क्या एक जूता सच में धावक को हवा में उड़ने का अहसास दे सकता है?
"जब मैंने पहली बार उस जूते को देखा, तो लगा जैसे किसी विज्ञान कथा फिल्म का कोई उपकरण मेरे सामने रखा हो। वह रनिंग शू कम और कोई स्प्रिंग बोर्ड ज्यादा लग रहा था।"वर्ष 2015 से मैराथन दौड़ रहा हूँ। इन 6 सालों के अपने रनिंग सफर में मैंने कई तरह के जूते पहने हैं, घिसे हैं और फेंके हैं। बात कुछ ही समय पहले की है, जब एक रेस एक्सपो में जाना हुआ। वहां मैंने पहली बार Nike Air Zoom पॉड्स वाले जूतों को एकदम करीब से देखा। जूते के आगे के हिस्से (forefoot) में लगे वे दो छोटे, नियॉन रंग के एयर पॉड्स किसी एलियन तकनीक जैसे लग रहे थे। क्या ये सच में काम करते हैं? क्या इनसे चोट लगने का खतरा कम होता है? हालांकि मैं बेहतरीन Running Shoes: Nike Air सीरीज का पुराना प्रशंसक रहा हूँ, लेकिन यह 'जूम' तकनीक कुछ अलग थी। एक उत्सुकता ने घेर लिया था कि क्या यह सिर्फ एक मार्केटिंग गिमिक है, या सच में रनिंग की दुनिया बदलने वाली है।

नए धावकों के लिए सीधे सुझाव
अक्सर धावक यह सवाल पूछते हैं कि क्या उन्हें इन जूतों पर पैसे खर्च करने चाहिए। यहाँ कुछ सीधी सलाह है:- कुशनिंग और पैर का प्रकार: सबसे पहले अपने पैर का प्रकार (आर्क) समझें। जूम की बाउंस बैक कुशनिंग न्यूट्रल रनर्स के लिए बेहतरीन है, लेकिन अगर आपको ओवरप्रोनेशन (overpronation) की समस्या है, तो आपको स्टेबिलिटी शूज की जरूरत हो सकती है।
- बजट और जरूरत: ये जूते सस्ते नहीं आते। अगर आप हफ्ते में सिर्फ 2-3 दिन दौड़ते हैं, तो शायद आपको तुरंत इतनी महंगी तकनीक की जरूरत नहीं है।
- टेस्ट रनिंग: कभी भी नया जूता खरीदकर सीधे हाफ या फुल मैराथन न दौड़ें। जूतों को पहले 5k या 10k जैसी छोटी दूरी पर टेस्ट करें।
Tip: जूता हमेशा शाम के समय खरीदें क्योंकि दिनभर की थकान से पैर थोड़ा सूज जाता है। इससे आपको सही फिटिंग मिलेगी।
शॉक एब्जॉर्प्शन के पीछे का विज्ञान
यहाँ कोई कहानी नहीं, सिर्फ विज्ञान की बात करते हैं। जब हम दौड़ते हैं, तो हर कदम पर हमारे शरीर के वजन का लगभग तीन गुना बल जमीन से टकराता है। शॉक एब्जॉर्प्शन और ऊर्जा वापसी (Energy Return) ही वह जगह है जहाँ यह तकनीक खेल बदलती है। बायोमैकेनिक्स के अनुसार, जब धावक का पैर जमीन पर पड़ता है, तो पारंपरिक ईवा (EVA) फोम केवल 60-65% ऊर्जा वापस लौटाता है। बाकी ऊर्जा फोम के दबने और गर्मी में नष्ट हो जाती है। लेकिन ZoomX और एयर पॉड्स का संयोजन एक अलग ही स्तर पर काम करता है। NCBI / PubMed Central में प्रकाशित शोध पत्रों के अनुसार, इन उन्नत शूज से धावकों की रनिंग इकॉनमी में औसतन 4% का सुधार देखा गया है। इसका मतलब है कि समान गति बनाए रखने के लिए धावक को कम ऑक्सीजन और कम ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। लंबी दूरी के धावकों में यह मांसपेशियों की थकान (Muscle fatigue) को काफी हद तक कम कर देता है।लोधी गार्डन से लेकर बड़े मंच तक: बदलता परिदृश्य
दिल्ली की सुबह का एक अलग ही मज़ा है। 2017-18 तक, लोधी गार्डन और नेहरू पार्क के ट्रैक्स पर आपको धावकों के पैरों में ज्यादातर सामान्य कुशनिंग वाले नीले, काले या सफेद जूते ही दिखते थे। आज दृश्य बिल्कुल बदल गया है। सुबह 5:30 बजे, धुंध के बीच, दर्जनों धावकों के पैरों में नियॉन ग्रीन और ब्राइट ऑरेंज रंग के चमकीले जूते चमकते नजर आते हैं। वैश्विक डाटा देखें, तो Strava Year in Sport की रिपोर्ट साफ दिखाती है कि कैसे एमेच्योर धावकों से लेकर एलीट एथलीट्स तक, हर कोई इस 'सुपर शू' ट्रेंड को अपना रहा है।
धावकों का अनुभव: क्या 'बाउंस' सच में काम करता है?
यह जानने के लिए कि असल में यह तकनीक कैसे काम करती है, RunRepeat जैसी वेबसाइट्स और ऑनलाइन फोरम्स पर धावकों के अनुभव खंगालना जरूरी है। कई धावकों का कहना है कि यह कुशनिंग जादुई है। उनका फीडबैक था: "ऐसा लगता है जैसे मेरे पैरों के नीचे छोटे-छोटे ट्रैम्पोलिन लगे हों।" रेस के आखिरी 10 किलोमीटर में जहाँ पहले पैर पत्थर जैसे भारी हो जाते थे, वहीं अब धावक महसूस करते हैं कि उनके पैरों में जान बची हुई है। अगर आपने कभी Nike Alphafly: रेस डे पर जादुई प्रदर्शन का सच पढ़ा है, तो आप समझेंगे कि लोग इसे लेकर इतने उत्साहित क्यों हैं। लेकिन कुछ धावकों ने बताया कि उच्च स्टैक हाइट (High Stack Height) के कारण उन्हें मोड़ (sharp turns) पर संतुलन बनाने में मुश्किल होती है और टखने (ankle) मुड़ने का डर रहता है।डेटा एनालिसिस, पुरानी फिल्में और रनिंग मेट्रिक्स
शॉक एब्जॉर्प्शन की बात करते हुए मुझे अक्सर अपनी एक अजीब आदत याद आ जाती है। मुझे डेटा से प्यार है। मैं एक्सेल स्प्रेडशीट में अपने पेस (pace), हार्ट रेट और कैडेंस (cadence) का बारीकी से विश्लेषण करता हूँ। मुझे हर छोटी डिटेल चाहिए होती है। जैसे पहाड़ों में ट्रेकिंग करते समय हर कदम सोच-समझकर रखना होता है, वैसे ही मैं अपने रनिंग डेटा को देखता हूँ। यह कुछ-कुछ वैसा ही है जैसे पुरानी हिंदी फिल्मों में दिलीप कुमार या देव आनंद अपने किरदार की हर छोटी से छोटी बारीकी पर काम करते थे। मैं अक्सर 60 के दशक की फिल्में देखते हुए सोचता हूँ कि क्या वे लोग भी अपने काम को लेकर इतने ही 'डेटा-ड्रिवेन' थे? जब मैंने इन नए जूतों के साथ अपना एक्सेल डेटा देखा, तो मेरा औसत कैडेंस थोड़ा कम हो गया था, लेकिन मेरी स्ट्राइड लेंथ (कदम की दूरी) बढ़ गई थी। जूते की तकनीक सचमुच मेरे दौड़ने के बायोमैकेनिक्स को बदल रही थी!नियमों का विकास: जब तकनीक ने गवर्निंग बॉडीज को चुनौती दी
यह शायद खेल के इतिहास का सबसे दिलचस्प अध्याय है। तकनीक इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि खेल के नियम पीछे छूट गए। जब पहली बार ये हाई-स्टैक और कार्बन-प्लेट वाले जूते मैराथन सर्किट में आए, तो रिकॉर्ड्स ऐसे टूटने लगे जैसे कोई मजाक हो। आलोचकों ने इसे 'मैकेनिकल डोपिंग' (Mechanical Doping) कहना शुरू कर दिया। बढ़ते विवाद को देखते हुए, World Athletics को मजबूरन हस्तक्षेप करना पड़ा। 2020 में नियम बदले गए और स्पष्ट किया गया कि जूते के सोल की मोटाई 40 मिलीमीटर से अधिक नहीं हो सकती।पारंपरिक कुशनिंग बनाम उन्नत तकनीक
धावकों की सुविधा के लिए, विभिन्न स्रोतों से डेटा लेकर एक तुलनात्मक मैट्रिक्स तैयार किया गया है:| विशेषता | पारंपरिक EVA फोम | Nike Air Zoom + ZoomX |
|---|---|---|
| ऊर्जा वापसी (Energy Return) | ~60 - 65% | ~80 - 85% |
| वजन | अपेक्षाकृत भारी | अत्यंत हल्का |
| टिकाऊपन (Durability) | 500-800 किमी | 300-400 किमी (रेस डे के लिए) |
| कीमत | किफायती | प्रीमियम/काफी महंगा |
Source: RunRepeat & NCBI Data. Last verified: 2021-09-21
यहाँ सबसे दिलचस्प और शायद सबसे निराशाजनक बात 'टिकाऊपन' है। आप इतनी महंगी तकनीक खरीदते हैं, लेकिन Nike ZoomX फोम: कितना टिकाऊ है यह सुपर फोम? के अनुसार, इनकी लाइफ पारंपरिक जूतों से काफी कम होती है।
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