ओवरप्रोनेशन क्या है? Asics Gel Kayano कैसे मदद करता है?

न्यूट्रल रनिंग और ओवरप्रोनेशन: एक तुलनात्मक विश्लेषण

रनिंग बायोमैकेनिक्स की दुनिया में यह समझना बहुत जरूरी है कि पैर जमीन पर कैसे पड़ता है। जब न्यूट्रल रनिंग, अंडरप्रोनेशन (सुपिनेशन) और ओवरप्रोनेशन की बात होती है, तो मूल रूप से पैर के आर्च (arch) के गिरने और टखने (ankle) के घूमने की प्रक्रिया का विश्लेषण किया जाता है। नीचे दी गई तालिका में इन तीनों प्रकार की रनिंग चाल (gait) का सीधा तुलनात्मक विश्लेषण है:
रनिंग चाल (Gait Type) बायोमैकेनिक्स (पैर जमीन पर कैसे पड़ता है) आर्च का व्यवहार जूतों के घिसने का पैटर्न (Wear Pattern)
न्यूट्रल रनिंग पैर एड़ी के बाहरी हिस्से पर लैंड करता है और फिर झटके को सोखने के लिए हल्का सा अंदर की ओर (लगभग 15 डिग्री) घूमता है। आर्च प्राकृतिक रूप से शॉक एब्जॉर्ब करता है और अपनी जगह पर बना रहता है। जूते का सोल बीच में और एड़ी के हिस्से में समान रूप से घिसता है।
अंडरप्रोनेशन (सुपिनेशन) पैर एड़ी के बाहरी हिस्से पर लैंड करता है, लेकिन अंदर की ओर बहुत कम घूमता है। शॉक एब्जॉर्प्शन नगण्य होता है। आर्च बहुत ऊंचा होता है और बिल्कुल नहीं गिरता। पैर का बाहरी हिस्सा पूरा वजन उठाता है। जूते के बाहरी किनारे (outer edge) बहुत ज्यादा घिस जाते हैं।
ओवरप्रोनेशन पैर एड़ी के बाहरी हिस्से पर लैंड करता है, लेकिन फिर अत्यधिक अंदर की ओर (15 डिग्री से कहीं अधिक) लुढ़क जाता है। आर्च पूरी तरह से गिर जाता है (फ्लैट फीट)। पैर का अंदरूनी किनारा सारा वजन झेलता है। जूते के सोल का अंदरूनी हिस्सा (inner edge) और अंगूठे के पास का हिस्सा सबसे ज्यादा घिसता है।
इस विषय पर अधिक वैज्ञानिक जानकारी के लिए Runner's World का लेख ओवरप्रोनेशन के बायोमैकेनिक्स और running shoes के महत्व को बेहतरीन तरीके से समझाता है।

बायोमैकेनिक्स: पैर जमीन पर कैसे पड़ता है

प्रोनेशन अपने आप में कोई बुरी चीज नहीं है। यह शरीर का प्राकृतिक शॉक एब्जॉर्बिंग मैकेनिज्म है। समस्या तब आती है जब यह प्रक्रिया 'ओवर' हो जाती है, जिससे शरीर का पूरा अलाइनमेंट—घुटने, कूल्हे और पीठ—बिगड़ जाता है। अपने 400-500 किलोमीटर चले हुए पुराने जूतों को समतल जमीन पर रखकर आप अपनी रनिंग फॉर्म को आसानी से पहचान सकते हैं। यदि जूते अंदर की तरफ झुके हुए नजर आ रहे हैं, तो ओवरप्रोनेशन स्पष्ट है।

नेहरू पार्क के ट्रैक से: धावकों की चाल का अवलोकन

दिल्ली की सर्द सुबहें और नेहरू पार्क का वो 2.7 किलोमीटर का लूप। वीकेंड पर यहां हर तरह के रनर मिल जाएंगे। कोई तेज गति से दौड़ रहा होता है तो कोई आराम से जॉगिंग कर रहा होता है। अक्सर ट्रैक के किनारे खड़े होकर धावकों की फुट स्ट्राइक (foot strike) को देखना एक आदत सी बन गई है। कई धावक दौड़ते समय हर कदम के साथ अपने टखनों को बुरी तरह से अंदर की तरफ गिरा रहे होते हैं। पीछे से देखने पर उनका अकिलीज़ टेंडन (Achilles tendon) सीधा होने के बजाय एक 'V' या धनुष का आकार ले रहा होता है। यह अत्यधिक ओवरप्रोनेशन का स्पष्ट संकेत है। इनमें से ज्यादातर धावक बेहद महंगे, मुलायम न्यूट्रल जूते पहने होते हैं जो उनके टखनों को अंदर गिरने से रोकने के बजाय और अधिक अस्थिर (unstable) बना देते हैं।
नेहरू पार्क में दौड़ते हुए धावकों के पैरों का क्लोजअप
नेहरू पार्क में दौड़ते हुए धावकों के पैरों का क्लोजअप

आखिर ओवरप्रोनेशन को नियंत्रित करना क्यों जरूरी है?

क्या फ्लैट फीट या ओवरप्रोनेशन होना कोई बीमारी है? बिल्कुल नहीं। यह पैर की एक प्राकृतिक बनावट है। दुनिया के कई एलीट रनर्स फ्लैट फीट के साथ दौड़ते हैं। समस्या लंबी दूरी की ट्रेनिंग में शुरू होती है। 5 किलोमीटर की दौड़ में दर्द महसूस न होना आम है। लेकिन जब मैराथन की तैयारी में 25 या 30 किलोमीटर का लॉन्ग रन किया जाता है, तो पैर हजारों बार जमीन से टकराते हैं। Asics Pronation Guide के अनुसार, ब्रांड की मालिकाना तकनीकें जैसे LITETRUSS या 4D Guidance इसी प्राकृतिक बनावट को सपोर्ट देने के लिए विकसित की गई हैं। यदि हर बार टखना अंदर की तरफ गिर रहा है, तो घुटने और टिबिया (tibia) हड्डी पर असमान दबाव पड़ता है, जो शिन स्प्लिंट्स, प्लांटर फैसिटिस या रनर्स नी का कारण बनता है।
Tip: अगर आप एक ओवरप्रोनेटर हैं, तो सही जूता आपके आर्च को गिरने से बचा सकता है। इसके लिए स्टेबिलिटी जूतों का चयन करना समझदारी है।

रनिंग कम्युनिटी का अनुभव: जूतों का गलत चुनाव और चोट

भारत के किसी भी प्रमुख रनिंग फोरम पर जाएं तो हर दूसरी पोस्ट चोट से जुड़ी मिलेगी। धावकों की आम शिकायतें कुछ इस तरह होती हैं: "मैंने कुशन वाले महंगे जूते खरीदे, लेकिन 10 किलोमीटर दौड़ने के बाद पिंडली में भयानक दर्द हो रहा है।" लोग अक्सर बिना अपनी चाल (gait analysis) जाने सिर्फ रंग और कुशन देखकर जूते खरीद लेते हैं। फोरम्स पर ऐसे कई उदाहरण हैं जहां धावकों ने अत्यधिक सॉफ्ट न्यूट्रल जूते पहने और इलियोटिबियल बैंड सिंड्रोम (ITBS) का शिकार हो गए। स्लो-मोशन वीडियो में यह साफ दिखता है कि अत्यधिक कुशनिंग ओवरप्रोनेशन को और बदतर कर देती है। RunRepeat का डेटा-ड्रिवेन गाइड भी यही साबित करता है कि गलत जूते पहनने का प्रभाव कितना हानिकारक हो सकता है।

भ्रांति बनाम वास्तविकता: क्या कोई भी कुशन वाला जूता काम करेगा?

रनिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ी भ्रांति है कि जितना ज्यादा कुशन, जूता उतना ही आरामदायक और सुरक्षित। कुशनिंग झटके को सोखती है, लेकिन ओवरप्रोनेटर्स के लिए ज्यादा सॉफ्ट कुशनिंग बिना किसी सपोर्ट के हानिकारक हो सकती है। इसे एक नरम गद्दे पर खड़े होने जैसा समझें। वजन एक तरफ डालने पर आप उसी तरफ धंसते चले जाएंगे। सॉफ्ट न्यूट्रल जूतों में टखना पहले ही अंदर गिर रहा होता है, और मुलायम फोम उसे और अंदर की तरफ धंसने देता है। Hal Higdon Marathon Training के प्रोग्राम्स इस बात पर जोर देते हैं कि लंबी दूरी की मैराथन ट्रेनिंग के लिए सही गियर (विशेषकर स्टेबिलिटी शूज) का चुनाव इंजरीज से बचने के लिए अनिवार्य है। एक ऐसे जूते की जरूरत होती है जो आरामदायक हो, लेकिन अंदरूनी हिस्से से मजबूत हो ताकि टखने को गिरने से रोका जा सके।
रनर अपने एसिक्स रनिंग जूतों के फीते बांधते हुए
रनर अपने एसिक्स रनिंग जूतों के फीते बांधते हुए

चोटों के आंकड़े और स्टेबिलिटी जूतों का विज्ञान

PubMed Central पर प्रकाशित क्लिनिकल रिसर्च के अनुसार, मोशन-कंट्रोल और स्टेबिलिटी जूते ओवरप्रोनेटर्स में चोट के जोखिम को काफी कम करते हैं। शोध बताते हैं कि जिन धावकों ने अपनी प्रोनेशन के आधार पर जूतों का चयन किया, उनमें प्लांटर फैसिटिस और अकिलीज़ टेंडिनाइटिस की दर लगभग 22% कम पाई गई। स्टेबिलिटी जूते रातों-रात गति नहीं बढ़ाते, लेकिन वे इंजरी-फ्री रखते हुए ट्रेनिंग के हफ्तों को लगातार पूरा करने में मदद करते हैं। मैराथन ट्रेनिंग में निरंतरता (Consistency) सबसे महत्वपूर्ण है।

2015 की यादें: जब दर्द को नजरअंदाज किया

आज से 10 साल पहले, 2015 की बात है जब मैंने पहली बार मैराथन ट्रेनिंग की दुनिया में कदम रखा था। उस समय मेरी उम्र 27 साल थी। दौड़ना प्राकृतिक लगता था, इसलिए साधारण सपाट सोल वाले जूते पहनकर दौड़ना शुरू कर दिया। पहली हाफ मैराथन में 15 किलोमीटर के बाद दाहिने घुटने के बाहरी हिस्से में तेज चुभन होने लगी। इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अगले तीन महीने तक सीढ़ियां उतरना भी मुश्किल हो गया। रनर्स नी (IT Band Friction Syndrome) की समस्या सामने आई। एक स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट ने मेरा गेट एनालिसिस किया और बताया कि मेरा दाहिना पैर बुरी तरह से ओवरप्रोनेट करता है। उसी दिन पहली बार स्टेबिलिटी शूज के बारे में पता चला। पहला asics gelkayano पहनने पर लगा जैसे आर्च के नीचे एक मजबूत सपोर्ट मिल गया हो। उस एक बदलाव ने रनिंग का पूरा सफर बदल दिया। आज दिल्ली-एनसीआर में कोचिंग देते हुए और अपनी ट्रेनिंग को एक्सेल शीट में ट्रैक करते हुए, मेरा सबसे पहला काम नए ट्रेनी का गेट एनालिसिस करवाना होता है।
पार्क में विचारमग्न खड़ा एक अनुभवी धावक
पार्क में विचारमग्न खड़ा एक अनुभवी धावक

तकनीकी विश्लेषण: 4D गाइडेंस सिस्टम और मेडियल पोस्ट

इंजीनियरिंग के नजरिए से देखें तो पुराने स्टेबिलिटी जूतों में 'मेडियल पोस्ट' का इस्तेमाल होता था—जूते के अंदरूनी हिस्से में लगा एक कड़क प्लास्टिक या हाई-डेंसिटी फोम। यह काम करता था, लेकिन असहज होता था। अब Asics ने '4D Guidance System' पेश किया है। इसमें कोई कड़क प्लास्टिक नहीं है। इसके बजाय, यह चार आयामों पर काम करता है: चौड़ाई, लंबाई, गहराई और समय (Time)। जूते का मिडसोल अंदर की तरफ थोड़ा चौड़ा बनाया गया है। आर्च के नीचे एक खास जियोमेट्री का फोम है जो पैर गिरने पर दबता है और तुरंत वापस अपनी जगह ले लेता है। RunRepeat Asics Gel Kayano Review के लैब टेस्ट के अनुसार, इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह 'वक्त' को नियंत्रित करता है। यह ओवरप्रोनेशन को पूरी तरह रोकता नहीं है, बल्कि उस समय को कम कर देता है जितनी देर तक पैर ओवरप्रोनेटेड स्थिति में रहता है। यह सूक्ष्म बायोमैकेनिकल बदलाव घुटनों पर पड़ने वाले टॉर्क (torque) को काफी कम कर देता है।

Asics Gel Kayano: सही उपयोग के लिए सीधे सुझाव

अगर आप इसे खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: किसे खरीदना चाहिए: वे धावक जिनका पैर दौड़ते समय अंदर की ओर गिरता है (ओवरप्रोनेटर्स) और जिनका वजन थोड़ा अधिक है। किसे नहीं: न्यूट्रल रनर्स या सुपिनेटर्स को इससे बचना चाहिए। यह पैरों को बाहर की तरफ धकेल सकता है। * लॉन्ग रन में इसका इस्तेमाल: यह एक रिकवरी और लॉन्ग-रन शू है। स्पीड वर्कआउट्स के लिए इसे इस्तेमाल न करें; यह स्थिरता के लिए बना है, गति के लिए नहीं।
एक टिप: नए जूते को सीधे 20 किलोमीटर की दौड़ में न पहनें। इसके 4D गाइडेंस सिस्टम को आपके आर्च के अनुसार एडजस्ट होने में 15-20 किलोमीटर का ब्रेक-इन समय लगता है।

समस्या और समाधान: मैराथन की लंबी दूरी की थकान

मैराथन ट्रेनिंग में एक स्पष्ट पैटर्न होता है। जब तक शरीर में ऊर्जा होती है, रनिंग फॉर्म परफेक्ट रहता है। पुरानी हिंदी फिल्मों के गाने सुनते हुए शुरुआती किलोमीटर आसानी से कट जाते हैं। असली परीक्षा 30 किलोमीटर के मार्क के बाद शुरू होती है। इस समय तक ग्लूट्स और काव्स बुरी तरह थक चुके होते हैं। जब कोर और हिप की मांसपेशियां थक जाती हैं, तो शरीर सहारा ढूंढता है और लेट-स्टेज फटीग के कारण पैर और भी ज्यादा अंदर की तरफ गिरने लगते हैं। यहीं पर स्ट्रक्चरल सपोर्ट एक गेम-चेंजर साबित होता है। जब फॉर्म बिगड़ने लगता है, तब जूतों का गाइडेंस सिस्टम थके हुए पैरों को अलाइन रखने का काम करता है। यह अंतिम कुछ किलोमीटरों में घुटनों पर आने वाले अतिरिक्त झटके से बचाता है। मैराथन का असली रेस 30 किलोमीटर के बाद ही शुरू होता है, और उस वक्त पैरों में सही गियर होना किसी वरदान से कम नहीं है।
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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