Asics Novablast: बाउंस और कंफर्ट का बेहतरीन मेल

रनिंग शूज़ की दुनिया में बाउंस और कुशनिंग की जंग

मैराथन की तैयारी के लिए सही running shoes का चुनाव करना कोई मामूली काम नहीं है। बाजार में इतने सारे विकल्प हैं कि किसी एक को चुनना सिरदर्द बन सकता है। सीधे डेटा और तकनीकी विनिर्देशों (specifications) को देखना सबसे सटीक तरीका है। यहाँ हम Asics Novablast की तुलना इसके दो सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वियों—Puma Velocity और Nike Pegasus—से कर रहे हैं। इस विश्लेषण में किसी भी तरह की व्यक्तिगत राय को अलग रखते हुए केवल लैब डेटा और कुशनिंग मेट्रिक्स पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

कुशनिंग और स्टैक हाइट का गणित

जूते के सोल की मोटाई (स्टैक हाइट) कुशनिंग का एक सीधा संकेतक है। नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट होता है कि मिडसोल तकनीक के मामले में ये तीनों ब्रांड बिल्कुल अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं।
जूते का मॉडल हील स्टैक हाइट (mm) फोरफुट स्टैक हाइट (mm) मिडसोल फोम तकनीक हील्ड-टू-टो ड्रॉप (mm)
Asics Novablast 3/4 41.5 33.5 FF Blast+ Eco 8.0
Nike Pegasus 40 33.0 23.0 ReactX + Zoom Air 10.0
Puma Velocity Nitro 33.5 23.5 Nitro Foam 10.0

वजन और एनर्जी रिटर्न

आमतौर पर सोल की मोटाई बढ़ने से जूते का वजन बढ़ जाता है। लेकिन आधुनिक फोम तकनीक ने इस पुरानी धारणा को तोड़ दिया है। नोवाब्लास्ट का वजन लगभग 255 ग्राम (यूएस साइज 9) है। इतने भारी-भरकम लुक के बावजूद यह पेगासस (लगभग 260 ग्राम) से हल्का है। एनर्जी रिटर्न की बात करें तो लैब परीक्षणों से पता चलता है कि इसका FF Blast+ Eco फोम लगभग 72% से 75% एनर्जी रिटर्न प्रदान करता है। पारंपरिक EVA फोम केवल 50-55% रिटर्न देते हैं। कुशनिंग और बाउंस का यही संतुलन इसे लंबी दूरी के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाता है। Source: RunRepeat Asics Novablast Data. Last verified: 2026-03-10

क्या जूतों में अधिक बाउंस का मतलब बेहतर परफॉरमेंस है?

"क्या सच में यह बाउंस हमें तेज बनाता है, या यह केवल कंपनियों का एक मार्केटिंग गिमिक है?" वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, कोई भी जूता आपको अतिरिक्त "ऊर्जा" नहीं देता। वह केवल उस ऊर्जा के नुकसान को कम करता है जो हर बार आपके पैर के जमीन से टकराने पर नष्ट होती है। इसे रनिंग इकॉनमी (Running Economy) कहते हैं। जब हम इन जूतों को पहनकर दौड़ते हैं, तो मोटा और उच्च-प्रतिक्रिया (high-response) वाला मिडसोल एक स्प्रिंग की तरह काम करता है। पैर जमीन पर पड़ता है, फोम दबता है, शॉक सोख लेता है। जब आप पैर उठाते हैं, फोम अपनी मूल स्थिति में वापस आता है। यही वह 'बाउंस' है जो महसूस होता है। बायोमैकेनिक्स के शोध स्पष्ट करते हैं कि जूतों का मिडसोल और उसकी स्टिफनेस सीधे तौर पर एंकल जॉइंट (टखने के जोड़) पर पड़ने वाले भार को प्रभावित करती है। PubMed Central: Footwear Biomechanics में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, कुशनिंग वाले जूते जिनमें एनर्जी रिटर्न की दर अधिक होती है, वे मांसपेशियों की थकान को काफी हद तक कम करते हैं। इसका सीधा असर परफॉरमेंस पर पड़ता है। 25 किलोमीटर के बाद अगर आपके पैर कम थके हुए हैं, तो आप अपनी लक्षित गति (target pace) को अधिक समय तक बनाए रख सकेंगे। यह बाउंस आपको जादुई रूप से रातों-रात उसैन बोल्ट नहीं बना देगा, लेकिन अंतिम कुछ किलोमीटर में पूरी तरह से बिखरने से जरूर बचाता है।

लॉन्ग रन के दौरान पैरों की थकान और उसका सीधा समाधान

मैराथन ट्रेनिंग का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा संडे लॉन्ग रन (Sunday Long Run) होता है। 20 किलोमीटर का आंकड़ा पार करते ही शरीर और दिमाग दोनों जवाब देने लगते हैं। पैरों में भारीपन, पिंडलियों (calves) में जलन और जोड़ों में झटके महसूस होना आम बात है। इस समस्या की जड़ बार-बार जमीन से होने वाला इम्पैक्ट (Impact) है। 25-30 किलोमीटर दौड़ने पर आपके पैर हजारों बार आपके शरीर के वजन का लगभग तीन गुना बल सहन करते हैं। पारंपरिक जूतों में यह शॉक सीधा आपकी हड्डियों और मांसपेशियों तक पहुंचता है।
Tip: लॉन्ग रन के दौरान अपने फॉर्म पर ध्यान दें। थकान बढ़ने पर पोस्चर खराब हो जाता है, जिससे हील-स्ट्राइक (एड़ी के बल दौड़ना) बढ़ जाता है और इम्पैक्ट का असर दोगुना हो जाता है।
यहीं पर Asics Novablast जैसे running shoes की भूमिका अहम हो जाती है। इसका उच्च स्टैक शॉक एब्जॉर्बर का काम करता है। Hal Higdon Marathon Training के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि मैराथन ट्रेनिंग ब्लॉक की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी जल्दी रिकवर होते हैं। जब आप मोटे कुशन वाले जूतों में लॉन्ग रन करते हैं, तो इम्पैक्ट फोर्स कम होने के कारण अगले दिन पैरों में अकड़न (DOMS) काफी कम होती है। यह तेज रिकवरी आपको अपने अगले वर्कआउट (जैसे मंगलवार का इंटरवल सेशन) को बिना किसी रुकावट के पूरी ताकत से करने में मदद करती है।
लॉन्ग रन के बाद स्ट्रेचिंग करता हुआ एक थका हुआ धावक
लॉन्ग रन के बाद स्ट्रेचिंग करता हुआ एक थका हुआ धावक

कुशनिंग को लेकर एक पुरानी गलत धारणा

रनिंग की दुनिया में एक समय यह धारणा बहुत मजबूत थी कि मोटे जूते भारी, सुस्त और आपको धीमा करने वाले होते हैं। 2015 में जब मैंने मैराथन ट्रेनिंग शुरू की थी, तब रेसिंग फ्लैट्स (Racing Flats) का ही बोलबाला था। पतले सोल वाले जूते ही 'फास्ट' माने जाते थे। मुझे भी लगता था कि ज्यादा कुशन का मतलब है ऊर्जा का दलदल में फंस जाना। आधुनिक फोम तकनीक ने इस धारणा को जड़ से खत्म कर दिया है। Runner's World Review भी इस बात की पुष्टि करता है कि नोवाब्लास्ट की ज्यामिति (geometry) और फोम का घनत्व इसे न केवल आराम देता है, बल्कि एक आक्रामक और तेज राइड भी प्रदान करता है। रहस्य मिडसोल के फोम के फॉर्मूलेशन में है। यह केवल 'सॉफ्ट' नहीं है; यह 'रेसिलिएंट' (resilient) है। दौड़ते समय आप कुशन में धंसते नहीं हैं, बल्कि यह आपको वापस उछालता है। 11 साल के अनुभव के बाद अब मुझे यह स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं होती कि मेरी वह पुरानी धारणा पूरी तरह गलत थी। आज के उच्च-कुशन वाले जूते पहले के न्यूनतम (minimalist) जूतों की तुलना में लंबी दूरी पर गति बनाए रखने में कहीं अधिक मददगार हैं।

रनिंग कम्युनिटी की राय: फोरम्स में क्या चर्चा है?

मेरे अपने अनुभव से परे, यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि व्यापक रनिंग कम्युनिटी इस जूते के बारे में क्या सोचती है। विभिन्न रनिंग ग्रुप्स और ऑनलाइन फोरम्स (जैसे Strava और Reddit) पर इसे लेकर लगातार चर्चा होती रहती है। एक आम सहमति इसके फिट और कम्फर्ट को लेकर उभर कर आती है। कई धावकों ने रिपोर्ट किया है कि इसका टो-बॉक्स (toe-box) पर्याप्त चौड़ा है। यह भारतीय पैरों के लिए बहुत उपयुक्त है, क्योंकि लॉन्ग रन के दौरान हमारे पैर अक्सर सूज जाते हैं।
हाल ही में, कई धावक असिक्स की अपनी लाइनअप में ही कन्फ्यूज हो जाते हैं। Asics Gel Nimbus 27 vs 26 की बहसों में अक्सर इस मॉडल का भी जिक्र आता है। कम्युनिटी का मानना है कि निंबस जहां अधिकतम आराम देता है, वहीं नोवाब्लास्ट अधिक मजेदार राइड प्रदान करता है।
फोरम्स पर कुछ शिकायतें भी हैं। सबसे बड़ी समस्या गीली सतहों पर इसकी ग्रिप को लेकर है। बारिश के बाद सड़कों या टाइल्स वाले फुटपाथों पर कई धावकों ने इसके आउटसोल को थोड़ा फिसलन भरा पाया है। मानसून के दौरान तेज दौड़ते समय यह चेतावनी ध्यान में रखने योग्य है।

स्टैक हाइट की बहस और वर्ल्ड एथलेटिक्स के नियम

जूते की मोटाई पर बात हो और वर्ल्ड एथलेटिक्स के नियमों की चर्चा न हो, ऐसा नहीं हो सकता। मुझे एक्सेल स्प्रेडशीट में डेटा एनालिसिस का शौक है। मेरे पास एक पूरी शीट है जिसमें मैंने 2020 से अब तक वर्ल्ड एथलेटिक्स द्वारा जूतों के नियमों में किए गए हर बदलाव का डेटा रखा है। World Athletics Shoe Regulations के अनुसार, किसी भी रोड रनिंग रेस (जैसे मैराथन) में 40mm से अधिक हील स्टैक हाइट वाले जूतों का उपयोग प्रतिबंधित है। नोवाब्लास्ट की हील स्टैक हाइट 41.5mm मापी गई है। इसका तकनीकी मतलब यह है कि नियमों के अनुसार, यह एक "इल्लीगल" रेसिंग जूता है। क्या आपको इससे घबराना चाहिए? बिल्कुल नहीं। यह नियम केवल एलीट और पेशेवर एथलीट्स (जो प्राइज मनी के लिए दौड़ते हैं) पर लागू होता है। दिल्ली या मुंबई मैराथन में अपना पर्सनल बेस्ट (PB) सुधारने वाले हम जैसे शौकिया धावकों के लिए यह पूरी तरह से वैध और सुरक्षित है। मेरे डेटा एनालिसिस से पता चलता है कि बाजार में मौजूद लगभग 15% टॉप-टियर ट्रेनिंग शूज़ आज इस 40mm की सीमा को पार कर चुके हैं।
Ready to hit the ground running
Ready to hit the ground running

लैब विश्लेषण: मिडसोल का विज्ञान

इस खंड में व्यक्तिगत अनुभवों से हटकर केवल शुद्ध तकनीकी और प्रयोगशाला डेटा का विश्लेषण किया गया है। मिडसोल फोम का घनत्व (Foam Density): ड्यूरोमीटर (Durometer) का उपयोग करके फोम की कठोरता मापी जाती है। Asics Novablast में उपयोग किए गए फोम का ड्यूरोमीटर स्कोर HA (Shore A) स्केल पर मापा जाता है। लैब डेटा के अनुसार, इसका फोम बाजार के औसत की तुलना में लगभग 15-20% अधिक नरम है। यह नरमी ही इसे वह खास कुशन देती है। एनर्जी रिटर्न और तापमान का प्रभाव: एक महत्वपूर्ण मेट्रिक यह है कि तापमान में बदलाव का फोम पर क्या प्रभाव पड़ता है। 20 मिनट तक फ्रीजर में रखने के बाद किए गए लैब टेस्ट से पता चलता है कि इसका फोम केवल 18% कड़ा होता है। सर्दियों में भी यह जूता अपना बाउंस नहीं खोता, जबकि पारंपरिक EVA फोम सर्दियों में ईंट जैसे सख्त हो जाते हैं। स्टिफनेस (लचीलापन): बल परीक्षण (Force test) में, इसे 90 डिग्री मोड़ने के लिए लगभग 26.5 न्यूटन बल की आवश्यकता होती है। यह इसे एक मध्यम लचीला जूता बनाता है।

जब दिल्ली की सर्द सुबह में मुझे सही बाउंस मिला

जनवरी की एक कड़कड़ाती ठंड वाली सुबह। तापमान 5 डिग्री सेल्सियस रहा होगा और घना कोहरा छाया हुआ था। दो दिन पहले ही मैंने 32 किलोमीटर का एक क्रूर मैराथन सिमुलेशन रन पूरा किया था और पैरों में सुस्त सा दर्द था। उस दिन मुझे केवल 10 किलोमीटर का आसान रिकवरी रन करना था, लेकिन शरीर बिस्तर से बाहर नहीं निकलना चाहता था। मैंने इयरफ़ोन लगाए, पुरानी हिंदी फिल्मों की प्लेलिस्ट चालू की—किशोर कुमार की आवाज़ में "चला जाता हूँ किसी की धुन में..." बज रहा था। मैंने अपने जूतों के फीते बांधे और पहली कुछ अजीब सी स्ट्राइड्स लीं। शुरुआती एक किलोमीटर तक पैर भारी लगे। लेकिन जैसे ही शरीर गर्म हुआ, उस 41.5mm मोटे मिडसोल ने काम करना शुरू कर दिया। सड़क का कंक्रीट जैसे गायब हो गया। हर कदम के साथ वो हल्का सा बाउंस मेरे थके हुए क्वाड्स को वह सहारा दे रहा था जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी। वह रन शारीरिक रूप से तो आरामदायक था ही, मानसिक रूप से भी उसने मुझे तरोताजा कर दिया। मैराथन ट्रेनिंग हफ्तों और महीनों तक खुद को अनुशासन में रखने की प्रक्रिया है। इस यात्रा में आपके जूते आपके सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। यदि आप एक ऐसे जूते की तलाश में हैं जो रोजमर्रा की ट्रेनिंग के भारी माइलेज को संभाल सके, लॉन्ग रन में पैरों की रक्षा करे, और दौड़ने को थोड़ा और 'मजेदार' बना दे, तो यह बाउंस और कंफर्ट निश्चित रूप से एक बार आजमाने लायक है।
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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