Adidas Supernova

सही डेली ट्रेनर की तलाश

रोज़मर्रा की ट्रेनिंग के लिए कौन सा जूता चुनें जो जेब पर भारी न पड़े? दिल्ली-एनसीआर के ट्रैक पर दौड़ते हुए अक्सर नए धावक मुझसे यही सवाल पूछते हैं। मार्केट में हज़ारों रुपये के विकल्प मौजूद हैं, जो भ्रमित करने के लिए काफी हैं। 2015 से मैराथन की दुनिया में सक्रिय रहने और अब 33 की उम्र में एक सर्टिफाइड कोच के तौर पर, मैंने सीखा है कि हर रन के लिए महंगे और कार्बन-प्लेटेड जूतों की आवश्यकता नहीं होती।

हाल ही में adidas supernova ने काफी चर्चा बटोरी है। यह जूता डेली ट्रेनर्स की उस श्रेणी में आता है जो टिकाऊ भी हैं और किफायती भी। लेकिन क्या यह रोज़मर्रा के भारी माइलेज को झेलने के लिए वास्तव में तैयार है?

A runner strides confidently down an
A runner strides confidently down an

मिडसोल तकनीक और इम्पैक्ट फोर्स का विज्ञान

दौड़ते समय जूतों में कुशनिंग का विज्ञान काफी सीधा और महत्वपूर्ण है। डामर या कंक्रीट जैसी सख्त सतहों पर हर कदम के साथ शरीर के वजन का कई गुना दबाव पैरों पर पड़ता है। क्या महज़ फोम की परतें इस झटके को कम कर सकती हैं?

इस संदर्भ में PubMed Central पर प्रकाशित शोध स्पष्ट करता है कि पर्याप्त कुशनिंग वाली मिडसोल तकनीक इम्पैक्ट फोर्स (impact force) को काफी हद तक कम करती है, जिससे लोअर-लिम्ब इंजरी (पैरों के निचले हिस्से में चोट) का खतरा घट जाता है। एडिडास सुपरनोवा की बनावट इसी वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है। इसकी हील (एड़ी) में इस्तेमाल की गई 'बूस्ट' तकनीक एनर्जी रिटर्न सुनिश्चित करती है, जबकि फोरफुट (आगे के हिस्से) में मौजूद 'बाउंस' फोम आवश्यक लचीलापन प्रदान करता है।

तकनीकी स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

जूते की असल क्षमता उसके तकनीकी डेटा में छिपी होती है। नीचे दिए गए स्पेसिफिकेशन्स इस बात का स्पष्ट विवरण देते हैं कि यह मॉडल किस तरह के धावकों के लिए डिज़ाइन किया गया है:

फीचर (Feature) विवरण (Details)
वजन (Weight) लगभग 315 ग्राम (मेंस US 9)
हील-टू-टो ड्रॉप (Drop) 10mm (हील: 32mm / फोरफुट: 22mm)
मिडसोल तकनीक हाइब्रिड (एड़ी में Boost + आगे Bounce)
आउटसोल (Outsole) टेक्सचर्ड रबर (Textured Rubber)
अनुमानित कीमत ₹7,999 - ₹8,999

Source: RunRepeat. Last verified: 2021-04-10

ध्यान दें: यह जूता सामान्यतः ट्रू-टू-साइज (true-to-size) फिट बैठता है। चौड़े पंजों वाले धावकों को आधा नंबर बड़ा साइज़ आज़माना चाहिए।

18 हफ्तों का कड़ा शेड्यूल और जूतों का रोटेशन

एक गंभीर मैराथन ट्रेनिंग साइकिल अक्सर 18 हफ्ते लंबी होती है। जब मैं धावकों के साप्ताहिक माइलेज को अपनी एक्सेल स्प्रेडशीट में डालकर एनालिसिस करता हूँ, तो यह साफ़ दिखता है कि इस दौरान running shoes पर कितना भयानक दबाव पड़ता है।

एक ही जोड़ी जूते पर निर्भर रहना चोटों को निमंत्रण देना है। Hal Higdon Marathon Training के मूल सिद्धांतों के अनुसार, लंबी अवधि के दौरान जूतों को रोटेट करना और उन्हें सही से ब्रेक-इन (break-in) करना बेहद जरूरी है। इससे कुशनिंग को रिकवर होने का समय मिलता है और जूतों की लाइफ बढ़ जाती है।

भारत में दौड़ने के सीज़न को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। Athletics Federation of India की गाइडलाइन्स के अनुसार हमारे देश में अधिकांश प्रमुख मैराथन इवेंट्स सर्दियों में आयोजित होते हैं। इसका मतलब है कि मुख्य ट्रेनिंग गर्मियों के अंत या मानसून के दौरान होती है, जिसके लिए एक मजबूत ग्रिप वाला डेली ट्रेनर आवश्यक है।

बजट और परफॉरमेंस का संतुलन

यह एक आम धारणा है कि केवल ₹15,000 से अधिक कीमत वाले जूते ही बेहतर होते हैं। असलियत में 90% ट्रेनिंग रन के लिए एक विश्वसनीय और बजट-अनुकूल डेली ट्रेनर काफी होता है। Runner's World के एक्सपर्ट रिव्यू भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि एडिडास सुपरनोवा हाई-माइलेज मैराथन तैयारी के लिए एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प है। रेस के दिन के लिए आप हल्के जूते चुन सकते हैं, लेकिन रोज़ के बेस माइलेज के लिए यह मॉडल पूरी तरह सक्षम है।

A silhouette jumps energetically in
A silhouette jumps energetically in

पहाड़ों सी ग्रिप, सड़कों पर

दौड़ने के अलावा, पहाड़ों में ट्रेकिंग करना मेरा एक पुराना शौक है। कानों में पुरानी हिंदी फिल्मों के गाने (खासकर "मुसाफिर हूँ यारों...") और पैरों के नीचे ऊबड़-खाबड़ पगडंडी—ऐसी जगहों पर जूतों की ग्रिप ही असली सहारा होती है। पहाड़ों की उस शांति और आत्मविश्वास का सीधा संबंध आपके फुटवियर से होता है।

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर, जहाँ कभी कंक्रीट तो कभी टूटे हुए फुटपाथ का सामना करना पड़ता है, सुपरनोवा का रबर आउटसोल वैसी ही मजबूत ग्रिप का अहसास देता है। 10mm का ड्रॉप और मिडसोल कुशनिंग, घुटनों को झटके से वैसे ही बचाते हैं जैसे ढलान पर उतरते समय एक अच्छी ट्रेकिंग स्टिक। शुरुआती 10K रन में यह बाउंस और स्टेबिलिटी साफ़ महसूस होती है। समय और बढ़ते माइलेज के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका कुशन कितने हफ्तों तक अपना यह लचीलापन बरकरार रखता है।

दौड़ के दौरान सही जूते चुनना व्यक्तिगत अनुभव पर भी निर्भर करता है। अपने ट्रेनिंग माइलेज को धीरे-धीरे बढ़ाएं और जूतों के रिस्पॉन्स पर नज़र रखें।
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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