रनिंग में थकान का कारण: आयरन की कमी और एनीमिया

दिल्ली के नेहरू पार्क की पगडंडियों से एक गंभीर सबक

फरवरी की वह सुबह थी, दिल्ली की हल्की धुंध और नेहरू पार्क की मिट्टी की वह जानी-पहचानी खुशबू। मैं अपने 12 साल के रनिंग करियर (2015 से अब तक का सफर) के दौरान हजारों किलोमीटर दौड़ चुका हूँ, लेकिन उस दिन कुछ अलग था। मेरा शरीर भारी लग रहा था। 5 किलोमीटर के बाद ही ऐसा महसूस हुआ जैसे फेफड़ों में हवा नहीं, बल्कि पत्थर भरे हों। मैंने सोचा शायद कल की इंटरवल ट्रेनिंग का असर है, या शायद उम्र का तकाजा (39 की उम्र में रिकवरी थोड़ी धीमी तो होती ही है)। लेकिन जब यह सिलसिला हफ्तों तक चला और मेरा marathon training plan पूरी तरह चरमराने लगा, तब मुझे समझ आया कि समस्या पैरों में नहीं, मेरे खून के अंदर थी। नेहरू पार्क में मेरे साथ दौड़ने वाले एक साथी धावक ने मुझसे कहा, "राहुल भाई, आप धीमे क्यों हो रहे हो? कहीं 'बर्नआउट' तो नहीं हो गया?" उस वक्त मुझे लगा कि शायद मैं ज्यादा मेहनत कर रहा हूँ। लेकिन एक प्रमाणित कोच के तौर पर मुझे पता था कि ओवरट्रेनिंग और 'शारीरिक कमी' के बीच एक बहुत बारीक रेखा होती है। जिसे हम अक्सर आलस या प्रेरणा की कमी मान लेते हैं, वह दरअसल आयरन की कमी (Iron Deficiency) हो सकती है। अनुभव का निचोड़ यह है कि जब आपका ट्रेनिंग प्लान आपकी क्षमता के अनुरूप हो, आपकी नींद पूरी हो, फिर भी आप अपनी 'ईजी पेस' पर हांफने लगें, तो यह समय डेटा की गहराई में उतरने का है।

आंकड़ों का खेल: क्या आपका हीमोग्लोबिन 'रनर' के हिसाब से सही है?

एक एक्सेल स्प्रेडशीट के शौकीन के रूप में, मुझे डेटा का विश्लेषण करना पसंद है। जब मैंने अपनी लैब रिपोर्ट देखी, तो मेरा हीमोग्लोबिन 13.5 g/dL था। लैब की सामान्य रेंज के हिसाब से मैं 'नॉर्मल' था। लेकिन क्या एक मैराथन धावक के लिए यह काफी है? बिल्कुल नहीं। TrainingPeaks के एक शोध के अनुसार, एंड्योरेंस एथलीटों के लिए केवल हीमोग्लोबिन देखना काफी नहीं है। असली खिलाड़ी 'फेरिटिन' (Ferritin) है, जो आपके शरीर में आयरन के भंडारण (storage) को दर्शाता है। एक सामान्य व्यक्ति के लिए 20-30 ng/mL का फेरिटिन स्तर ठीक हो सकता है, लेकिन एक गंभीर धावक के लिए, अगर यह 35-40 ng/mL से नीचे गिरता है, तो प्रदर्शन में गिरावट साफ दिखने लगती है। धावकों में अक्सर 'स्पोर्ट्स एनीमिया' देखा जाता है। जब आप कड़ी ट्रेनिंग करते हैं, तो आपका प्लाज्मा वॉल्यूम बढ़ जाता है। इससे हीमोग्लोबिन थोड़ा 'पतला' (diluted) दिखाई दे सकता है। इसे अक्सर लोग एनीमिया समझ लेते हैं, जबकि असली समस्या 'आयरन की कमी बिना एनीमिया के' (Iron deficiency without anemia) हो सकती है, जहाँ हीमोग्लोबिन तो ठीक है लेकिन फेरिटिन के भंडार खाली हैं।

समस्या: फुट-स्ट्राइक हेमोलिसिस और इसका समाधान

क्या आपने कभी सोचा है कि सड़क पर पैर पटकने से आपका खून कम हो सकता है? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन विज्ञान इसे 'फुट-स्ट्राइक हेमोलिसिस' कहता है। Runner's World के अनुसार, जब हमारा पैर जमीन पर पड़ता है, तो पैरों के तलवों की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं में लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) शारीरिक रूप से टूट जाती हैं। लगातार हार्ड सरफेस (कंक्रीट या डामर) पर दौड़ने से यह प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके अलावा, पसीने और जठरांत्र संबंधी मार्ग (GI tract) से भी आयरन का नुकसान होता है।
  • समाधान: अपनी लैंडिंग को हल्का करने की कोशिश करें। मिड-फुट स्ट्राइक इसमें मदद कर सकती है।
  • सतह बदलें: सप्ताह में कम से कम दो बार घास या मिट्टी वाली पगडंडियों पर दौड़ें।

पहाड़ों की यादें और ऑक्सीजन का संघर्ष

मुझे पहाड़ों में ट्रेकिंग का बहुत शौक है। पिछले साल जब मैं हिमालय की ऊंचाइयों पर था, तो मैंने गौर किया कि वहां की कम ऑक्सीजन में भी मेरा शरीर अच्छा प्रदर्शन कर रहा था क्योंकि मेरा आयरन लेवल उस समय अनुकूलित (optimized) था। अब इसे मैराथन से जोड़िए। आयरन ही वह तत्व है जो आपके खून में हीमोग्लोबिन बनाता है, और हीमोग्लोबिन का काम है फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर मांसपेशियों तक पहुँचाना। अगर आयरन कम है, तो आपके पास चाहे जितनी बड़ी मांसपेशियां हों या कितना भी अच्छा हार्ट रेट हो, आपकी मांसपेशियों को 'दम' नहीं मिलेगा। बिना आयरन के दौड़ना वैसा ही है जैसे आप दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे हों लेकिन आपके शरीर को ऐसा महसूस हो रहा हो जैसे आप एवरेस्ट की चोटी पर बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के हों।
प्रो टिप: यदि आप अपनी 'जोन 2' रन के दौरान भी जरूरत से ज्यादा हांफ रहे हैं, तो यह हृदय की कमजोरी नहीं, बल्कि ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता (आयरन) की कमी हो सकती है।

क्या धावकों को आम लोगों से अधिक आयरन चाहिए?

इस सवाल का संक्षिप्त उत्तर है—हाँ, बहुत अधिक। World Athletics के पोषण सर्वसम्मति (Consensus) के अनुसार, सहनशक्ति वाले एथलीटों, विशेषकर महिलाओं को, सामान्य आबादी की तुलना में 30% से 70% अधिक आयरन की आवश्यकता हो सकती है।
आयरन की दैनिक आवश्यकता (अनुमानित)
श्रेणी सामान्य व्यक्ति (mg/day) मैराथन धावक (mg/day)
पुरुष 8-10 15-18+
महिला (Pre-menopause) 18 25-30+

Source: World Athletics Guidelines. Last verified: 2027-02-11

2015 की वो धुंधली सुबह और मेरी पहली बड़ी गलती

जब मैंने 2015 में गंभीरता से दौड़ना शुरू किया था, तब मैं बहुत भोला था। मुझे लगता था कि अगर मैं ज्यादा थक रहा हूँ, तो मुझे बस और 'पावर' दिखानी चाहिए। मैं अपनी बॉडी की बात सुनने के बजाय अपने स्टॉपवॉच की बात सुनता था। उस साल दिल्ली हाफ मैराथन से पहले मेरी हालत यह थी कि मैं ऑफिस में दोपहर को सो जाता था। मुझे लगा शायद यह काम का तनाव है। पुरानी हिंदी फिल्मों में जैसे नायक को अंतिम समय पर पता चलता है कि असली विलेन कौन है, वैसे ही मुझे कोच Hal Higdon के लेखों से समझ आया कि मेरी थकान का कारण मेरा 'इगो' नहीं, मेरा 'एनीमिया' था। मैंने आयरन सप्लीमेंट लेना शुरू किया (डॉक्टर की सलाह पर), और तीन हफ्तों के भीतर मेरी टाइमिंग में सुधार होने लगा। तब से मैंने कसम खाई कि मैं अपने किसी भी स्टूडेंट को इस 'आयरन ट्रैप' में नहीं फंसने दूँगा।

भारतीय रनिंग कम्युनिटी और ऑनलाइन चर्चाओं का सार

फेसबुक और व्हाट्सएप के भारतीय रनिंग ग्रुप्स में अक्सर यह चर्चा होती है कि 'हम शाकाहारी हैं, तो क्या हमें प्रोटीन सप्लीमेंट लेना चाहिए?' लेकिन आयरन पर चर्चा कम होती है। भारत में एक बड़ी आबादी शाकाहारी है, और Athletics Federation of India (AFI) के मेडिकल कमीशन के अनुसार, भारतीय एथलीटों में आयरन की कमी प्रदर्शन में गिरावट का सबसे बड़ा गैर-चोट (non-injury) संबंधी कारण है। ऑनलाइन मंचों पर मैंने देखा है कि कई धावक 'थकान' के लिए विटामिन डी या बी12 को दोष देते हैं, जबकि अक्सर अपराधी आयरन होता है। विशेष रूप से भारतीय आहार में पाए जाने वाले फाइटेट्स (अनाज में) आयरन के अवशोषण को रोकते हैं, जिससे चुनौती और बढ़ जाती है।

क्या करें? धावकों के लिए सीधा आयरन प्रोटोकॉल

अगर आप एक गंभीर marathon training plan फॉलो कर रहे हैं, तो यहाँ कुछ व्यावहारिक कदम दिए गए हैं:
  1. साल में दो बार फुल ब्लड काउंट (CBC) और फेरिटिन टेस्ट करवाएं: केवल हीमोग्लोबिन पर भरोसा न करें।
  2. विटामिन-C का साथ: जब भी आयरन युक्त भोजन (जैसे दाल या पालक) खाएं, साथ में नींबू पानी या संतरा जरूर लें। विटामिन-C आयरन के अवशोषण को 3 गुना तक बढ़ा सकता है।
  3. चाय और कॉफी से दूरी: भोजन के एक घंटे पहले और बाद में चाय/कॉफी न पिएं। इनमें मौजूद टैनिन आयरन को सोखने से रोकते हैं।
  4. लोहे की कड़ाही: यह पुरानी सलाह आज भी सोने जैसी खरी है। लोहे की कड़ाही में खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है।

हेप्सिडिन का विज्ञान: एक्सरसाइज के बाद का 'ब्लॉकर'

यह एक ऐसा बारीक पॉइंट है जिसे अक्सर अच्छे-अच्छे कोच भी भूल जाते हैं। PubMed Central (NIH) के शोध के अनुसार, जब हम दौड़ते हैं, तो शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ती है, जिससे 'हेप्सिडिन' (Hepcidin) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। जब हेप्सिडिन हाई होता है, तो आपका शरीर आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता। इसलिए दौड़ने के तुरंत बाद आयरन सप्लीमेंट लेना बेअसर हो सकता है। सही तरीका यह है कि आप दौड़ने के कम से कम 3-6 घंटे बाद या अगली सुबह खाली पेट आयरन लें, जब हेप्सिडिन का स्तर सबसे कम होता है।

भ्रम बनाम वास्तविकता: 'केवल पालक खाने से काम नहीं चलेगा'

लेख के अंत में, मैं एक बड़ा मिथक तोड़ना चाहता हूँ। हम सबने 'पोपाय द सेलर' को पालक खाकर ताकतवर बनते देखा है, लेकिन असलियत थोड़ी अलग है। आयरन दो प्रकार का होता है: हीम (Heme) और नॉन-हीम (Non-heme)। हीम आयरन (मांसाहारी स्रोतों से) शरीर द्वारा 15-35% तक अवशोषित होता है, जबकि नॉन-हीम आयरन (पालक, दालों से) केवल 2-20% ही अवशोषित हो पाता है। इसका मतलब यह नहीं कि आप शाकाहार छोड़ दें, बल्कि इसका मतलब है कि आपको अपने अवशोषण (absorption) के प्रति अधिक सचेत रहना होगा। पुराने जमाने की फिल्मों के नायक की तरह, जो अपनी कमियों को पहचान कर ही महान बनता है, एक धावक के रूप में आपको अपनी 'आंतरिक बायोकेमिस्ट्री' को समझना होगा। मैंने पिछले 12 सालों में सीखा है कि मैराथन केवल सड़क पर नहीं, बल्कि आपकी रगों में दौड़ते खून के साथ भी लड़ी जाती है। अगर आप बिना किसी कारण के थक रहे हैं, तो अपनी ईगो को साइड में रखें और अपनी फेरिटिन की रिपोर्ट चेक करवाएं। याद रखिए, एक एनीमिया मुक्त धावक ही एक खुशहाल धावक होता है। अगली बार जब आप नेहरू पार्क या अपने शहर की सड़कों पर उतरें, तो सुनिश्चित करें कि आपकी 'ऑक्सीजन एक्सप्रेस' पूरी क्षमता से चल रही है। हैप्पी रनिंग!
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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