उपचार पर NIH की एक अन्य रिपोर्ट भी सही आर्च सपोर्ट की पैरवी करती है। यहीं पर सही running shoes की अहमियत समझ आती है। जब कुशनिंग खत्म हो जाती है, तो प्लांटर फेशिया पर दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। इन दिनों मैं आगामी asics gel nimbus 25 के बारे में काफी पढ़ रहा हूँ, जिसकी कुशनिंग तकनीक की रनिंग कम्युनिटी में बहुत चर्चा है। चाहे आप भारी वजन वाले धावक हों या एड़ी के बल लैंड करते हों, पैरों को सुरक्षित रखने के लिए कुशनिंग से समझौता नहीं किया जा सकता।Tip: अपनी एक्सेल शीट में एक कॉलम 'Shoe Mileage' का जरूर बनाएं। हर 600-800 किमी के बाद जूतों को बदल देना चाहिए।
धावकों का अनुभव: रनर्स नी (Runner's Knee) की पहेली
ऑनलाइन फोरम और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न रनिंग ग्रुप्स में 'रनर्स नी' सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहता है। फोरम पर अक्सर ऐसे सवाल आते हैं कि 5 किलोमीटर के बाद घुटने के ठीक नीचे एक अजीब सी चुभन शुरू हो जाती है। दिलचस्प बात यह है कि कई अनुभवी धावकों के अनुभव बताते हैं कि घुटने का दर्द अक्सर घुटने की समस्या होता ही नहीं है। फोरम की चर्चाओं के अनुसार, जिन लोगों ने अपने रूटीन में स्क्वाट्स और लंजेस को शामिल किया, उनका रनर्स नी पूरी तरह गायब हो गया। यह कमज़ोर हिप्स (विशेषकर Gluteus Medius) का नतीजा होता है। जब हिप्स कमज़ोर होते हैं, तो दौड़ते समय जांघ की हड्डी अंदर की तरफ घूमती है, जिससे घुटने की टोपी (Patella) अपने ट्रैक से बाहर खिसकती है।
Comments
Comments are currently closed. Have feedback or a question? Visit the Contact page.