क्या दौड़ना हमेशा दर्दनाक होता है? अन्य धावकों के अनुभव
रनिंग कम्युनिटी में अक्सर एक सवाल गूंजता रहता है—क्या दौड़ना हमेशा दर्दनाक होता है? जब मैंने 2015 में दौड़ना शुरू किया था, तब मैं भी यही सोचता था। दिल्ली-एनसीआर के धावक दोस्तों और ऑनलाइन रनिंग फोरम्स पर अक्सर नए धावकों की कहानियां सुनने को मिलती हैं। कोई घुटने के दर्द से परेशान है, तो कोई शिन स्प्लिंट्स (shin splints) की शिकायत कर रहा है। कुछ दिन पहले ही मेरी बात एक नए धावक से हुई, जिसने पूछा, "कोच राहुल, क्या दर्द के बिना दौड़ना संभव है?"
यह सवाल मुझे सीधा मेरे शुरुआती दिनों की याद दिलाता है। मैं भी अक्सर सोचता था कि क्या मेरे पैरों में हमेशा यह भारीपन और दर्द रहेगा? मैं एक सर्टिफाइड कोच बन गया हूँ, लेकिन मैं आज भी यह जानने को उत्सुक रहता हूँ कि नए धावक शुरुआत में इतनी जल्दी चोटिल क्यों हो जाते हैं।
रनिंग कम्युनिटी में चोटों की आम चर्चाएं
कई बार लोग ऑनलाइन फोरम्स (जैसे कि शियाओहोंगशू या अन्य रनिंग ऐप्स) पर अपनी परेशानियां शेयर करते हैं। एक धावक ने लिखा था, "आज ठंड और प्रदूषण के कारण ट्रैक पर लोग कम थे। मैं काम के तनाव में था और बिना म्यूजिक के दौड़ रहा था, इसलिए मेरा ध्यान मेरे फॉर्म पर नहीं था।" यह एक बहुत ही आम बात है—जब हमारा दिमाग कहीं और होता है, तो हमारी बॉडी का अलाइनमेंट बिगड़ जाता है, जो चोट का सबसे बड़ा कारण बनता है। नए धावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या वे कभी बिना दर्द के लंबी दूरी तय कर पाएंगे?
आंकड़े जो हमें चौंकाते हैं: चोटों की सच्चाई
आइए सीधे कुछ डराने वाले लेकिन जरूरी आंकड़ों पर बात करते हैं। RunRepeat के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 30% से 75% धावकों को किसी न किसी प्रकार की रनिंग इंजरी का सामना करना पड़ता है (Source: RunRepeat. Last verified: 2020-06-25)। जब मैंने पहली बार ये आंकड़े देखे, तो मैं सचमुच उलझन में पड़ गया।
दौड़ना तो इंसान का सबसे प्राकृतिक मूवमेंट है, फिर यह इतनी चोटों का कारण कैसे बन सकता है? क्या हमारी तकनीक में कोई बुनियादी खामी है, या हम आधुनिक लाइफस्टाइल के कारण अपनी प्राकृतिक चाल भूल गए हैं?
आंकड़ों का विश्लेषण और इंजरी का कारण
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि इंजरी का प्रतिशत बहुत अधिक है। सच्चाई यह है कि ज्यादातर चोटें किसी एक्सीडेंट से नहीं, बल्कि लगातार गलत फॉर्म में दौड़ने के कारण (overuse injuries) होती हैं। रनिंग बायोमैकेनिक्स की समझ न होना इस समस्या को और बढ़ा देता है।
दिल्ली के ट्रैक्स और पोस्चर का विज्ञान
दिल्ली-एनसीआर के मशहूर पार्कों की सुबह का दृश्य कुछ अलग ही होता है। लाल मिट्टी के ट्रैक पर सुबह-सुबह धावकों की भीड़, ठंडी हवा और पक्षियों की चहचहाहट। लेकिन अगर आप ध्यान से देखें, तो हर धावक का पोस्चर अलग होता है। कोई आगे की तरफ बहुत ज्यादा झुका हुआ है, तो कोई बिल्कुल सीधा और कड़क होकर दौड़ रहा है।

क्या आप जानते हैं कि सही पोस्चर केवल अच्छा दिखने के लिए नहीं होता? World Athletics के स्वास्थ्य विज्ञान अनुसंधान के अनुसार, एक सही बॉडी अलाइनमेंट—जिसमें आपका पोस्चर सीधा हो, आगे की ओर बहुत हल्का सा झुकाव हो और कंधे रिलैक्स्ड हों—आपके फेफड़ों को ज्यादा ऑक्सीजन लेने में मदद करता है। इसके साथ ही, यह आपके जोड़ों (खासकर घुटनों और एड़ियों) पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम करता है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सही बॉडी अलाइनमेंट
जब आप दौड़ते हैं, तो आपकी बॉडी एक स्प्रिंग की तरह काम करनी चाहिए। अगर आपकी गर्दन बहुत ज्यादा आगे है (जो अक्सर फोन देखने की आदत से होता है), तो आपकी रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त भार पड़ता है। सही अलाइनमेंट का मतलब है कि आपके कान, कंधे और कूल्हे एक सीधी रेखा में हों।
फुट स्ट्राइक की पहेली और गियर का चुनाव
दौड़ने की तकनीक के अलावा, सही जूतों का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब धावक बिना कुशनिंग और सपोर्ट के दौड़ते हैं, तो पंजों में दर्द होना स्वाभाविक है। सही running shoes का चुनाव आपके फॉर्म को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, asics gel 1130 जैसे जूते, जो स्टेबिलिटी और कुशनिंग का सही बैलेंस देते हैं, धावकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
हील स्ट्राइक बनाम मिडफुट स्ट्राइक का विज्ञान
जूतों के अलावा, सबसे बड़ी बहस 'फुट स्ट्राइक' (पैर को जमीन पर रखने का तरीका) को लेकर होती है। PubMed Central / NIH पर प्रकाशित रिसर्च दर्शाती है कि हील स्ट्राइक (एड़ी के बल लैंड करना) और रनिंग-संबंधित चोटों के बीच एक सीधा संबंध हो सकता है, खासकर तब जब आप ओवरस्ट्राइड (लंबे कदम) करते हैं। मिडफुट स्ट्राइक (पैर के मध्य भाग पर लैंड करना) को अक्सर शॉक एब्जॉर्प्शन के लिए बेहतर माना जाता है।

हालांकि, ऐसा नहीं है कि हील स्ट्राइक करने वाला हर व्यक्ति चोटिल होगा, लेकिन अगर आप हील स्ट्राइक के साथ बहुत लंबे कदम ले रहे हैं, तो आपके घुटनों पर ब्रेकिंग फोर्स (रुकने का दबाव) बहुत ज्यादा पड़ता है।
मेरी 5 साल की ट्रेनिंग यात्रा
अगर मैं पीछे मुड़कर देखूं, तो 2015 में मेरी रनिंग की शुरुआत बहुत ही बेतरतीब थी। मेरी सांसें जल्दी फूल जाती थीं और पैर भारी लगते थे। मेरा फॉर्म इतना खराब था कि मैं दौड़ते समय अपने हाथों को शरीर के आर-पार स्विंग करता था, जिससे मेरी ऊर्जा बर्बाद होती थी।
पहले 6 महीनों के लगातार दर्द के बाद, मैंने अपने दौड़ने के वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया। वीडियो देखकर मुझे अपनी गलतियों का अहसास हुआ। दूसरे साल में मैंने अपने कैडेंस (cadence - प्रति मिनट कदमों की संख्या) पर काम करना शुरू किया और इसे 160 से बढ़ाकर 170 के आसपास ले गया।
फॉर्म में धीरे-धीरे हुए सुधार
आज, 5 साल बाद (2020 में), एक एडवांस्ड मैराथन रनर और कोच होने के बावजूद, मैं यह नहीं कहूंगा कि मेरा फॉर्म एकदम 'परफेक्ट' है। मैं अभी भी हर दिन इसे बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा हूँ। थकान होने पर मेरा फॉर्म आज भी बिगड़ जाता है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
डेटा एनालिसिस, पुरानी हिंदी फिल्में और मैराथन ट्रेनिंग
मुझे एक्सेल स्प्रेडशीट में डेटा एनालाइज करना बहुत पसंद है। जिस तरह एक्सेल में अगर आपने एक छोटा सा फॉर्मूला गलत लगा दिया, तो पूरी शीट का कैलकुलेशन खराब हो जाता है, ठीक वैसे ही रनिंग में अगर आपका बेसिक फॉर्म गलत है, तो आप कितने भी किलोमीटर दौड़ लें, अंत में इंजरी ही मिलेगी। पहाड़ों में ट्रेकिंग के दौरान भी मैंने यही महसूस किया है कि बेसिक्स का सही होना सबसे ज्यादा जरूरी है।
पुरानी हिंदी फिल्मों की तरह, मैराथन ट्रेनिंग की कहानी भी लंबी होती है। इसमें शॉर्टकट नहीं होते। Hal Higdon के मैराथन ट्रेनिंग प्लान्स इस बात पर जोर देते हैं कि कैसे सही मैकेनिक्स को एक स्ट्रक्चर्ड प्लान में शामिल करने से शुरुआती धावक ओवरयूज़ इंजरी से बच सकते हैं। एक अच्छे प्लान में आराम और रिकवरी को उतना ही महत्व दिया जाता है जितना कि दौड़ने को।
अपने फॉर्म को कैसे सुधारें?
खराब फॉर्म से घुटनों और एड़ियों पर बहुत ज्यादा इम्पैक्ट पड़ता है। जब आप ओवरस्ट्राइडिंग (शरीर के गुरुत्वाकर्षण केंद्र से बहुत आगे पैर रखना) करते हैं, तो आपका पैर एक ब्रेक की तरह काम करता है, जो हर कदम पर झटके को सीधे घुटनों तक पहुंचाता है।

सुधार के व्यावहारिक कदम (Step-by-Step Guide)
- ओवरस्ट्राइडिंग बंद करें: अपने कदमों को छोटा करें। यह सुनिश्चित करें कि आपका पैर शरीर के ठीक नीचे (गुरुत्वाकर्षण केंद्र के पास) लैंड करे।
- कैडेंस (Cadence) बढ़ाएं: अगर आप छोटे कदम लेंगे, तो स्वाभाविक रूप से आपके कदमों की गति बढ़ेगी। 170-180 कदम प्रति मिनट का लक्ष्य रखें।
- बाजुओं की सही स्विंग: अपनी बाजुओं को 90 डिग्री के कोण पर रखें और उन्हें आगे-पीछे स्विंग करें, न कि शरीर के आर-पार (cross-body)।
- गज़ (Gaze) को सामने रखें: अपने पैरों को देखने के बजाय लगभग 10-15 मीटर आगे देखें। इससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है।
आप अपने रनिंग फॉर्म को सुधारने के लिए क्या कर रहे हैं? क्या आपने कभी अपने दौड़ने का वीडियो बनाकर देखा है? अगर नहीं, तो इस वीकेंड जरूर ट्राई करें!
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