भारत में बारिश के मौसम में रनिंग कैसे करें?

भारतीय मानसून और रनिंग परफॉर्मेंस: डेटा क्या कहता है?

भारत में मानसून केवल एक मौसम नहीं है; यह एक धावक के लिए अपनी सीमाओं को परखने की परीक्षा है। जब मैं अपनी एक्सेल स्प्रेडशीट्स में पिछले 11 वर्षों के ट्रेनिंग डेटा का विश्लेषण करता हूँ (मैंने 2015 में मैराथन की दुनिया में कदम रखा था), तो एक पैटर्न बहुत स्पष्ट रूप से उभरता है: जुलाई से सितंबर के बीच की गई मेहनत ही अक्टूबर-नवंबर के रेस सीजन में आपकी सफलता तय करती है। Athletics Federation of India (AFI) के कैलेंडर के अनुसार, भारत की अधिकांश बड़ी मैराथन सर्दियों में आयोजित होती हैं, जिसका सीधा मतलब है कि आपकी 'पीक ट्रेनिंग' मानसून की झमाझम बारिश के बीच ही होनी चाहिए (1 जून 2026 तक के नवीनतम शेड्यूलिंग डेटा के आधार पर)। लेकिन क्या बारिश में दौड़ना केवल भीगने का मजा लेने जैसा है? विज्ञान कुछ और कहता है। यह शरीर के तापमान विनियमन (Thermoregulation) की एक जटिल प्रक्रिया है। PubMed Central पर प्रकाशित शोध के अनुसार, उच्च आर्द्रता (Humidity) पसीने के वाष्पीकरण को रोकती है। बारिश की फुहारें आपको बाहर से ठंडा महसूस करा सकती हैं, लेकिन आपका कोर टेम्परेचर तेजी से बढ़ रहा होता है। नतीजा? डिहाइड्रेशन का खतरा, जिसे अक्सर धावक "ठंडे मौसम" के भ्रम में नजरअंदाज कर देते हैं।

मेरी पहली मानसूनी दौड़ और वो कड़वा सबक

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दौड़ते हुए मुझे एक दशक से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन 2015 का वो दिन आज भी याद है जब मैंने पहली बार भारी बारिश में लंबी दौड़ लगाने की हिम्मत की थी। उस समय मुझे लगता था कि कोई भी पुराने स्पोर्ट्स जूते बारिश के लिए काफी हैं। 11 साल बाद आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो उस नादानी पर हंसी आती है। उस दिन मेरे जूतों ने स्पंज की तरह पानी सोख लिया। 5 किलोमीटर के भीतर ही वे भारी पत्थर जैसे महसूस होने लगे और पैरों के तलवों में जो छाले (Blisters) पड़े, उन्होंने मुझे दो हफ्ते तक दौड़ने से दूर रखा। सबसे बड़ी सीख यही थी कि आपके running shoes का चुनाव ही आपकी मानसून ट्रेनिंग को सफल या विफल बनाता है। आधुनिक रनिंग जूतों में ड्रेनेज तकनीक होती है जो पानी को अंदर जमा होने के बजाय तुरंत बाहर निकाल देती है।

पुरानी फिल्मों का नॉस्टैल्जिया बनाम सुरक्षा की हकीकत

पहाड़ों में ट्रेकिंग करने और पुरानी हिंदी फिल्मों का शौकीन होने के नाते, मुझे बारिश में भीगना हमेशा से रोमांटिक लगा है। लेकिन एक कोच के नजरिए से, बारिश में कम होती 'विजिबिलिटी' किसी विलेन से कम नहीं है। Runner's World के विशेषज्ञों का सुझाव है कि बारिश में गहरे रंग के कपड़े पहनना खुद को खतरे में डालना है। विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टिव स्ट्रिप्स वाले कपड़े अनिवार्य हैं। इसके अलावा, एक ब्रिम्ड हैट (Brimmed Hat) केवल स्टाइल के लिए नहीं है; यह बारिश की बूंदों और कीचड़ को आपकी आंखों में जाने से रोकने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है। दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में बारिश का शुरुआती पानी आंखों में जलन पैदा कर सकता है, जिससे बचने के लिए कैप बहुत मददगार होती है।

सड़कों की पकड़ और जूतों का विज्ञान

चाहे आप मुंबई की मरीन ड्राइव पर हों या दिल्ली के नेहरू पार्क के रास्तों पर, बारिश का मतलब है फिसलन। भारतीय सड़कों पर तेल, मिट्टी और पानी का मिश्रण एक खतरनाक सतह बनाता है। RunRepeat का डेटा बताता है कि Gore-Tex जैसे वॉटरप्रूफ मटेरियल वाले जूते कुछ स्थितियों में अच्छे होते हैं, लेकिन भारी मानसूनी बारिश में वे कभी-कभी उलटा असर करते हैं। अगर पानी टखने के ऊपर से अंदर चला गया, तो वो जूता एक छोटे स्विमिंग पूल की तरह काम करेगा क्योंकि Gore-Tex पानी को बाहर नहीं जाने देगा। इसलिए, मैं अक्सर ऐसे जूतों की सलाह देता हूँ जिनमें 'ओपन मेश' हो, ताकि पानी जितनी जल्दी अंदर आए, उतनी ही जल्दी बाहर निकल जाए।

गीले कपड़े और त्वचा का घर्षण: छालों का दुश्मन

बारिश में दौड़ते समय नमी की वजह से कपड़े शरीर से चिपक जाते हैं, जिससे त्वचा पर रगड़ (Chafing) लगती है। यह समस्या कितनी गंभीर हो सकती है, इसका अंदाजा आप Runner's World की गाइड से लगा सकते हैं। घर्षण से बचने के लिए ये तीन चीजें कभी न भूलें:
  • लुब्रिकेशन: जांघों, अंडरआर्म्स और उन सभी हिस्सों पर पेट्रोलियम जेली या एंटी-चाफिंग बाम का इस्तेमाल करें जहाँ कपड़े रगड़ खा सकते हैं।
  • सिंथेटिक फैब्रिक: कॉटन के कपड़े पानी सोखकर भारी हो जाते हैं और त्वचा को छील देते हैं। हमेशा नमी सोखने वाले (moisture-wicking) फैब्रिक ही चुनें।
  • मोजे: अपने पसंदीदा कॉटन मोजों को मानसून के दौरान अलमारी में बंद कर दें। केवल सिंथेटिक या ब्लेंडेड मोजे पहनें जो पैरों को सूखा रखने में मदद करें।

कौशल और विवेक: कब रुकना बेहतर है?

रनिंग कम्युनिटी के मंचों पर अक्सर चर्चा होती है कि "क्या असली रनर वही है जो तूफान में भी न रुके?" एक सर्टिफाइड कोच के रूप में मेरा मानना है कि बहादुरी और बेवकूफी के बीच एक बारीक रेखा होती है। दिग्गज मैराथन कोच Hal Higdon के प्रशिक्षण सिद्धांतों के अनुसार, लचीलापन (Flexibility) एक सफल एथलीट की पहचान है। यदि बाहर बिजली कड़क रही है या सड़कों पर इतना जलभराव है कि गड्ढे और खुले मैनहोल नहीं दिख रहे, तो घर के अंदर रहना ही बेहतर है। एक दिन ट्रेडमिल पर दौड़ने या घर पर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से आपकी फिटनेस कम नहीं होगी, लेकिन एक गंभीर चोट आपका पूरा सीजन बर्बाद कर सकती है।

मानसून रनिंग चेकलिस्ट: क्या करें और क्या न करें

नीचे दी गई तालिका आपको मानसून की तैयारी का एक त्वरित ओवरव्यू देगी:
ज़रूरी चीज़ें मुख्य लाभ सावधानी
सही running shoes गीली सतह पर ग्रिप और पानी की निकासी। घिसे हुए तलवों वाले पुराने जूतों से बचें।
रिफ्लेक्टिव गियर कम रोशनी में ड्राइवरों को आपकी मौजूदगी का पता चलता है। केवल नियॉन रंग पर्याप्त नहीं हैं, रिफ्लेक्टिव स्ट्रिप्स जरूरी हैं।
एंटी-चाफिंग क्रीम स्किन रैशेज और जलन से सुरक्षा। दौड़ शुरू करने के कम से कम 10 मिनट पहले लगाएं।
ब्रिम्ड कैप आंखों और चेहरे को सीधा बारिश से बचाना। तेज हवा में कैप उड़ने का डर रहता है, एडजेस्टेबल स्ट्रैप का उपयोग करें।

Source: Runner's World & RunRepeat Analysis. Last verified: 2026-06-01 मानसून की ट्रेनिंग आपको केवल एक बेहतर रनर ही नहीं बनाती, बल्कि यह आपके मानसिक संकल्प (Mental Grit) को भी मजबूत करती है। बस सुरक्षा का ध्यान रखें, अपने गियर का सही चुनाव करें और इस सुहावने मौसम का भरपूर फायदा उठाएं!
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Raftaar_Rahul

पिछले 9 वर्षों से मैराथन रनिंग के प्रति समर्पित। राहुल एक प्रमाणित रनिंग कोच हैं जिन्होंने दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर की प्रमुख मैराथन में हिस्सा लिया है और अब हिंदी भाषी धावकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं

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