स्मार्टवॉच और

अपनी स्मार्टवॉच को घर पर छोड़ें: एक सीधा सुझाव

अपने अगले रिकवरी रन पर अपनी कलाई को खाली रखें। जब आप दौड़ रहे होते हैं, तो लगातार स्क्रीन की ओर देखने से न केवल ध्यान भटकता है, बल्कि दौड़ने का प्राकृतिक फॉर्म (Running Form) और लय भी खराब हो जाती है। बार-बार अपनी पेस या हार्ट रेट चेक करने के लिए कलाई मोड़ने से कंधों में जकड़न आ सकती है। बस जूते पहनें और बाहर निकल जाएं। इस बात की चिंता न करें कि Runner's World द्वारा अनुशंसित आपका महंगा गैजेट उस पल क्या कह रहा है। अपने ओवरऑल marathon training plan में सप्ताह में कम से कम एक 'नो-वॉच रन' को शामिल करना एक बेहतरीन बदलाव हो सकता है। बस एक निश्चित रूट चुनें और शरीर की सुनें। बिना किसी बीप के दौड़ना एक अलग ही स्वतंत्रता का अहसास देता है।
A person ties black running shoe
A person ties black running shoe

ऑप्टिकल हार्ट रेट सेंसर्स की सच्चाई

विज्ञान कभी-कभी हमारे उन गैजेट्स की पोल खोल देता है जिन पर हम अंधाधुंध भरोसा करते हैं। हाल ही में PubMed Central पर प्रकाशित एक रिसर्च ने स्पष्ट किया है कि एंड्योरेंस एक्सरसाइज के दौरान कलाई पर पहने जाने वाले ऑप्टिकल हार्ट रेट मॉनिटर काफी भ्रामक (inaccurate) हो सकते हैं। पसीने या बांहों के तेजी से हिलने के कारण ये सेंसर्स अक्सर हार्ट रेट को गलत पढ़ते हैं। यह डेटा पढ़ने के बाद मुझे गहरी ठेस लगी। मैं 2015 से मैराथन की ट्रेनिंग कर रहा हूं। इन 6 सालों में, मैंने हमेशा माना कि घड़ी का डेटा ही अंतिम सत्य है। पिछले साल मैंने अपने ही एक लेख में कह दिया था कि हार्ट रेट ज़ोन सही न होने पर ट्रेनिंग बेकार है। आज मैं अपने ही शब्दों को वापस ले रहा हूं। क्या मैंने सिर्फ गलत स्पाइक्स को देखकर कई बार अपनी गति धीमी कर दी थी? जब हम पहाड़ों में ट्रेकिंग करते हैं, तो क्या हम हर कदम पर हार्ट रेट देखते हैं? बिल्कुल नहीं। हम प्रकृति का आनंद लेते हैं। हर एक धड़कन को मापना शायद उतना भी जरूरी नहीं है।

स्मार्टवॉच मेट्रिक्स बनाम शरीर की आवाज़ (RPE)

तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के बीच हमेशा एक द्वंद्व रहता है। RunRepeat और अन्य प्लेटफार्म्स पर उपलब्ध स्मार्टवॉच मेट्रिक्स की तुलना जब 'Perceived Exertion' (RPE) यानी शरीर की अपनी प्राकृतिक आवाज़ से की जाती है, तो तथ्य कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं।
स्मार्टवॉच मेट्रिक्स (डेटा) शरीर की आवाज़ (RPE - Rate of Perceived Exertion)
GPS पेसिंग (मिनट/किमी) सांस लेने की गति और बातचीत करने की क्षमता (Talk Test)
VO2 Max और रिकवरी टाइम मांसपेशियों की वास्तविक थकान और ऊर्जा का स्तर
हार्ट रेट जोन्स (Zone 1-5) दौड़ते समय महसूस होने वाला प्रयास (1 से 10 का स्केल)
कैडेंस (Steps per minute) कदमों की प्राकृतिक लय और जमीन से संपर्क का एहसास
Tip: Source: RunRepeat. Last verified: 2021-12-08. ट्रेनिंग में दोनों का संतुलन आवश्यक है, लेकिन टकराव की स्थिति में शरीर के संकेतों को प्राथमिकता देना सुरक्षित माना जाता है।
स्मार्टवॉच के डेटा और धावक के अपने शरीर को महसूस करने की तुलना
स्मार्टवॉच के डेटा और धावक के अपने शरीर को महसूस करने की तुलना

Strava का दबाव और डिजिटल रेस

ऑनलाइन फोरम्स और धावकों के बीच चर्चाओं का विश्लेषण करने पर एक परेशान करने वाला ट्रेंड सामने आता है। आज के समय में बहुत से धावक Strava पर अपना डेटा सिंक करने को लेकर इतने तनाव में रहते हैं कि गैजेट काम न करने पर वे दौड़ना ही रद्द कर देते हैं। "If it's not on Strava, it didn't happen" जैसी मानसिकता ने दौड़ने की खुशी को खत्म कर दिया है। रनिंग कम्युनिटी में अक्सर ऐसे मामले देखे जाते हैं जहां लोग बिना सोचे-समझे Hal Higdon Marathon Training जैसे प्रसिद्ध प्लान्स का पालन करते हैं। शिन स्प्लिंट्स (Shin Splints) या अन्य दर्द होने के बावजूद, सिर्फ इसलिए क्योंकि उस दिन के marathon training plan में 15 किलोमीटर दर्ज है, धावक खुद को चोटिल कर बैठते हैं। कोई भी डिजिटल प्लान शरीर के वास्तविक दर्द को नहीं पढ़ सकता।

लोधी गार्डन की सर्द सुबह और रेस डे

दिल्ली-एनसीआर के लोधी गार्डन में सर्दियों की सुबहें एक अलग ही जादू लेकर आती हैं। धुंध के बीच से निकलते हुए सूरज की किरणें और चारों तरफ केवल जूतों की आवाज़। लेकिन आजकल, उस प्राकृतिक शांति को हर कुछ मिनटों में बजने वाली दर्जनों स्मार्टवॉच की 'बीप-बीप' आवाज़ें तोड़ देती हैं। हर कोई अपनी कलाई घूरता हुआ नज़र आता है। रेस की तैयारी किसी एक्सेल स्प्रेडशीट में डेटा एनालिसिस करने जैसी रूखी और मशीनी नहीं होनी चाहिए। जब आप Athletics Federation of India का आधिकारिक कैलेंडर देखते हैं और आगामी रेस के लिए तिथियां निर्धारित करते हैं, तो याद रखें कि यह केवल कैलेंडर पर ब्लॉक बनाना नहीं है। यह पुरानी हिंदी फिल्मों के उन दृश्यों की तरह होना चाहिए, जहां नायक बिना किसी गार्मिन या एप्पल वॉच के पूरी आज़ादी से खुले रास्तों पर दौड़ता है। रेस के अंतिम 10 किलोमीटर में कोई भी स्क्रीन हिम्मत नहीं देगी। वहां सिर्फ वह आत्मविश्वास काम आएगा जो शरीर को समझकर बनाया गया है। अगली बार जब दौड़ने निकलें, तो तकनीक को पीछे छोड़कर खुद को महसूस करें।
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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