क्या कार्बन प्लेट वाले जूते चोट का कारण बन रहे हैं?

कार्बन प्लेटेड बनाम ट्रेडिशनल रनिंग शूज: एक तकनीकी तुलना

बाजार में इन दिनों हर धावक की जुबान पर एक ही चर्चा है— 'सुपर शूज'। जब हम Nike alphafly या किसी अन्य कार्बन प्लेटेड जूते की बात करते हैं, तो हम केवल एक साधारण फुटवियर की बात नहीं कर रहे हैं। हम पैरों के नीचे बंधे एक स्प्रिंग-लोडेड सिस्टम की बात कर रहे हैं। पारंपरिक रनिंग शूज (जैसे Brooks Ghost या Asics Nimbus) का मुख्य काम आपके पैरों को जमीन के झटके से बचाना (cushioning) और एक आरामदायक राइड देना होता है। इसके विपरीत, कार्बन प्लेट वाले जूतों का उद्देश्य है ‘एनर्जी रिटर्न’। प्लेट की कठोरता (stiffness) और मोटे कुशन (PEBAX फोम) का संयोजन आपके हर कदम की ऊर्जा को वापस धकेलता है।

स्टिफनेस और एनर्जी रिटर्न मैट्रिक्स

नीचे दिया गया मैट्रिक्स यह स्पष्ट करता है कि तकनीकी स्तर पर ये दोनों कितने अलग हैं:
फीचर (Feature) ट्रेडिशनल रनिंग शूज (Traditional) कार्बन प्लेटेड शूज (Super Shoes)
सोल स्टिफनेस (Stiffness) लचीला (Flexible), पैर के प्राकृतिक मूवमेंट के साथ मुड़ता है। अत्यधिक कठोर (Highly Stiff), पैर के अंगूठे के जोड़ को मुड़ने से रोकता है।
एनर्जी रिटर्न (Energy Return) लगभग 60-70% ऊर्जा वापस मिलती है। 85% से 90% तक ऊर्जा की वापसी।
दैनिक बनाम रेस-डे उपयोगिता रोजमर्रा की ट्रेनिंग, रिकवरी रन और लॉन्ग रन के लिए सुरक्षित। केवल स्पीड वर्कआउट और रेस के दिन के लिए उपयुक्त।
ग्राउंड इम्पैक्ट डिस्ट्रीब्यूशन पूरे पैर और टखने (ankle) पर समान रूप से। टखने का काम कम होता है, दबाव घुटने, कूल्हे और मध्य-पैर की हड्डियों पर शिफ्ट होता है।

Source: RunRepeat लैब डेटा. Last verified: 2026-03-10

डेटा साफ दिखाता है कि कार्बन प्लेट आपके टखने का काम कम कर देती है। लेकिन वह काम कहीं तो जाएगा ना? वह दबाव आपकी शिन बोन, घुटनों और कूल्हों पर ट्रांसफर हो जाता है।
ट्रैक पर चमकीले रंग के कार्बन प्लेटेड जूते के फीते बांधता एक धावक
ट्रैक पर चमकीले रंग के कार्बन प्लेटेड जूते के फीते बांधता एक धावक

नेहरू पार्क की सुबह और जूतों का बदलता शोर

मुझे आज भी 2015 के वे दिन अच्छी तरह याद हैं जब मैंने पहली बार सीरियस मैराथन ट्रेनिंग शुरू की थी। पिछले 11 वर्षों में मैंने रनिंग कम्युनिटी को बहुत करीब से बदलते देखा है। उस समय जब हम दिल्ली-एनसीआर के नेहरू पार्क के सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ते थे, तो जूतों की एक हल्की, दबी हुई "थप-थप" की आवाज़ आती थी। लेकिन आज? आज 38 की उम्र में जब मैं उसी ट्रैक पर जाता हूँ, तो हर तरफ सिर्फ एक ही आवाज़ गूंजती है— "क्लैक-क्लैक-क्लैक"। हर दूसरा धावक नियॉन हरे या गुलाबी रंग के जूते पहने नज़र आता है।
"और ईमानदारी से कहूँ तो, यह मुझे कभी-कभी परेशान कर देता है! जैसे पुरानी हिंदी फिल्मों में हीरो के पास हमेशा एक जादुई तरकीब होती थी, लोग सोचते हैं ये जूते भी रातों-रात उनका पेस सुधार देंगे। मैं देखता हूँ कि जो लोग 6 घंटे में मैराथन पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, जिनका पेस 8:30 मिनट प्रति किलोमीटर है, वे भी 40mm मोटे कार्बन शूज पहनकर दौड़ रहे हैं। यह एक खतरनाक ट्रेंड बन गया है।"
शुरुआत में मैंने भी कुछ धावकों को इन्हें आज़माने की सलाह दी थी। मैंने सोचा था कि एक्स्ट्रा कुशनिंग से उन्हें रिकवरी में मदद मिलेगी। मैं गलत था। इन जूतों ने धावकों की रनिंग इकॉनमी तो बढ़ा दी, लेकिन साथ ही स्पोर्ट्स क्लीनिक के बाहर लगने वाली लाइनें भी लंबी कर दीं।

क्या ये जूते वास्तव में हमारी हड्डियां कमजोर कर रहे हैं?

यह सवाल बार-बार उठता है। जब हम इन जूतों के बायोमैकेनिक्स को समझते हैं, तो तस्वीर डरावनी लगती है। साधारण जूतों में हमारा पैर प्राकृतिक रूप से मुड़ता है। लेकिन कार्बन प्लेट इस मोड़ को रोक देती है। यह एक 'टीटर-टोटर' (seesaw) की तरह काम करता है। हाल ही में हुए मेडिकल शोध इस बात की पुष्टि करते हैं। PubMed Central / NIH पर प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, जो धावक अचानक से एडवांस्ड फुटवियर टेक्नोलॉजी वाले जूतों का उपयोग शुरू करते हैं, उनमें नेविकुलर और मेटाटार्सल बोन स्ट्रेस इंजरी का जोखिम काफी बढ़ जाता है। एक्सेल स्प्रेडशीट्स में डेटा एनालिसिस करना मेरी एक पुरानी आदत है। जब मैंने अपने उन धावकों के इंजरी डेटा को ट्रैक किया जिन्होंने हाल ही में सुपर शूज पर स्विच किया था, तो उनमें पिंडली (shin splints) और एड़ी के दर्द के मामले 40% तक ज्यादा मिले। Runner's World में भी स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट्स ने यही चिंता जताई है कि ये जूते आपके बायोमैकेनिक्स को इस तरह बदलते हैं जिसके लिए हमारी हड्डियां तैयार ही नहीं हैं।
आधुनिक मैराथन शूज के मोटे कुशन और सोल का क्लोज अप शॉट
आधुनिक मैराथन शूज के मोटे कुशन और सोल का क्लोज अप शॉट

सुपर शूज का सुरक्षित इस्तेमाल: सीधे नियम

यदि आपने भारी रकम खर्च करके कोई सुपर शू खरीद ही लिया है, तो इसे बिना चोटिल हुए कैसे इस्तेमाल करना है, इसके कुछ स्पष्ट नियम हैं:
  • एक से अधिक जूतों का उपयोग (Rotation): आपके पास कम से कम दो जोड़ी जूते होने चाहिए। एक साधारण कुशनिंग वाला जूता और दूसरा कार्बन प्लेटेड। अपने कुल माइलेज का 80% हिस्सा डेली ट्रेनर में ही दौड़ें।
  • धीरे-धीरे अनुकूलन (Gradual Introduction): अगर आपने नए कार्बन जूते लिए हैं, तो उन्हें सीधे 42 किमी की रेस में न पहनें। उन्हें पहले 5 किमी के स्पीड वर्कआउट में आज़माएं।
  • फॉर्म पर ध्यान दें: Hal Higdon जैसे दिग्गज कोचों की ट्रेनिंग यह सिखाती है कि नए उपकरण कभी भी खराब रनिंग फॉर्म की भरपाई नहीं कर सकते। यदि आप भारी हील-स्ट्राइकर हैं, तो कार्बन प्लेट्स नुकसान पहुंचाएंगी।

जूतों की मोटाई और अंतरराष्ट्रीय नियम

इस तकनीकी दौड़ को नियंत्रित करने के लिए खेल के सर्वोच्च निकायों को कड़े नियम बनाने पड़े। World Athletics के अनुसार, सड़क पर दौड़ी जाने वाली रेस के लिए किसी भी रनिंग शू के सोल की अधिकतम मोटाई (Stack Height) 40 मिलीमीटर से अधिक नहीं हो सकती और जूते के भीतर एक से अधिक कठोर संरचना (कार्बन प्लेट) नहीं होनी चाहिए। भारत में भी एमेच्योर धावकों के बीच इन जूतों का क्रेज देखते हुए, Athletics Federation of India (AFI) अपनी मेडिकल गाइडलाइंस में इंजरी प्रिवेंशन पर जोर देता है। उच्च-तीव्रता वाले प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों को अपनाते समय धावकों को उचित रिकवरी प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। जैसे-जैसे शू-मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां इस 40mm की सीमा के भीतर ही नई, और भी अधिक बाउंस वाली फोम विकसित करती जाएंगी, खेल प्राधिकरणों को शायद भविष्य में 'मैक्सिमम एनर्जी रिटर्न' लिमिट भी तय करनी पड़े। तब तक, अपने पैरों की ताकत बढ़ाने पर ध्यान दें, न कि सिर्फ जूतों के बाउंस पर।
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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