पहाड़ों की पगडंडियां और ट्रेल रनिंग का विज्ञान
60 और 70 के दशक की पुरानी हिंदी फिल्मों में जब देव आनंद या शम्मी कपूर किसी पहाड़ी रास्ते पर गाते हुए चलते थे, तो वे उबड़-खाबड़ पगडंडियां मुझे बहुत आकर्षित करती थीं। तब किसने सोचा था कि वो 'फिल्मी' पगडंडियां एक दिन मेरे लिए सीरियस रनिंग ट्रैक बन जाएंगी? जब मैंने 2015 में अपना मैराथन ट्रेनिंग का सफर शुरू किया था, तब मेरा पूरा ध्यान सिर्फ पेस (pace) और टाइमिंग पर होता था। पक्की सड़कों पर दौड़ते हुए सालों बीत गए। लेकिन पिछले सात सालों में, जैसे-जैसे मेरे पैरों ने हजारों किलोमीटर नापे हैं, मुझे समझ में आया कि पक्की सड़क पर दौड़ना और किसी पहाड़ी ट्रेल पर दौड़ना दो बिल्कुल अलग खेल हैं। हाल के कुछ वर्षों में कम्युनिटी में भी यह बदलाव साफ दिख रहा है। अब धावक कच्चे रास्तों, पहाड़ों और जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। World Athletics के अनुसार, ट्रेल रनिंग अब केवल एक ऑफ-सीजन शौक नहीं रह गया है। इसे एक मान्यता प्राप्त और तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धी खेल विधा का दर्जा मिल चुका है। शुरुआत में बहुतों को लगता है कि ट्रेल रनिंग सिर्फ तेज गति से ट्रेकिंग करना है। जब आप ढलान पर तेजी से नीचे उतरते हैं या कीचड़ भरे रास्तों पर संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं, तो आपके जूतों की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। एक साधारण जूता आपको ट्रेल पर वह सुरक्षा नहीं दे सकता जिसकी आपको जरूरत होती है।
रोड शूज बनाम ट्रेल शूज: क्या है असली अंतर?
आइए सीधे तकनीकी बातों पर आते हैं। अक्सर नए धावक अपने महंगे रोड रनिंग शूज पहनकर ट्रेल पर चले जाते हैं। इसका नतीजा सिर्फ खराब जूते नहीं, बल्कि गंभीर चोटें भी हो सकता है। Runner's World के गियर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ट्रेल शूज के डिजाइन का मूल उद्देश्य शॉक एब्जॉर्प्शन से कहीं ज्यादा 'ग्रिप' और 'प्रोटेक्शन' होता है। नीचे दी गई तालिका से इन दोनों के बीच का बुनियादी तकनीकी अंतर समझा जा सकता है:| विशेषता (Feature) | रोड शूज | ट्रेल शूज |
|---|---|---|
| लग्स की गहराई (Lug Depth) | फ्लैट या बहुत छोटे (1-2mm)। स्मूथ सतह पर घर्षण कम करने के लिए। | गहरे और आक्रामक (4-6mm)। कीचड़ और बजरी में मजबूत पकड़ के लिए। |
| रॉक प्लेट्स (Rock Plates) | नहीं होती। | मिडसोल में एक सख्त प्लेट होती है जो नुकीले पत्थरों से पैरों के तलवों को बचाती है। |
| अपर ड्यूरेबिलिटी | हल्का और हवादार मेश (Breathable mesh)। | मजबूत, आंसू-प्रतिरोधी (Tear-resistant) सामग्री, अक्सर वॉटरप्रूफिंग के साथ। |
| टो बंपर (Toe Bumper) | नरम और लचीला। | सख्त रबर कैप, जो उंगलियों को पत्थरों से टकराने पर बचाता है। |
Source: Runner's World & Technical Analysis. Last verified: 2022-05-30
असमतल रास्तों का विज्ञान और बायोमैकेनिक्स
ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ते समय शरीर की प्रतिक्रिया बिल्कुल बदल जाती है। PubMed Central पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ट्रेल रनिंग के दौरान सतह की असमानता के कारण धावक के कदम (stride) और पैरों के बायोमैकेनिक्स लगातार बदलते रहते हैं। समतल सड़क पर आपकी चाल एक सेट रिदम में होती है। इसके विपरीत ट्रेल पर हर कदम के साथ मांसपेशियों को संतुलन के लिए नया कैलकुलेशन करना पड़ता है। अगर जूतों में टॉर्शनल रिजिडिटी (torsional rigidity) यानी मुड़ने के प्रति प्रतिरोध कम है, तो एंकल ट्विस्ट होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ट्रेल शूज इसी अचानक मुड़ने वाले झटके से टखनों को सुरक्षित रखते हैं।
कीचड़, पत्थर और ग्रिप: अरावली का एक अनुभव
रविवार की सुबह अरावली के कच्चे रास्तों पर लॉन्ग रन करना मेरी ट्रेनिंग रूटीन का अहम हिस्सा है। पिछले मॉनसून के दौरान एक रन के समय रात भर भारी बारिश हुई थी। सुबह पूरा रास्ता कीचड़ और काई लगी लाल चट्टानों से भरा था। मेरे साथ दौड़ रहे कुछ धावकों के पास साधारण ग्रिप वाले जूते थे और वे हर ढलान पर बुरी तरह फिसल रहे थे। मैं उस दिन अपना नया adidasterrex पहनकर दौड़ रहा था। उस ढलान पर मैंने महसूस किया कि सही जूतों का मतलब सिर्फ आराम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास होता है। जब आप जानते हैं कि आपका पैर फिसलेगा नहीं, तो आपकी गति और फॉर्म अपने आप बेहतर हो जाती है। Adidas Official वेबसाइट के अनुसार, Terrex सीरीज़ में इस्तेमाल होने वाली Continental™ Rubber आउटसोल तकनीक गीली और सूखी दोनों सतहों पर बेहतरीन ग्रिप देती है। यह वही रबर है जो कार और बाइक के प्रीमियम टायरों में इस्तेमाल होती है। अरावली की उस फिसलन भरी ढलान पर इस रबर ने एक मजबूत एंकर का काम किया।सही ट्रेल गियर कैसे चुनें
जब आप अपने लिए ट्रेल running shoes खरीदने जाएं तो इन तीन मुख्य बातों का ध्यान रखें:- अपनी सतह को पहचानें: दिल्ली के संजय वन जैसे सूखे और मिट्टी वाले रास्तों के लिए 3-4mm के लग्स पर्याप्त हैं। वहीं, हिमाचल या उत्तराखंड में बारिश के बाद दौड़ने के लिए 5mm से ज्यादा गहरे लग्स की जरूरत होगी।
- रॉक प्लेट की जरूरत: यदि रूट पर नुकीले पत्थर और बजरी ज्यादा है, तो बिना रॉक प्लेट वाले जूते न लें। पैरों के तलवों में 'स्टोन ब्रूज़' (Stone bruise) होना बेहद दर्दनाक होता है।
- साइजिंग का नियम: ट्रेल शूज हमेशा अपने नॉर्मल साइज से आधा नंबर बड़े लें। ढलान पर उतरते समय पैर आगे की तरफ खिसकते हैं। जूता टाइट हुआ, तो आपके पैरों के नाखून काले पड़ जाएंगे (Black toenails)।
Tip: खरीदते समय जूतों के टो-बॉक्स को दबाकर देखें। ट्रेल शूज का टो-बॉक्स रेगुलर जूतों से थोड़ा सख्त होना चाहिए ताकि ठोकर लगने पर उंगलियां सुरक्षित रहें।

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