क्या सच में अपग्रेड करने का समय आ गया है? तकनीकी विनिर्देशों पर एक नज़र
जूतों को लेकर हमेशा एक लंबी बहस छिड़ी रहती है। जब RunRepeat के Nimbus 25 लैब टेस्ट के डेटा ने मैक्सिमलिस्ट कुशनिंग की दुनिया में तहलका मचाया था, तो लगा था कि यही अंतिम विकल्प है। लेकिन अब, 2026 के अंत में जब नया मॉडल बाजार में है, तो डेटा के आधार पर तुलना करना जरूरी हो जाता है। यहाँ कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं है। सीधे RunRepeat के Nimbus 27 लैब डेटा पर आते हैं। मैंने इन दोनों जूतों के बीच के वास्तविक अंतर को स्पष्ट करने के लिए नीचे दी गई टेबल तैयार की है।| विशेषता (Feature) | Asics Gel Nimbus 25 | Asics Gel Nimbus 27 | मुख्य बदलाव |
|---|---|---|---|
| मिडसोल फोम | FF BLAST PLUS ECO | FF BLAST PLUS ECO 2.0 | नए वर्जन में फोम का घनत्व थोड़ा कम है, जिससे यह हल्का महसूस होता है। |
| वजन (पुरुष US 9) | 299 ग्राम | 285 ग्राम | लगभग 14 ग्राम की कमी। |
| स्टैक हाइट (हील/टो) | 41.5 mm / 33.5 mm | 42 mm / 34 mm | स्टैक में मामूली वृद्धि, लेकिन वजन वितरण बेहतर है। |
| हील-टू-टो ड्रॉप | 8 mm | 8 mm | कोई बदलाव नहीं। |
| अपर मेश (Upper) | इंजीनियर्ड निट | एडवांस्ड जैक्वार्ड मेश | वेंटिलेशन 15% बेहतर है। |
Source: RunRepeat Lab Specs. Last verified: 2026-11-12
अगर आप इन दोनों जूतों को करीब से देखें, तो ड्रॉप और कुशनिंग की मूल फिलॉसफी समान है। असली खेल वजन वितरण (weight distribution) का है।
ज्यादा कुशनिंग का मतलब हमेशा बेहतर दौड़ नहीं होता
Update: 2026-11-12: मेरे पुराने लेख दौड़ से पहले कैफीन का प्रभाव: डेटा क्या कहता है? में मैंने यह तर्क दिया था कि कैफीन मांसपेशियों की थकान को छुपा देता है, और उसी दौरान एक भ्रामक सलाह भी दी थी कि "मैक्स कुशनिंग वाले जूते पैरों को पूरी तरह से इम्पैक्ट से बचाते हैं।" मैं यहाँ अपनी उस बात को सुधारना चाहूँगा। नए शोध से यह स्पष्ट है कि ज्यादा कुशनिंग हमेशा कम थकान की गारंटी नहीं देती।
धावकों के बीच एक बहुत ही आम गलतफहमी है कि जूता जितना अधिक नरम होगा, दौड़ना उतना ही आसान होगा। विज्ञान कुछ और ही कहता है। PubMed Central पर प्रकाशित एक विस्तृत रिसर्च के अनुसार, अत्यधिक कुशनिंग वाले मैक्सिमलिस्ट जूते आपके दौड़ने के बायोमैकेनिक्स को बदल सकते हैं।
जब बहुत नरम सतह पर लैंडिंग होती है, तो शरीर स्वाभाविक रूप से स्थिरता खोजने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में टखने और घुटने की सूक्ष्म मांसपेशियां अधिक मेहनत करती हैं। 42.195 किलोमीटर की दूरी में यह अतिरिक्त मेहनत संचित होती है। शुरुआत के 15-20 किलोमीटर में जो फीलिंग अच्छी लगती है, वही 30 किलोमीटर के बाद पिंडलियों में भारीपन ला सकती है।
जूतों की 500 मील की एक्सपायरी डेट
जूते कब बदलने चाहिए? Hal Higdon मैराथन ट्रेनिंग गाइडलाइन्स एक स्पष्ट नियम बताती हैं: हर 300 से 500 मील के बाद आपको अपने रनिंग शूज बदल लेने चाहिए। 2015 से (पिछले 11 वर्षों से) मैं मैराथन ट्रेनिंग कर रहा हूँ और अपनी एक्सेल स्प्रेडशीट में हर जूते का डेटा ट्रैक करता हूँ। 38 साल की उम्र में इंजरी से बचना मेरी प्राथमिकता है। इस स्प्रेडशीट में 14 अलग-अलग कॉलम हैं जहाँ तापमान, आर्द्रता और कुशन के 'बाउंस' का रिकॉर्ड रहता है। डेटा के अनुसार, जब मेरे asics gel nimbus 25 ने 400 मील का आंकड़ा पार किया, तो मिडसोल फोम सपाट महसूस होने लगा। जो जूता 100 मील पर आगे की ओर धकेलता था, वह 450 मील पर ऐसा लग रहा था जैसे मैं रेत पर दौड़ रहा हूँ।Tip: Strava का 'Gear Tracker' फीचर जरूर ऑन करें। यह आपको याद दिलाएगा कि आपके जूतों ने अपनी उम्र पूरी कर ली है।
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